Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 2 · अध्याय 39

आपकी संस्कृति वस्त्रों पर हमारी संस्कृति चरित्र पर।

12 सूत्र

यौवन अवस्था में एक स्त्री होती, बुढापे में जरा, तृष्णा, गुस्सा ये स्त्रियाँ और बढ़ जाती हैं।
विविध
जन्म से बाटल में दूध पीने वाला, जीवन में पानी हो या शराब बाटल से ही पियेगा, माँ-बाप ने बच्चों को नौकरों के हाथ थमा दिया, तो वे भविष्य में नौकर ही बनेगें।
परिवार
तम्बाकू के सेवन से प्रतिवर्ष अस्सी लाख मौतें होती हैं।
स्वास्थ्य
पिता-पुत्र में, पति-पत्नि में, भाई-बहिन में, गुरू-शिष्य में स्वर्ग-नरक व्यवहार से ही बनता है।
परिवार
बुढ़ापे में जवानी से ज्यादा शौक होता है। भभकता है दीप जब बुझने को होता है।
अनासक्ति
फूलों का सार इत्र है, जीवन का सार चरित्र है।
चरित्र
बड़ों के सामने बड़े बनोगे तो विरोध होगा, छोटे बनकर के रहोगे तो आशीष मिलेगा।
विनम्रता
हर्ष से परिपूर्ण दृष्टि और प्रीति से लहराता मन, सज्जनों को इतना ही सत्कार उचित जान पड़ता हैं, शेष कार्य शिष्टाचार का विस्तार है।
चरित्र
लवण सागर और क्षीर सागर शास्त्रों में दो सागर कहें हैं, जिसके मन में प्रेम, करूणा, भक्ति का भाव हो वह क्षीर सागर हैं, जिसके मन में काम, क्रोध, मद, मोह, मान, मत्सर हो वह लवण सागर है।
मन
उतना भार उठाओ साथी, जितना ले चल सकते हो। उतनी बात कहो तुम मुख से, जितनी पूर्ण कर सकते हो।
वाणी
आप की संस्कृति वस्त्रों पर हमारी संस्कृति चरित्र पर- विवेकानन्दजी अमेरिका गये, लोगों ने देखा, ये एक चोला पहन कर आये हैं, क्या यही विवेकानन्द हैं? हम लोग समझते थे कि ये टिप-टॉप होंगे, फिर एक व्यक्ति ने पूँछ लिया कि आपके देश की यही संस्कृति है? विवेकानन्दजी ने कहा आप की संस्कृति वस्त्रों पर टिकी है, हमारी संस्कृति चरित्र पर टिकी है, वस्त्र तो दर्जी बना सकता है पर चरित्र का निर्माण सिर्फ गुरू ही कर सकते हैं।
चरित्र
जीवन में मिठास चाहिए तो अपने व्यवहार, विचार, आचार में माधुर्य लाओ, चाय में चीनी डालना भूल जाओं तो कोई बात नहीं, मगर बोली में चीनी डालना मत भूलो, विना चीनी की चाय तो डायबिटीज के मरीजों के काम आती है, विना मिठास की वाणी किसी के काम में नहीं आती है।
वाणी