Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 1 · अध्याय 63

सोच बदलो, सितारे बदल जाएंगे

71 सूत्र · पृष्ठ 1 / 2

शिक्षा सबसे अच्छी मित्र है, एक शिक्षित व्यक्ति हर जगह सम्मान पाता है, शिक्षा सौन्दर्य और यौवन को भी परास्त कर देती है।
ज्ञान
सोच बदलो सितारे बदल जायेंगे, नजर बदलो नजारे बदल जायेंगे। किश्तियाँ बदलने से क्या होता है दोस्तों, दिशा बदलो, किनारे बदल जायेंगे ॥
मन
मन पर क्या हावी है? कार्य करने का दृढ़ निश्चय या विफलता का भय?
मन
किसी व्यक्ति के जीवन की ऊँचाई मापने के तीन पैमाने हैं, हृदय की मधुरता, उदारता और विनम्रता।
चरित्र
विभीषण रावण के राज्य में रहता था फिर भी नहीं बिगड़ा और कैकयी राम के राज्य में रहती थी फिर भी नहीं सुधरी, तात्पर्य सुधरना एवं बिगड़ना केवल मनुष्य के सोच और स्वभाव पर निर्भर है सिर्फ माहौल पर नहीं है।
चरित्र
सिक्के हमेशा आवाज करते हैं, पर नोट हमेशा शान्त रहते हैं इसलिए जब आपकी कीमत बढ़े तो शान्त रहिए, आपकी हैसियत का शोर मचाने का जिम्मा आपसे कम हैसियत वालों का है।
विनम्रता
जब तक आप रुकते नहीं हैं तब-तक सफलता आपके पीछे चलती है, वह ये मायने नहीं रखती कि आप कितनी धीमी गति से आगे बढ़ रहें हैं।
पुरुषार्थ
कल का दिन किसने देखा है, आज का दिन भी खोये क्यों, जिन घड़ियों में हँस सकते हैं, उन घड़ियों में रोये क्यों?
समय
ज्ञानवान ही विनयवान और विवेकवान होता है।
ज्ञान
हम किताबी ज्ञान अर्जित करते हैं लेकिन वास्तविक परिस्थितियों से दूर रहते हैं, प्रेक्टीकल शिक्षा नहीं दी जाती है, जीवन भर काम आने वाले आवश्यक विषयों को स्कूल या कॉलेज में कभी नहीं पढ़ाया जाता है।
ज्ञान
हमारे विचारों में क्रांति लाने वाले विषयों और लेखकों को शिक्षा प्रणाली में शामिल नहीं किया जाता है।
ज्ञान
सफलता और अमीरी का निर्णय अगर अंकों के आधार पर होता तो बिल गेट्स सबसे अमीर और तेंदुलकर सबसे सफल खिलाड़ी न होते।
समृद्धि
किसी गरीब को सिर्फ दौलत देकर अमीर नहीं बना सकते उसे जीवन जीने की कला सिखानी होगी। घर देखकर लोग क्या कहेंगे यह न सोचें?
धन
आपका घर बहुत बड़ा हो आवश्यक नहीं, लेकिन उस घर में आपके जरूरत की प्रत्येक चीज उपलब्ध हो और हर चीज सही जगह पर रखी हो यह आवश्यक है और सर्व सुविधा युक्त जगह में हो जो शान्ति सुकून दे सके।
परिवार
कर्ज इंसान की सोच पर पर्दा डाल देता है और जब तक पर्दा हट पाता है, बहुत देर हो चुकी होती है। क्रोध मूर्खों की छाती में ही बसता है।
विवेक
सभी महान् विचारकों का प्रारम्भ में उपहास बाद में पूजा होती है।
विविध
अपनी सोच को ले जाओ शिखर तक कि उसके आगे सारे सितारे झुक जायें। न बनाओ अपने सफर को किसी किश्ती का मोहताज चलो इस शान से कि तूफान भी झुक जाये।
मन
हमारे जीवन में किसी भी बात की शुरूआत हमारे विचारों से होती है।
मन
आज दुनिया की ९६ प्रतिशत दौलत सिर्फ १ प्रतिशत लोगों के पास है, इसका मूल फर्क है उन १ प्रतिशत लोगों की सोच का।
मन
लोगों को समझाने में समय नष्ट न करें लोग वही सुनेंगे जो वे सुनना चाहते हैं।
वाणी
मेरे पास वक्त नहीं उन लोगों से नफरत करने का जो मुझे पसंद नहीं करते क्योंकि मैं व्यस्त हूँ उन लोगों से प्यार करने में जो मुझे पसंद करते हैं।
संगति
हम किसी की सराहना करने की अपेक्षा उसकी खामियाँ ढूँढ़ने में ज्यादा समय और ऊर्जा खर्च करते हैं।
विविध
मंजिल तो मिल ही जायेगी, भटकने से ही सही। गुमराह तो वे लोग हैं जो घरों से निकलते ही नहीं ॥
पुरुषार्थ
जिन्होंने भय को जीवन में आने नहीं दिया और स्वप्रेरणा को प्रबल रखा उन सबने इतिहास रचा जैसे अब्दुल कलाम, सचिन, नरेन्द्र मोदी, गाँधी आदि।
पुरुषार्थ
यदि तुम भला करते हो तो अपने स्वभाव की वजह से तो फिर अहंकार क्यों?
