Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र

📖 अध्याय

ग्रंथ की मूल विषय-सूची के अनुसार · 332 chapters across both volumes

भाग 1 · Bhag 1 · 82 अध्याय

1 आत्म साधना सूत्र 124 2 णमोकार की महिमा 83 3 रात्रि में भोजन क्यों नहीं करना चाहिए? 39 4 पानी क्यों छानना चाहिए? 11 5 पर प्रशंसा निज निंदा ही अर्चा है 149 6 चिद् विलास, सबसे खास 105 7 ईर्ष्या नहीं, ईश्वर चाहिए 155 8 चारित्र-ज्ञान-श्रद्धान, ये ही मोक्ष प्रधान 230 9 धर्म से रिक्त – 10 लोग 96 10 अहिंसा 40 11 अनुमोदना 20 12 ब्रह्मचर्य 114 13 गरीब रोटी को और अमीर भूख को ढूढ़ता 41 14 सबसे सुन्दर एक-जिसका नाम विवेक 160 15 चेहरा नहीं, चारित्र उज्ज्वल हो 222 16 लड़के व्यसन में-परिवार टेंशन में 258 17 खुश मिजाज-हाजिर जवाब 186 18 चिंता 37 19 दान 69 20 धैर्य 95 22 एकाग्रता 38 24 गुरु 81 25 झूठ 17 26 मुस्कुराती शकल से आती अकल 75 27 दुर्लभ गुण उपकार और कृतज्ञता 34 28 क्षमा 70 29 विनम्रता का द्वार, करे जग से उद्धार 145 30 कपट से दुःख प्रकट 19 31 लोभ 37 32 कंजूस 17 33 दारिद्र्य विजयी-लक्ष्मी 32 34 मित्रता 109 35 मौन रखता कौन 41 36 देवप्रिय 56 37 कुटिल नीति पर नहीं, धर्म नीति पर चलें 186 38 सुभाषित 171 39 नीति वाक्यामृत 287 40 निंदा जिन्दा की होती है, मृतक की प्रशंसा करते हैं 82 41 दाम करे सब काम 17 42 घड़ी घड़ी सजगता 19 43 पुरुष हो, पुरुषार्थ करो 162 44 धर्म धुरी मजबूत हो 83 45 चुनौतियाँ चलना सिखलाती है 56 46 सोलह सुख 14 47 समय, समझ, शक्ति का होना दुर्लभ है 43 48 स्वयं स्वयं पर बनो कृपालु 67 49 सोना बना लो या सोने में गुजार दो 77 50 परोपकारी स्तुत्य 48 51 पित्त चित्त और चारित्र शुद्धि करो 53 52 अनुभव खुली किताब पढ़ो 72 53 कार्बन पेपर बनो, रेत पेपर नहीं 117 54 सज्जनों का काम ट्रेफिक पुलिसवत् 48 55 उन्नति का मूल मंत्र-सेवा और प्रेम 38 56 कामना की भावना रोकती प्रभावना 78 57 पुजारी बने भिखारी नहीं 18 58 संस्कारों का शंखनाद 128 59 संस्कृति की रक्षा संस्कारों से 108 60 शिष्य और शीशी को डाँट चाहिए 32 61 सच्चा जीवन साथी ज्ञान है 107 62 सबका हित साहित्य से है 59 63 सोच बदलो, सितारे बदल जाएंगे 71 64 संत सायर सपूत से जीना सीखो 116 65 प्रशंसकों से निज को ना आँको 109 66 हम बिना रोये, गम भुलाना जानते हैं 60 67 मैं जो बंधन में पड़ा- इसका दोषी कौन? 117 68 दुश्मनी मिटाने का फार्मूला 14 69 साहित्य साधने का सदन है 128 70 विद्वान् सर्वत्र पूज्यते 30 71 सत्संगति से सुगति गमन 100 72 पुरुषार्थों का मूल कारण – आरोग्य 122 73 पाणिग्रहण हो प्राण ग्रहण ना 81 74 सराहना से भी प्रभावना 17 75 संघे शक्तिः, कलौ युगे 40 76 त्याग करो मन से करो 98 77 तन मिला तुम तप करो 107 78 प्रेम से सब कुछ पाया जा सकता है 112 79 वाणी वीणा हो, बाण नहीं 165 80 जीवन सुधरे जीभ से 32 81 याचना नहीं अर्चना करो 20 82 यश हो, परवश न हो 19 83 स्वाध्याय 30 84 हमारी आँखें : जीवन का आधार 1

