Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 2 · अध्याय 36

वज्रबाहु-उदयसुन्दर।

10 सूत्र

दूध ने पानी की सङ्गति की तो पतला हो गया, आधी कीमत हो गयी, बदनाम हो गया और स्वाद भी बिगड़ गया किन्तु अल्पमूल्य वाले पानी को दूध ने अपने मूल्य का बना दिया।
संगति
क्षेत्र का प्रभाव- दूध की डेरी में बैठकर कोई शराब भी पिये तो लोग समझेंगे दूध पी रहा है और मदिरालय में बैठकर कोई दूध भी पिये तो लोग समझेंगे शराब पी रहा है।
संगति
एक क्षण की साधु की सङ्गति से वज्रबाहु, उदयसुन्दर का जीवन बदल गया था और महावैरागी चारुदत्त कुसङ्गति से वेश्यागामी हो गया था।
संगति
राजकुमार वज्रबाहु की शादी मनोरमा राजकन्या से हुई थी, जब उनका साला उदयसुन्दर पहली बार बहिन को लेने आया, तो वज्रबाहु ने इस शर्त पर ले जाने की स्वीकृति दी कि हम भी साथ में चलेंगे, हाथी पर सवार होकर तीनों जा रहे थे, जङ्गल में पहुँचते ही मुनिराज के दर्शन हो गये, देखते ही वज्रबाहु के मन में वैराग्य उत्पन्न हो गया, उदयसुन्दर साले ने हँसी में कहा, जीजाजी आप दीक्षा ले लोगे तो हम भी दीक्षा ले लेंगे और छब्बीस राजाओं के साथ तीनों दीक्षित हो गये, वज्रबाहु मनोरमा के राग मे ससुराल जा रहा था क्षण भर की साधुसङ्गति से जीवन बदल गया था।
संगति
बुजुर्गों की सङ्गति करो उनकी एक-एक झुर्री पर हजार-हजार अनुभव लिखे होते हैं, काँपते हाथ, हिलती गर्दन, लड़खड़ाते कदम, मुरझाया चेहरा यह सन्देश देता है कि जो भी शुभ करना है आज कर लो, कल नहीं कर पाओगे, बूढ़ा इंसान धरती का सबसे बड़ा शिक्षालय है, उसे देखकर उगते सूरज की डूबती कहानी का बोध होता है।
संगति
बैटरी डिस्चार्ज होने पर लाईट की सङ्गति से ऊर्जावान होती है, उसी तरह साधुओं की सङ्गति से आत्मा की शक्ति जाग्रत होती है।
संगति
मुनियों का रूप नहीं स्वरूप देखा जाता है पर वर्तमान में निःस्वार्थ समागम दुर्लभ हो गया है।
संगति
लौकिक जन की सङ्गति से व्यक्ति वाचाल, कुटिल व दुर्भावना से युक्त हो जाता है, अतःलौकिक संसर्ग त्याज्य है।
संगति
चन्दन बार-बार घिसे जाने पर भी उत्तम गन्ध से युक्त रहता है, सोना बार-बार तपाये जाने पर भी सुन्दर रहता है, गन्ना बार-बार निचोड़े जाने पर भी मधुर रहता है, सचमुच ही प्राणान्त होने पर भी महात्माओं की प्रकृति में विकार नहीं आता है।
चरित्र
जो सम्पत्ति में विनय से नम्रीभूत रहते हैं, विपत्ति में स्वाभिमान रूप पर्वत के शिखर पर आरूढ़ रहते हैं और ज्ञान होने पर मौन रहते हैं या कम बोलते हैं ऐसे आश्चर्य कारक चारित्र के धारक सज्जन पृथिवी में जयवन्त रहते हैं एवं श्रेष्ठ माने जाते हैं।
चरित्र