Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 2 · अध्याय 27

समय कम अरमान ज्यादा।

17 सूत्र

जो सीखा उसका अभ्यास अवश्य करें, अभ्यास ही मनुष्य को परिपूर्ण बनाता है।
पुरुषार्थ
मनुष्य उद्यम से ही सफल होता है, धन एवं विद्या का स्थान तो गौण है।
पुरुषार्थ
नम्रता वह जादुई पिटारा है जिसके खुलते ही चित्त में चाहत व लोकप्रियता बढ़ने लगती है।
विनम्रता
जीवन में कभी भूल करना नहीं और किसी से सम्बन्ध जोड़ना नहीं, सौ सगे सौ दुःख, हाथ जोड़ो पीछा छोड़ो।
अनासक्ति
क्रोध अदृश्य ज्वाला है जो भीतर ही भीतर सुलगता है जो अपने अद्वितीय व्यक्तित्व को राख कर देता है।
क्षमा
जो भी पढ़े पूरे मनोयोग से, धीरे-धीरे मनन पूर्वक प्रत्येक शब्द को आत्मसात करते हुये पढ़ें।
ज्ञान
वाञ्छित विषय में गहन रुचि रखें, जो भी पढ़े उसकी मानसिक समीक्षा अवश्य करें।
ज्ञान
टहलना वह व्यायाम है जिसके बाद अन्य व्यायाम की जरूरत नहीं होती है, इससे स्थूलता पर नियन्त्रण, सौन्दर्य प्रसाधन आदि लाखों रोगों में लाभ मिलता है।
स्वास्थ्य
मानव मनु की नहीं मन की सन्तान है, मन बर्फ की तरह न हो पानी की तरह हो, जिससे मन किसी भी पात्र में समा जाये।
मन
मन को मोड़ना- मन को मनाकर दिशा बदल दो, समस्या को समाधान के रूप में देखो, समस्या के पहाड़ को रास्ता बदल कर पार करो, संसार में ऐसा कोई कल्पवृक्ष नहीं जो आपकी इच्छा पूरी कर दे, अतः मन को तोड़ने की अपेक्षा इच्छायें खत्म करें।
मन
सात सौ खरब बोल्ट की पावर आपके पास है, सकारात्मक सोचेंगे तो उस रूप में काम आएगी, नकारात्मक सोचेंगे तो पल भर में सारा खून पानी बन जायेगा।
मन
नकारात्मक विचारों का प्रवेश बन्द करें।
मन
लम्बी यात्रा का शुभारम्भ एक कदम से शुरू होता है।
पुरुषार्थ
छोटी-मोटी गलतियों पर अप्रसन्न न हों।
क्षमा
कभी किसी के वाद-विवाद में न उलझें।
वाणी
साहस में लक्ष्मी का वास होता है।
समृद्धि
अधिक लालच कष्टों को आमन्त्रित करता है।
संतोष