जो अत्यन्त क्रोधी होता है, बैर नहीं छोड़ता है, कुछ भी बकता रहता है, धर्म और दया से रहित होता है, दुष्ट होता है और किसी के वश में नहीं आता है वह कृष्ण लेश्या वाला कहलाता है। क्षमा 0 – भेजें
जो काम करने में धीमा, बुद्धिहीन, विवेकहीन, विषय लोलुपि, अहङ्कारी, मायावी, आलसी, फूट डालने वाला, निद्रालु, ठगिया, धनधान्य में अति तीव्र लालसा रखने वाला हो वह नील लेश्या वाला कहलाता है। चरित्र 0 – भेजें
दूसरे के ऊपर क्रोध करना, दूसरे की निन्दा करना, अनेक प्रकार से दूसरों को दुःख देना अथवा औरों से बैर करना, अधिकतर शोकाकुलित रहना तथा भयग्रस्त रहना, दूसरों के ऐश्वर्यादि को सहन न कर सकना, दूसरे का तिरस्कार करना, अपनी नाना प्रकार से प्रशंसा करना, दूसरों के ऊपर विश्वास न करना, अपने समान दूसरों को भी मानना, स्तुति करने वाले पर सन्तुष्ट हो जाना, अपनी हानि वृद्धि को कुछ भी न समझना, रण में मरने की प्रार्थना करना, स्तुति करने वाले को खूब धन दे डालना, अपने करने योग्य अथवा नहीं करने योग्य का विवेक नहीं होना ये सब कापोत लेश्या वाले के चिन्ह है। चरित्र 0 – भेजें
एक बार पड़ोसन ने सास से पूँछा आपके घर की शान्ति का राज़ क्या है? सास ने कहा हमारी बेटी शक्कर है और बहु नमक के समान है, बहु ने सुना तो उसके व्यवहार में अन्तर आ गया, सास ने बहु से पूछा! बेटा क्या तुम्हारा स्वास्थ्य खराब है? बहु ने कहा कुछ नहीं हम तो पराये घर से आए हैं इसलिए नमक के समान हैं, और आपकी बेटी शक्कर के समान है, तब सास ने कहा! हमारा अभिप्राय यह था कि जैसे शक्कर पर्व के दिनों में विशेष रूप से काम आती है, उस प्रकार बेटी का कभी-कभी सुख मिलता है, किन्तु जैसे नमक प्रत्येक पदार्थ में काम आता है, वैसे ही हमारी बहु है, तब बहु प्रसन्न हुई, सही ज्ञान के अभाव में झगड़ा होता है। परिवार 0 – भेजें
बच्चों को श्रृंगार देते हैं संस्कार नहीं, सम्पत्ति देते हैं पर शान्ति नहीं, हम उन्हें सब कुछ देते हैं पर श्रेष्ठ जीवन नहीं और नीम का बीज बोकर आम की आशा करते हैं। परिवार 0 – भेजें