कलौ युगे सङ्घेशक्ति- धागे से धागा मिलकर कपड़ा और तिनके से तिनका मिलकर रस्सा बनता है जिससे बड़े-बड़े हाथी भी बाँधे जाते हैं, पाँच अगुलियाँ मिलती हैं तब ग्रास मुख में जाता है। संगति 0 – भेजें
पाप में लीन पुरुष कापुरुष है, पाप से निवृत्त पुरुष पुण्यवान् पुरुष है, निज-पर के हित में संलग्न पुरुष सत्पुरुष है और जिसका परहित करना ही कार्य है वह महापुरुष है। दान 0 – भेजें
एक और एक ग्यारह होते हैं, सङ्गठन शक्ति परिवार में, समाज में, देश में समृद्धि को लाती है। संगति 0 – भेजें
परोपकार के लिए नदियाँ बहती हैं, गायें दूध देती हैं, वृक्ष फल देते हैं और परोपकार के लिए सज्जनों की प्रवृत्ति होती है। दान 0 – भेजें
जहाँ सुमति तहाँ सम्पति नाना, जहाँ कुमति तहाँ विपति निधाना। जहाँ एकता है वहाँ अनेक प्रकार की समृद्धि व ऋद्धि सिद्धि होती है और जहाँ पर वैमनस्य होता है वहाँ पर अनेक प्रकार की विपत्तियाँ आती हैं। विवेक 0 – भेजें
सहानुभूति और सहृदयता सुमति में होती है, यह स्वर्ग का द्वार है, जहाँ कुमति है वहाँ नरक का द्वार है एवं जीवन में दुःख, सङ्कट, तनाव व अशान्ति का कारण है। विवेक 0 – भेजें
कौरव सौ हैं और पाण्डव पाँच हैं किन्तु पाण्डव कहते हैं कि तीसरा विरोध करेगा तो हम पाँच और कौरव सौ नहीं किन्तु हम एक सौ पाँच हैं। संगति 0 – भेजें
अन्धकार में दीप जलाना सबके वश की बात नहीं है, कठिन समय में साथ निभाना हर साथी की रीत नहीं है। मन के मौन समन्दर में जब पीड़ाओं का ज्वार उठा हो, पीड़ाओं को पीकर मुस्कराना सबके वश की बात नहीं है।। संगति 0 – भेजें