Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 2 · अध्याय 205

धन की नहीं, साफ नीयत की कमी।

6 सूत्र

गन्ना सीधा है उसकी मिठास स्वभाविक है, जलेबी टेड़ी है उसकी मिठास कृत्रिम है।
चरित्र
माया तो ठगनी भई, ठगत फिरत संसार। जा ठग ने ठगनी ठगी, ता ठग को नमस्कार।।
चरित्र
ज्ञानी आप ठगाइये और न ठगिये कोय। आप ठगे सुख ऊपजे, और ठगे दुःख होय।।
चरित्र
बनारसीदास जी ने चोर की पोटली उठा दी- बनारसी दास जी के घर में चोरी करने आये चोरों ने सारा माल बाँधकर तैयार कर लिया, सब चोरों ने एक दूसरे को पोटली उठा दी, अन्त में एक चोर को पण्डित जी ने स्वयं पोटली उठवा दी, चोर घर पर गये, उनकी माँ ने पूँछा कि आज कहाँ पर डांका डाला, पता चला कि बनारसी दास के घर में डांका डाला है, तो माँ ने कहा की सरल स्वाभावी पण्डित जी का माल अपन को नहीं पचेगा, अतः सारा माल वापस करवा दिया।
चरित्र
डाकू खड़गसिंह ने बाबाभारती का घोड़ा अपाहिज का भेष धारण कर मदद के बहाने छुड़ा लिया, बाबाभारती ने डाकू खड़गसिंह से कहा कि तूने अपाहिज का वेश बनाकर घोड़ा लिया है, ये छल है ऐसा किसी से मत कहना नहीं तो कोई भी गरीब अनाथ अपाहिज लोगों पर विश्वास नहीं करेगा। यह बात सुनकर रात भर डाकू को नींद नहीं आई, और सुबह आकर उसने घोड़ा वापिस कर दिया।
चरित्र
धन की नहीं साफ़ नियत की कमी है- एक किसान बहुत ईमानदार था, इसलिए नगर में उसकी बहुत इज्जत थी, दैवयोग से उसका देहावसान हो गया, उसका लड़का पिताजी की तेरहवी के लिए सेठ जी के यहाँ उधार पैसे लेने गया, सेठ जी ने पिताजी की छवि के कारण पैसे दे दिए, पैसे लेकर उसके मन में आया की यदि मैं सेठ जी के पैसे नहीं दूँगा तो क्या कर लेंगे, और आकर रास्ते में वृक्ष के नीचे सो गया, पैसे टोपी में रक्खे थे वह हवा चलने से उड़ गयी और भेंस ने उसके ऊपर गोबर कर दिया, जब सो कर उठा तो टोपी नहीं मिली तो वह घबरा गया, इधर-उधर ढूँढने लगा, जब नहीं मिली तो परेशान हो गया, निराश हो कर सेठ जी के पास पुनः गया, तो सेठ जी को उसकी हालत देखकर दया आ गयी, और उसको फिर से पैसे दे दिए, तब उसके मन में आया की मैं सेठ के बारे में कितना गलत सोच रहा था, सेठ जी कितने दयालु है, विना कुछ लिए दुबारा पैसे दे दिए, अब मैं सेठ जी का बिलकुल कर्ज नहीं रखूँगा, और कुछ दिन बाद किसी काम से उसी स्थान पर गया जहाँ उसके पैसे गुम हुए थे, वर्षा के कारण गोबर बह गया था जिससे उसकी टोपी मिल गयी, आकर उसने अपनी माँ को सारी बात बताई, तो माँ ने कहा बेटा धन की कमी नहीं साफ़ नियत की कमी है।
सत्य