विनम्रता
शादियों में उपहार देना मानों खाने का मूल्य अदा करना है।
विविध
परिवर्तन, बदलाव समयानुसार आवश्यक है, इसके लिए कुछ साहसिक निर्णय आवश्यक है।
पुरुषार्थ
जिस अच्छे काम का शुरू में विरोध होगा, उसकी समय पर सराहना होगी।
पुरुषार्थ
ईश्वर से प्रार्थना का उद्देश्य माँगना होता है, अभी जो कुछ मिला है उसके लिए धन्यवाद देंगे तो शायद बिना माँगे ज्यादा पा सकेंगे।
भक्ति
जिंदगी की भाग दौड़ में हम बनावटी जीवन जीने में व्यस्त हैं हम स्वाभाविक जीवन जीना भूल गये हैं।
विविध
अधिकतर सरकारी अफसर कार्य प्रणाली को उलझन भरा बनाना चाहते हैं ताकि रिश्वत के लिए रास्ता निकले।
विविध
एक छोटी सी अच्छाई भी आत्मा को ऊर्जा से भर देती है।
चरित्र
हम जीवन भर में यह तय नहीं कर पाते कि हमारी जरूरत कितनी है कितना हमारे सुखी जीवन के लिए पर्याप्त है।
संतोष
मनुष्य कितना मूर्ख है। प्रार्थना करते समय समझता है कि भगवान् सब कुछ सुन रहा है, पर निंदा करते समय यह भूल जाता है। पुण्य करते समय यह समझता है कि भगवान् देख रहा है, पर पाप के समय यह भूल जाता है। दान करते समय समझता है कि भगवान् सब में बसता है, पर चोर चोरी करते समय ये भूल जाता है। प्रेम करते समय यह समझता है कि पूरी दुनिया भगवान् ने बनाई है, पर नफरत करते हुए ये भूल जाता है और हम कहते हैं कि मनुष्य सबसे बुद्धिमान प्राणी है।
भक्ति
द्वन्द, दुःख संताप, विभाव, विपदा आदि सभी अनिष्ट बातें संयोग में है, अकेले रहने से तो उन सब अनिष्टों का सर्वथा अभाव हो जाता है, परन्तु मोही जीव संयोग को इष्ट मानता है।
अनासक्ति
कषाय नहीं होने देना बड़ी तपस्या है।
संयम
संयोग आत्महित का नियत साधक नहीं है क्योंकि कर्म के संयोग से संसार के दुःख मिलते हैं, शरीर के संयोग से भूख-प्यास आदि के दुःख मिलते हैं, परिवार के संयोग से चिन्ता परिश्रम के दुःख मिलते हैं। संयोग सुख की चीज नहीं है, बल्कि क्लेशों का पिता है।
अनासक्ति
पशुओं का चाम तो मरने पर भी काम आता है, तेरे चाम का क्या होगा? अरे! जब तक आरोग्य है तब तक दीन दुःखियों की सेवा और महापुरुषों की वैय्यावृत्ति कर ले। तेरा शान्ति पथ प्रशस्त होगा। आगामी काल की चिंता सम्यक्त्व का अतिचार है। अतः क्या होगा? यह भय मत करो और न अतिभविष्य के प्रोग्राम बनाओ, वर्तमान परिणमन पर ध्यान दो। त्याग तृप्ति का और पर सम्पर्क असंतोष का कारण है।
पुरुषार्थ
कोई मुझे सम्पदा ऐश्वर्य का स्वामी समझे तो मुझे इससे क्या है? विपक्ष मलीन समझे तो मुझे क्या? मैं तो जैसा होऊँगा, वैसा ही फल पाऊँगा। किसी के जानने समझने आदि से क्या होता है?
