Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 1 · अध्याय 22

एकाग्रता

38 सूत्र

जरूरत के मुताबिक जिंदगी जियो ख्वाहिशों के मुताबिक नहीं क्योंकि जरूरत तो फकीरों की भी पूरी होती हैं और ख्वाहिशें बादशाहों की भी अधूरी रह जाती हैं।
संतोष
जो जिस वस्तु, व्यक्ति आदि का दुरुपयोग करता है, उसको उससे वंचित होने का दुःख भोगना ही पड़ता है।
कर्म
भाग्यवान वह है जिसका धन सेवक है और भाग्यहीन वह है जो धन का सेवक है।
धन
दौलत मनुष्य को अहंकार, अय्यासी और मूढ़ता के सामने ला पटकती है।
धन
धर्म के लिए धन नहीं चाहिए, मन चाहिए।
धर्म
धनवान वह नहीं जिसके पास अधिक धन है बल्कि धनवान वह है जो उसका उपयोग करना जानता है।
धन
धन कमाने की अपेक्षा उसे खर्च करने का काम ज्यादा कठिन है।
धन
संसार में धन की इच्छा से शाश्वत धर्म का त्याग कभी नहीं करना चाहिए।
धर्म
कुबेर भी यदि आमदनी से अधिक खर्च करेगा तो वह भी एक दिन कंगाल हो जाएगा।
धन
जो धन अत्यन्त क्लेश उठाने से और धर्म का उल्लंघन करने से अथवा शत्रु के सामने सिर झुकाने से प्राप्त होता हो, उसमें आप बल न लगाए।
धन
धन को इतना मूल्य मत दीजिए कि आप अपने स्वभाव और चरित्र को गिरवी रख बैठें।
धन
हमें यह याद रखना चाहिए कि अपरिग्रह का सिद्धान्त, विचार-नियंत्रण के बिना अमल में नहीं आता है।
अनासक्ति
धन के उपार्जन में दुःख, उपार्जित धन की रक्षा करने में दुःख, दान में दुःख और खर्च में दुःख इस प्रकार दुःख के कारण धन को धिक्कार हो।
धन
जीवन को क्षण भर कहा जाता है, इसका तात्पर्य है, एक भी क्षण बर्बाद न करो।
समय
जब समय तुम्हारे प्रतिकूल हो तो बगुला की तरह अकर्मण्यता करो, लेकिन जब वह अनुकूल हो तो बगुले के समान ही झपटकर तेजी के साथ हमला करो।
पुरुषार्थ
यदि जीवन में उन्नति करने और बुद्धिमानी की कोई बात है तो वह एकाग्रता है।
ध्यान
अपने सामने एक ही साध्य रखना चाहिए, उस साध्य के सिद्ध होने तक दूसरी किसी बात की ओर ध्यान नहीं देना चाहिए, रात-दिन सपने तक में उसी की धुन रहे, तभी सफलता मिलती है।
पुरुषार्थ
मनुष्य को प्रत्येक कार्य इतनी सतर्कता, साधना और निष्ठा से करना चाहिए मानो सम्पूर्ण सृष्टि का कल्याण उसी के कार्य की सफलता पर निर्भर है।
पुरुषार्थ
कार्य उसी का सिद्ध होता है, जो समय पर विचार कर कार्य करता है वह खिलाड़ी कभी नहीं हारता जो दाँव पर विचार कर लेता है।
पुरुषार्थ
जो सिर्फ काम की बात करते हैं, वे ही सफल होते हैं।
वाणी
अगर आप चाहते हैं कि कोई काम अच्छी तरह से हो, तो उसे खुद करें।
पुरुषार्थ
आज टी.वी. के विभिन्न चैनलों ने आदमी का चैन छीन लिया है।
मन
ईर्ष्या से बचने का उपाय मानसिक अनुशासन है।
संयम
जो व्यक्ति ईर्ष्यालु होता है, वही व्यक्ति बुरे किस्म का निंदक भी होता है।
चरित्र
बाहर की हर चीज दौड़कर पाई जाती है, पर अन्दर की चीज ठहर कर पाई जाती है। सावधानी बुद्धिमत्ता की पहली सीढ़ी है।
ध्यान
मोक्ष प्राप्ति के लिए सभी को बारह भावनाओं का चिन्तन करना पड़ता है, फिर भले ही वह तीर्थंकर ही क्यों न हो?
ध्यान
अपनी अभिलाषाओं को वश में कर लेने के बाद मन को जितनी देर तक चाहो उतनी देर तक एकाग्र कर सकते हो।
ध्यान
जब विचार चंचल होता है तो वह अस्त-व्यस्त और शक्तिहीन हो जाता है, इसलिए विचारों की स्थिरता ही व्यक्ति को सम्पूर्ण बनाती है।
ध्यान
संसार में प्रत्येक कार्य में विजय प्राप्त करने के लिए एकाग्रचित्त होना आवश्यक है, जो लोग चित्त को चारों ओर से बिखेरकर काम करते हैं, उन्हें कभी सफलता नहीं मिलती है।
ध्यान
लक्ष्य साधने की सफलता अभ्यास से अधिक 'मन की एकाग्रता' पर निर्भर करती है।
ध्यान
जो बात आपके मन की सुख-शान्ति और संतुलन को विचलित करे उसे मत सुनिये, मत देखिये, मत समझिये।
मन
टाइम-टेबल हमारे जीवन को व्यवस्थित रखता है।
समय
जैसे समरभूमि में युद्ध हो या न हो परन्तु योद्धा प्रतिक्षण तैयार रहते हैं क्योंकि पता नहीं शत्रु कब आक्रमण कर दे? वैसे ही साधक प्रतिक्षण तैयार रहते हैं क्योंकि पता नहीं मृत्यु कब आक्रमण कर दे?
समाधि
छोटी-छोटी बातों से ही हमारे सिद्धान्तों की परीक्षा होती है
चरित्र
यदि मनुष्य सीखना चाहे तो उसकी प्रत्येक भूल उसे कुछ न कुछ सिखा देती है।
ज्ञान
मन की एकाग्रता ही लक्ष्य प्राप्ति का मूल मंत्र है।
ध्यान
लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए लक्ष्य के प्रति एकाग्र होना आवश्यक है।
ध्यान
जो दूरदर्शी आदमी हर एक विपत्ति के लिए पहले से ही सचेत रहता है, वह उस वार से बचा रहेगा जो अतिभयंकर है।
विवेक