Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 2 · अध्याय 51

अभ्यास-रानी बछड़े के पास।

13 सूत्र

बूढ़े को घण्टी का सहारा-चौथी मञ्जिल पर बूढ़े पिताजी को रुका दिया एक घण्टी रख दी, छाती के ऊपर छप्पर पर एक रस्सी बाँध दी, उठना हो तो रस्सी का सहारा ले कर उठ जाना, खाने की इच्छा हो तो घण्टी बजा देना, चार साल का बच्चा घण्टी उठा लाया, तीन दिन तक किसी को ख्याल नहीं आया, चौथे दिन बूढ़े पिता की लाश मिली।
परिवार
लोभी और मात्सर्य- एक व्यक्ति पर देवी प्रसन्न हो गयी, प्रकट होकर बोली जो मांगना हो मांग लो, जो माँगोगे उससे दूना नहीं माँगने वाले पड़ोसी को मिलेगा, पहले अब कौन मांगे, जो माँगे वो घाटे में, ईर्ष्यालु बोला मेरी एक आँख फूट जाय, और मेरे आँगन में एक कुँआ खुद जाय, विना माँगने वाले की दोनों आँखें फूट गयी, दो कुआं खुद गये, बेचारा अन्धा कुए में गिर कर मर गया, दूसरों को दुःखी करने से हम दुःख उठाते हैं।
संतोष
जिसके सिर पर माँ-बाप का हाथ, वह कभी नहीं होता अनाथ। सद्गुण होते उसके साथ, दुनिया में होता ऊँचा उसका माथ॥
परिवार
लोग भगवान् को भी दोष देने से नहीं मानते, एक व्यक्ति बोला मैं ईश्वर से परेशान हूँ, लता में बड़े कद्दू लगाए और पेड़ में छोटे आम लगाए, जब आम के पेड़ के नीचे सोया और नाक पर आम गिरा तब समझ में आया कि भगवान् ने ठीक किया है। लोग अज्ञानता वश किसी की भी समीक्षा करने लगते हैं।
विवेक
'अभ्यास', रानी बछड़े के पास- राज महल के छत पर बैठे राजा ने रानी से कहा कि अपन अपने बल का परीक्षण करें कि अपन दोनों में कौन बलवान है? दोनों तैयार हो गये, बल का कैसे पता लगायें, राजा ने कहा! वह गाय खड़ी है उसके छोटे से बछड़े को वहाँ से यहाँ तक लाया जाए, पहले रानी गयी और पहले खण्ड तक बछड़े को ले आयी, फिर राजा गया वह भी वहाँ तक ले आया, दोनों समान एक बल वाले हुये, अब रानी छः महीने तक उस बछड़े को रोज लाती रही, राजा ने उस दिन से कोई अभ्यास नहीं किया, छः माह बाद रानी बोली अपने बल की पुनः परीक्षा कर लें, उसी बछड़े को लाने की बात हुयी, रानी तो बछड़े को उठाकर तत्काल विना थके ऊपर ले आयी, राजा उस बछड़े को उठा ही नहीं सका, राजा को बडा खेद हुआ सोचने लगा मेरी शक्ति कैसे क्षीण हुयी, तब रानी ने कहा हे राजन्! खेद मत करो यह अभ्यास की शक्ति है।
पुरुषार्थ
समुद्र में पानी का बरसना व्यर्थ है, जिसका पेट भरा है उसको भोजन कराना व्यर्थ है, समर्थ को दान देना व्यर्थ है और दिन में दीपक जलाना भी व्यर्थ है।
विवेक
समूह में अकेले स्वादिष्ट भोजन नहीं करना चाहिए, अकेले अपना स्वार्थ सिद्ध नहीं करना चाहिए, रास्ते में अकेले नहीं चलना चाहिए, तथा सब सो रहे हों तब अकेले जागृत नहीं रहना चाहिए।
संगति
सभी सुखी हों, सभी निरोगी हों, सभी कल्याण को प्राप्त हों, कोई दुःखी न हो।
धर्म
बालक से सरलता, जवान से जोश, बूढ़े से उदासी लेने योग्य हैं।
ज्ञान
पाश्चात्य संस्कृति- ए से एप्पल अर्थात् खाने से शुरू होती है, जेड से जेबरा (गधा) बनाकर समाप्त होती है, भारतीय संस्कृति अ से अरहन्त से शुरू होती है, ह से हरि अर्थात् भगवान् के नाम पूर्वक पूर्ण होती है।
चरित्र
यूज एंड थ्रो का ज़माना है, लोग वस्तु को प्रयोग करके फेंकते हैं, लेकिन लोगों ने यह नियम माँ-बाप के साथ भी बना लिया है, अपना स्वार्थ सिद्ध करके बृद्धाश्रम में छोड़ देते हैं।
परिवार
नौ माह माँ ने गर्भ में रखा, लेकिन वह बेटा माँ को फ्लेट में भी नहीं रख पाता है।
परिवार
प्रत्येक समय संवेदनशील बने, अपने प्रति सहनशील बने, प्राणी मात्र पर स्नेहशील बने।
अहिंसा