कर्म
केवल उन्हीं का कार्य धन्य है, जो अहंकार-ममकार से दूर हैं बाकी सब समय बिता रहे हैं।
अनासक्ति
जहाँ अपवाद का बादल छा रहा हो, वहाँ घबराना मूर्खता है, वह वातावरण तो तुम्हारा उपकारक है धीर बनाने वाला है, अपने आत्म तत्त्व को देखो और प्रसन्न रहो।
संयम
रागादि की हीनता से ही कल्याण है।
अनासक्ति
मान लो तुम्हें दुनिया का कोई मनुष्य नहीं जानता, तुम अकेले एक जगह पड़े हो, कोई चर्चा करने वाला नहीं है तो ऐसी हालत क्या तुम्हें पसंद है? बुरी तो नहीं लगती? यदि विषाद नहीं है तो कल्याण के पात्र हो।
संयम
स्वयं करने योग्य कार्य को स्वयं न करने से तन-मन-धन तीनों की बर्बादी होती है।
पुरुषार्थ
सदा किसी के साथ रहने या किसी को साथ रखने का नियमबद्ध वचन नहीं देना क्योंकि परिणाम परिवर्तनशील होते हैं।
अनासक्ति
कार में पेट्रोल न हो तो बेकार, णमोकार के प्रति श्रद्धा न हो तो बेकार श्रद्धा होने पर भी कार धोका दे सकती है णमोकार नहीं।
णमोकार
संत और सूर्य अंधकार मिटाते रोशनी फैलाते, पानी हवा फूल की तरह होते हैं।
संगति
पैसा जेब में हो दिमाग में नहीं, दिमाग में पैसा रखोगे तो दिमाग होगा सातवें आसमान पर और तुम होंगे, सातवें नरक में और पैसा जेब में होगा तो दुनिया होगी तुम्हारी जेब में और तुम होंगे दुनिया की जेब में।
धन
परिवार व्यक्तियों के समूह से नहीं प्यार की अभिव्यक्तियों से बनता है, मीठा खाने को न मिले तब भी मीठा बोलें, जो मन में आये वह न बोलें अपितु जो औरों को भाये वह बोलें, मनचाहा बोलोगे तो अनचाहा सुनना पड़ेगा।
वाणी
जब तक मनुष्य या पशु की आँख में आँसू है तब तक अहिंसा और सत्य का सिद्धान्त अधूरा है। श्रावक की बंधी मुट्ठी लाख की साधु की खुली मुट्ठी आशीर्वाद की।
अहिंसा
जैसे पेट में छना हुआ जल डालते हैं वैसे मन में भी छने विचार डालें क्योंकि तन, मन नगरपालिका के कचरे का घर नहीं है प्रतिफल का विचार अवश्य करें। एक भी कड़वा फल नहीं आये तो मीठे फल की पहचान नहीं होगी।
मन
भगवान् महावीर ने जीने के साथ मरना भी सिखाया है बच्चा जन्म लेता है तो कई बातों में संदेह रहता है पर मृत्यु में कोई संदेह नहीं होता है।
समाधि
टकराव में बिखराव होगा, खम्भे की तरह सिर बचाकर निकल जाइये।
क्षमा
दर्जी को कपड़ा, नाई को सिर, ड्राइवर को जीवन सौंपते उससे ज्यादा श्रद्धा धर्म के प्रति होना चाहिए।
धर्म
श्रीफल में तीन आँखें होती हैं, तीसरी आँख प्राप्त करने श्रीफल चढ़ाते, दोनों आँखें बंद करते तब तीसरी आँख (केवलज्ञान) प्राप्त होती है।
ध्यान
गरीबी का शान्ति मय जीवन श्रेष्ठ है लेकिन धनाढ्य की अशान्ति ठीक नहीं मानी जाती है।
संतोष
जो भोगी होता है उसी की दृष्टि में परिस्थिति सुखदायी और दुःखदायी होती है, योगी की दृष्टि में परिस्थिति दो तरह की नहीं होती है।
अनासक्ति
रास्ते पर कंकड़ ही कंकड़ हो तो भी एक अच्छा जूता पहनकर उस पर चला जा सकता है लेकिन यदि एक अच्छे जूते के अन्दर एक भी कंकड़ हो तो एक अच्छी सड़क पर भी कुछ कदम चलना मुश्किल होता है अर्थात् बाहर की चुनौतियों से नहीं हम अपनी अन्दर की कमजोरियों से हारते हैं।
विवेक
चक्रवर्ती के दशाङ्ग भोग—१. चौदह रत्न, २. नौ निधि, ३. सुन्दर स्त्रियाँ ४. नगर, ५ आसन, ६. शय्या, ७. सेना, ८. भोजन, ९. पात्र, १०. नाट्यशाला।
विविध
मन शान्त रखने के दस सूत्र—१. किसी के काम में तब तक दखल न दें जब तक की आपसे पूछा न जाये। २. उतना ही काम हाथ में लें जितना पूरा करने की क्षमता हो। ३. किसी भी काम को टाले नहीं और ऐसा कोई काम न करें, जिससे बाद में आपको पछताना पड़े। ४. दिमाग को खाली न रहने दें। ५. जो कभी बदल नहीं सकता उसे सहना सीखें। ६. स्वयं को माहौल में ढालने की चेष्टा करें। ७. जलन की भावना से बचें। ८. पहचान पाने की लालसा न रखें। ९. माफ करना और कुछ बातों को भूलना सीखें। १०. प्रतिदिन ध्यान करना सीखें।
मन