भाग 2 · Bhag 2 · 250 अध्याय

2 जिनागम ज्ञान- मुक्तिपथ का वायु यान। 126 3 अपना लोटा छानो। 12 6 पुस्तक हेतु कुर्ता गिरवी। 3 9 जामुन खाली है गुठली फेंक दी। 8 10 विद्वान और विद्यार्थी का कर्त्तव्य। 5 12 सिद्धसेन का शास्त्रार्थ। 7 13 संस्कार शिविर। 20 15 षट् लेश्या। 5 16 प्रत्येक कार्य में सफलता कैसे प्राप्त करें। 4 17 सफल सीख- स्वस्थ बनो पर। 71 18 धर्म मगर को दिया। 25 19 धन दान में, मन ध्यान में, समय प्रभु गुणगान में। 99 20 समय, सलाह, सम्पदा बिना मांगी कभी न दें। 96 21 प्रतिष्ठा के लिए शिष्टाचार होना चाहिए। 94 22 जुबान पर ताला नहीं लगाम चाहिए। 100 23 समुद्र ने नहीं शराब ने लोगों को डुबोया। 86 24 कष्ट सहें और कड़वी बात सुनें 97 25 कहो वही बात जो सच्ची हो, अच्छी हो, उपयोगी हो। 114 26 हाथी पाकर, खुश होता ईंधन ढोकर। 88 27 समय कम अरमान ज्यादा। 17 28 पंचम काल में 49 विपरीतताएँ 10 29 अद्भुत जानकारियाँ। 36 30 आत्म निरीक्षण के पचास प्रश्न। 48 31 वैराग्य दोहावली 20 32 सत्संगति की महिमा। 18 34 सत्संगति इत्र की दुकान। 12 36 वज्रबाहु-उदयसुन्दर। 10 37 जैसे झालर की झंकार वैसे जीवन में संस्कार। 23 38 स्त्री दुःख। जुआ। 6 39 आपकी संस्कृति वस्त्रों पर हमारी संस्कृति चरित्र पर। 12 43 व्यर्थता। 10 46 पेड़, पशु, मनुष्य। 7 48 बुद्धि, लज्जा, हिम्मत, तन्दुरुस्ती का निवास कहाँ। 2 51 अभ्यास-रानी बछड़े के पास। 13 56 अभिमन्यु। मदालसा। 7 58 घुड़साल का तोता। 3 60 योगत्रय संस्कार। 6 62 पश्चात्ताप का रस-देखो कवि सरस 16 63 सप्त व्यसन। 9 64 अभक्ष्य वर्णन। 15 65 रात्रि में भोजन क्यों नहीं करना चाहिये ? 24 66 पानी छानने की क्या आवश्यकता है ? 24 68 पाप आस्रव के कारण। 11 70 कन्या को दहेज में ऊंट। 8 72 पुण्य की महिमा। 12 73 अरण्य मे रक्षक पुण्य। 5 77 बंदर के अंदर माया का समन्दर। 10 79 कर्मों कि गति। 4 81 भाग्य और पुरुषार्थ। 16 83 पावन मेरे नयन भये...। 13 86 माथे पर तिलक। 13 87 मैं नाती को सोने की.....खीर खाते...। बालक ने ए.बी.सी.डी. आदि वर्णमाला। 10 89 चेहरे पर कालिख। वर्णी जी की शिखरजी यात्रा। 9 91 आपने दोनों हाथ पकड़ लिए। 9 94 धर्मध्यान के बाह्य लक्षण। भगवान का विहार। 40 99 जब चिन्त्यो तब...। 5 93 रत्न विक्रय जरासंध के पास। प्रातिहार्य। 17 101 देव ने सेठ से पूजा का आग्रह। 30 102 पाँच लब्धि। 