जो धूल और पसीना को ग्रहण नहीं करती, कोमल होती है, सुकमार होती है और हल्की होती है ये पाँच गुण जिसमें होते हैं वह पिच्छिका प्रशंसनीय है, जैसे मयूर पङ्ख कुछ ग्रहण नहीं करते, उसी प्रकार साधु भी कुछ ग्रहण नहीं करते हैं। अनासक्ति 0 – भेजें
धनतेरस- आज के दिन भगवान् ने योग निरोध किया था, जिससे धन्य तेरस कहने लगे, आज यह धनार्जन तेरस हो गयी है। धन 0 – भेजें
संसार से मुक्ति दिलाने वाले अहिंसा पर्व को मनाते हैं और पटाखा जलाकर असंख्य जीवों को मारते हैं, यह धर्म विरुद्ध है। अहिंसा 0 – भेजें
भगवान् कर्मों से मुक्त हुए थे इस दिन साधु भी चतुर्मास के बन्धन से मुक्त हो जाते हैं, भगवान् ने कर्मजाल को साफ किया था, लोग घरों से मकड़ी के जाल को साफ कर लेते हैं। कर्म 0 – भेजें
लोगों को तीर्थ नहीं अब अस्पताल, श्मशान एवं कत्लखानों के दर्शन को जाना चाहिए, तीर्थ यात्राएँ अभी तक जो चमत्कार नहीं कर सकीं, वह चमत्कार कत्लखाने कर दिखायेंगे, वहाँ रोंगटे खड़े कर देने वाले दृश्य देखने के बाद शायद ही कोई मांसाहारी रह पायेगा। अहिंसा 0 – भेजें