Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 1 · अध्याय 30

कपट से दुःख प्रकट

19 सूत्र

सद्गुणों का होना ही काफी नहीं है, उन्हें व्यवस्थित रखना भी नितांत आवश्यक है, सारे सद्गुण विनय के आधीन हैं।
विनम्रता
नम्रता और प्रिय भाषण मनुष्य के आभूषण है।
विनम्रता
दुःख देने वाले व्यक्ति को शिक्षा अथवा दण्ड देने का यही एक उत्तम उपाय है कि तुम उसके बदले में भलाई करो जिससे वह मन ही मन लज्जा से भर जावे, यही उसके लिए गहरी मार है।
क्षमा
नम्रता बलवानों की शक्ति है और वह बैरियों का सामना करने के लिए सद्गृहस्थ को कवच का काम भी देती है।
विनम्रता
यदि तुम्हारा पड़ोसी जानबूझ कर झगड़ा करने की भावना से तुम्हें सताता हो तो भी सर्वोत्तम बात यही है कि तुम अपने हृदय में बदले की भावना न रखो और न बदले में चोट पहुँचाओ।
क्षमा
दूसरों का विश्वास पाने के लिए जीवन में सरलता और सहजता लाइए।
सत्य
कपट एक न एक दिन पतन की खाई में गिराता है।
सत्य
जो दूसरों को छलता है, वह नरक में जाकर उछलता है।
सत्य
भूल करने में तो पाप है ही लेकिन उसे छिपाने में उससे बड़ा पाप है।
सत्य
पाप कभी छिप नहीं सकता अतः धोखा देने वाले को अवश्य ही धोखा खाना पड़ता है यह ध्रुव सत्य है।
सत्य
सरलता ही अपने आप में प्रार्थना है।
सत्य
बच्चों का मन अन्दर से मंदिर, बाहर बन्दर होता है।
सत्य
मनुष्य शरीर धारण करके भी जो शठता, धूर्तता और कपट का व्यवहार करते हैं वे मनुष्य रूप में पशु माने गये हैं।
सत्य
मायाचारी करने वाला मनुष्य मरने के बाद नियम से तिर्यंच गति में उत्पन्न होता है।
कर्म
छल, कपट, धोखा, मायाचारी करने वाला व्यक्ति मोर के समान होता है जैसे मोर देखने में सुन्दर, बोलने में मधुर बोलता है किन्तु उसका भोजन सर्प होता है।
सत्य
जहाँ भी छल-कपट है वहाँ अपने सद्भावों की हत्या है, शुभ विचारों का नाश है, शुभ विचारों के अभाव में पतन निश्चित है इसलिए कपटवादी नहीं स्पष्टवादी बने।
सत्य
अपने स्वभाव को इतना सरल बनाइये कि सपने में भी आपसे किसी का बुरा न हो।
सत्य
निष्कपटता की परीक्षा स्वार्थ साधन के अवसर पर हो जाती है।
सत्य
हम अगर किसी धार्मिक स्थल पर प्रार्थना करते हैं तो मन से कम दूसरों को दिखाने के उद्देश्य से ज्यादा करते हैं।
सत्य