6 103 लोक मूढता। 8 106 घाट में घाट का सन्तुलन। 16 107 किसके प्रति बहुमान। 8 111 इत्र, मित्र, चरित्र, पवित्र। 9 114 तीन प्रकार के पदार्थ। 8 115 निःकांक्षित अङ्ग। 9 117 चमारों की सभा। शूद्री के यहाँ जन्मे। 7 119 उपगूहन अङ्ग। 7 120 स्थितिकरण अङ्ग। 7 122 वात्सल्य अङ्ग। 5 123 अपना बनाने के छह कारण। 11 125 ताऊ ने तराशा- वेश्या के। 13 127 गाय बछड़े के प्रेम ने शेर का। 2 130 शिकार से वहिष्कार। 6 131 वात्सल्य गुण ऋद्धि प्रदाता। 9 133 परोपकार की महिमा। 10 136 सर्प ने काटा चूहा दिखा। 13 138 मन्दिर बनाया तो धन्यवाद। 5 142 धर्म कि पुस्तक। परोपकार के तीन प्रश्न। 5 146 माँ एक रानी अनेक। 13 147 इंजीनियर की नहीं। 12 149 प्रभावना अङ्ग। 10 151 प्रेम पूर्ण आहार-सबसे। 5 153 क्रोध-हरण करता बोध। 60 155 क्रोधान्ध राजा। 4 156 उपकारी नेवला। चिलाती। 9 157 क्रोध पर विजय पाने का फार्मूला। 30 161 लात का जबाब लात से। 5 163 गागर में सागर। 29 166 क्षमाधर्म दोहावली। 42 167 चिरोंजा बाई का क्रोध। 6 171 सौ बार गड्ढा स्नान। 7 176 द्रोपती की क्षमा। 5 178 पन्द्रह लड्डू। 5 181 तुंकारी की क्षमा। 4 183 दुर्जन-क्रूर-कुमार्गरतों पर। 4 184 मार्दव धर्म-अहं का विसर्जन अर्ह का सर्जन। 22 186 जिसने अपने को कुछ माना। 10 188 अहङ्कार को जीतने के उपाय। 43 190 निर्मंदी कहानी। 29 194 हमारे हाथ अर्थी के बाहर। 5 195 जुआरी, पुजारी, कमाऊ, अंधा- चार पूत। 1 196 विद्या गुरु को ऊपर बैठाना। 4 197 जैसे को तैसा। दौलत अंधी। 3 199 मायाचारी के प्रकार- किशमिश, बेर, नारियल, छुहारा। 9 200 वेरिस्टर चित्तरञ्जन दास। 10 201 माया से हानि। 14 202 अमृत सूक्ति। 14 203 प्राञ्जल कथानक-दूसरों को खाई अपने लिए कुंआ। मृदुमुनी। माया का फल। घुड़सवार। दो चेहरे। मयूर और कछुए की मैत्री। 21 204 आर्जव धर्म से लाभ- चोर को पोटली उठा दी। डाकू खड़ग सिंह। 9 205 धन की नहीं, साफ नीयत की कमी। 6 206 माया का कुफल त्रियाचरित्र। 10 207 उत्तम शौच धर्म- लोभ मचाता क्षोभ। 17 208 लालच का इलाज। 15 210 शुचि संस्कृत सदन। 40 211 कड़ा के लोभ में जान गँवाई। 7 214 विप्र का श्री फल। 4 217 सोने का बैल। 4 221 ईमानदार की मिशाल। 5 224 कड़ार पिंग। 10 225 सत्य धर्म-वाणी को बाण नहीं वीणा बनाएँ। 9 226 असत्य का व्यापार जीवन की हार। 13 227 सत्य संस्कृत सदन। 9 228 सत्य धर्म कथानक-शेर को गधा। वर्ष में एक झूठ। वसु झूठ सेति। सत्यघोष। वाणी से व्यक्ति की पहचान। 13 229 सत्य वर्धन अलीक-विसर्जन। 29 231 मैं चोर हूँ। वारी नैया। सत्य और सुन्दर। 7 232 कम बोलो-काम का बोलो। 4 233 बांसुरी की विशेषता। 30 235 मैं पर धन कभी नहीं लेता। 9 238 कर्तृत्व बुद्धि। 