Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 2 · अध्याय 30

आत्म निरीक्षण के पचास प्रश्न।

48 सूत्र

क्या आपकी आँख सूर्योदय के पहले खुल जाती है?
समय
क्या आप आँख खुलते ही बिस्तर छोड़ देते हैं?
पुरुषार्थ
क्या दिन भर आपके चेहरे पर खुशी खेलती रहती है?
मन
क्या आप समय का पूर्ण सदुपयोग करते हैं?
समय
क्या आप खाओ-पियो-मौज उड़ाओं के सिद्धान्त को ही अच्छा समझते हैं?
अनासक्ति
क्या आप प्रतिदिन कोई अच्छी पुस्तक पढ़ते हैं?
ज्ञान
क्या आप सभी प्रकार की बुरी आदतों से दूर रहते हैं?
संयम
क्या आप अपना खाना विना शिकायत के चुपचाप खा लेते हैं?
संतोष
क्या आप श्रम को सर्वश्रेष्ठ कर्म समझते हैं?
पुरुषार्थ
क्या आपको श्रम की रोटी खाने में आनन्द आता है?
पुरुषार्थ
क्या आप वस्त्र आभूषण दूसरों के दिखाने के लिए पहनते हैं?
विनम्रता
क्या आपको बिस्तर पर लेटते ही नींद आ जाती है?
स्वास्थ्य
क्या आपका गुस्सा आने के दूसरे क्षण ही उतर जाता है?
क्षमा
क्या आपसे मिलने वाला हर व्यक्ति प्रसन्न रहता है?
संगति
क्या कभी आपसे छोटे लोगों ने आपकी कोई गल्ती पकड़ी है?
विनम्रता
क्या कभी आपने अपने से छोटों की कोई गलती पकड़ी है?
विवेक
क्या आप दूसरों के कष्टों को अपना कष्ट समझते हैं?
अहिंसा
क्या आप इस बात का ध्यान रखते हैं कि किसी के घर ऐसे समय न पहुँचे, जब घर के सदस्यों को असुविधा हो?
संगति
क्या आप दूसरों से ली गई वस्तु का पूरा ध्यान/सुरक्षा रखते हैं?
चरित्र
क्या आप हँसी-मजाक में भी झूठ बोलते हैं?
सत्य
खुला मुँह रख कर सोने वाला जीवन भर में आठ मकड़ी का मुँह में प्रवेश करा लेता है।
स्वास्थ्य
एक स्वस्थ मनुष्य पाँच सैकण्ड में एक श्वास पूर्ण करता है, पन्द्रह सैकण्ड में तीन और साठ सैकण्ड में बारह बार।
स्वास्थ्य
क्या आप मूर्खों की चापलूसी से प्रसन्न रहते हैं?
विनम्रता
क्या आप मूर्खों से भी शिक्षा ग्रहण कर लेते हैं?
ज्ञान
क्या गुणवान लोगों की सङ्गति आपको अच्छी लगती है?
संगति
क्या दुःखियों की सेवा करने में आपको आनन्द आता है?
दान
क्या आप अपने से बड़े लोगों की विनय करते हैं?
विनम्रता
क्या आपकी इन्द्रियाँ आपके नियन्त्रण में हैं?
संयम
क्या आप कम बोलते हैं?
वाणी
क्या आप समाज और संस्कृति के संरक्षण में योगदान देने की भावना रखते हैं?
चरित्र
क्या आप दूसरों के प्रति कृतज्ञता रखते हैं?
विनम्रता
क्या आप किसी के मेहमान बनते समय उसके काम में हाँथ बटाते हैं?
चरित्र
क्या आप इस बात का ख्याल रखते हैं कि एक बार की हुई भूल को दूसरी बार न करें?
विवेक
क्या आप दूसरों की बात ध्यान से सुनते हैं?
वाणी
जो काम आपको दिया जाता है, क्या उसे दूसरे की देख-रेख के विना ठीक तरह से कर लेते हैं?
पुरुषार्थ
क्या आप दूसरों पर विश्वास रखते हैं?
संगति
क्या आपका गुस्सा आपके काबू में रहता है?
क्षमा
क्या आप दीन-दुखियों की मदद करते हैं?
दान
क्या आप परमात्मा एवं परलोक के बारे में विचार करते हैं?
भक्ति
क्या आप दूसरों की गालियाँ सुनकर भी शान्त रहते हैं?
क्षमा
क्या आपको अपने से बातें करना आता हैं?
मन
क्या आपको अपनी सुनना आता है?
मन
क्या आप गुरुओं/ज्ञानियों की सेवा करके आनन्द का अनुभव करते हैं?
भक्ति
क्या कभी आप अपने को हल्का अनुभव तो नहीं करते हैं?
विविध
क्या आप पूजा-प्रतिष्ठा की चाह से मुक्त हैं?
अनासक्ति
क्या कभी आप अपने को अकेलेपन में खुश रख लेते हैं?
संतोष
क्या आप धन या अधिकार की तृष्णा से रहित हैं?
संतोष
क्या कभी आपने अपनी दानवता के दर्शन किए हैं?
विवेक