4 240 जीवन जीना मौन से। 18 241 अपनी सुरक्षा। मौनं सर्वार्थ साधनं। 29 242 उत्तम संयमधर्म- संयम धारण भव दुःख वारण। 17 243 संयम संस्कृत सदन। 33 244 शुभचन्द्र और भर्तृहरि। 8 246 प्रद्युम्न का वैराग्य। यमपाल का संयम। बीज रक्षण। धन्वन्तरि और विश्वानुलोम। 7 247 असंयम का होना भव-भव में रोना। 9 248 घड़ी घड़ी में घड़ी बदलती। 16 249 संयम सीख-मोती मिला सीप। 50 250 संयम संस्कृत सदन। 17 251 श्रावक के सत्रह नियम। 19 252 असंयम का परिहार- नरकाया को सुरपति तरसे। आपने गृहस्थी नहीं बसाई। श्वसुर का जन्म नहीं हुआ। 8 254 मृगसेन धीवरअभयदान प्रदाता। 4 256 द्वादश विध तप- भावों से किया कब। 17 257 शिष्य की परीक्षा। 10 258 स्वाध्याय तास का- विश्वास मोक्ष का। 6 259 सेठ को मुक्ति चाहिए। 16 260 तपधर्म से लाभ। 8 264 तीनों अवस्था व्यर्थ। 7 266 तप की प्रेरणा। 39 267 उत्तम त्यागधर्म- त्याग से बुझाओ राग की आग। 24 268 सोला-सोलह प्रकार का। 10 269 अनङ्गसरा से विशल्या। 10 270 अकलङ्क और निकलङ्क। 26 273 वृक्ष की उदारता। 10 274 संसार कूप से निकलने का उपाय। 9 275 त्याग धर्म-काटे कर्म। 8 277 आहार दान का दाता। 7 280 राजा भोज- पं. के दाता। 6 281 धनार्जन मे कष्ट- विसर्जन...। 11 286 लोग माल उड़ा कर भी बुरा...। 5 288 त्याग की प्रेरणा। 19 289 धन्यकुमार चरित्र दान का श्रेष्ठतम फल। 19 292 चार तरह के लोग। 31 295 कोठी नहीं धर्मशाला। 6 299 बच्चा गुम गया। 4 303 सुकुमाल को राई। अज्ञान। भ्रांति टूटी। 8 304 परिग्रह से हानि। 13 305 कुँये का पानी गन्दा। 10 307 अपने पन से दुःख। 8 308 नींद हराम। छाँछ पीकर जोड़ा। बंदर की बंद मुट्ठी कर चना। हमारी बारह भावना। 6 309 मोह जीतने के उपाय। 1 310 जो दिन कटे सो आयु में...। 8 311 पुत्र को पत्र- 'घनश्याम'। 10 313 ब्रह्मचर्य से लाभ। 8 314 विजय का शुक्लपक्ष मे ब्रह्मचर्य। 5 315 कुशील से हानि। शील की नौ बाढ। ब्रह्मचर्य के पाँच अतिचार। 60 316 स्वप्न में गृहस्थी। कॉलेज की लड़की। यशोधरा रानी। 5 317 माँ नहीं राक्षसी। 11 321 रानी अमृता का छल। 4 324 वीर्यवास। वीर्य रक्षा के उपाय। सामाजिक हानि। माँ का कलेजा। स्त्री के भाव। 20 326 ब्रह्मचर्य की पाँच भावनायें। यह राग आग दहे सदा। 22 328 देशभूषण-कुलभूषण। 6 331 पत्नी ने पति को पिताजी कहा। जब राम बनता हूँ। मैं आपका पुत्र हूँ। 5 332 सात दिन का जीवन। भीष्म का ब्रह्मचर्य। ज्ञानी हँसता। 14 334 अंधे के हाथ में लेम्प। राजामधु। अशान्तिसागर। वज्रकर्ण। धवलसेठ। 22 335 निश्चय व्यवहार (सोदाहरण)। 29 336 निमित्त-उपादान (कृष्ण जी की बांसुरी)। 13 339 सम्यग्दर्शनादि के दृष्टांत। बीस प्रकार की भूलें। 43 340 द्वितीय अध्याय-भावों को सम्भालना। 9 342 भावों का प्रभाव। मन के हारे हार है। अग्नि में चार कषायें। 29 343 द्रव्य परावर्तन के दृष्टान्त। 34 344 शरीरोत्पत्ति का क्रम। सप्त धातु की मात्रा। 7 346 तीन वातवलय। नरक के आठ दुःख। 9 347 परिणाम। मध्यलोक का वर्णन। 35 348 आहार होता नीहार नहीं। भोग भूमि का वैभव। 12 349 उत्पत्ति क्रम। कुलकर वंश। वज्रजङ्घ श्रीमति। 5 351 मध्यलोक के अकृत्रिम जिनलय। 169 महापुरुष। 12 353 आज्ञा। उपपाद शैय्या। देवियों की उत्पत्ति। 25 355 क्रिया। सत्य नारायण के छः पुत्र। 9 357 मशीन में छः द्रव्य। पज्जय मूढा हि पर समया। 10 359 वचनों की शक्ति। इर्यापथ आस्रव। 8 361 मनुष्य के पाँच दुःख। अधिकरण। 10 362 जीवाधिकरण के 108 भेद। उपयोग संयोग। फोटो बिगाड़ दी। 10 363 सप्तम अध्याय- 9 365 मिलावट। पाँच मार्ग। लड़की की जिद। 18 367 हेतुओं का संक्षेप। पाँच अङ्ग का कर्ज। 8 368 लालटेन पर कपड़ा। आठ कर्मों का दृष्टांत। 14 369 प्रतिपक्षी की भी प्रसिद्धि। यथायोग्य उदय। 9 371 दशकरण दृष्टान्त। गुणस्थानों के उदाहरण। 6 373 ध्याता का लक्षण। तीन गुप्ति। पाँच समिति। 7 374 प्रतिक्रमण। प्रतिक्रमण विधान। 19 377 समवशरण में छत्तीस द्वार। चार अभाव। 24 378 तीन अनुबद्ध केवली। पाँच श्रुतकेवली। तीन करण। बारह प्रकार के समयसार 20 380 धावला पुस्तक एक। 28 381 श्रीपाल जी चरित्र। 5 383 सुरसुन्दरी-मदनसुन्दरी अध्ययन 1 384 सुरसुन्दरी को इच्छित वरदान। 2 386 श्रीपाल जी का विदेश गमन। 5 387 धवल सेठ की कूटनीति। 2 389 श्रीपाल जी की साधु वंदना। 3 390 श्रीपाल जी का भवान्तर श्रवण 2 391 राजभोग-वैराग्ययोग। 3 392 अक्षयतृतीया- आज का दान। 15 393 केवलज्ञान वीर जिनेश का। 18 394 श्रुत पञ्चमी। 15 395 संयम साधना का योग- पावन वर्षायोग। 10 396 गुरु पूर्ण माँ। 7 397 सबसे बड़ा कौन, प्रश्न खड़ा मौन। 23 399 चैत्र मास न हो दीक्षा प्रयास। 7 400 माँ, महात्मा, परमात्मा। 11 401 शव और शिव। 17 402 वीर शासन- एकम् कृष्णा सावन वीर प्रभु का शासन। 7 403 भील से भगवान- मारीच से महावीर। 4 405 तीन बन्दर। क्षमा। राष्ट्रपिता। 10 407 सत्य अहिंसा। 11 409 प्रसूति गृह में सङ्कल्प। 25 411 आठ प्रकार की मुक्ति। 7 415 दीपावली- मान्यताएँ। 8 416 पिच्छि परिवर्तन। 6 417 गाँव के लोग आबाद रहें। 11 419 मृत्यु महोत्सव सबसे बड़ा उत्सव। 9 420 शराबियों ने खेई नाव। 9 422 दुनिया को जीता पर मौत से हारा। 7 424 आ. ज्ञानसागरजी का व्यक्तित्व 3 425 जिनेन्द्रवर्णी परिचय। 3 426 गणेश प्रसाद वर्णी। 12 427 वर्णी वाणी। 12 428 पं. गोपालदास जी बरैया के रोचक प्रसङ्ग। 13 430 दीनहीन अनाथ की सेवा अवश्य करें। 10 1 पहला सुख निरोगी काया 26