Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 2 · अध्याय 91

आपने दोनों हाथ पकड़ लिए।

9 सूत्र

सीता जी को लङ्का से लाने के लिए पुल बाँधने की आवश्यकता पड़ी, हनुमान जी पत्थर पर राम का नाम लिखकर पानी में डालते थे, तो पत्थर पानी में नहीं डूबता था, रामचन्द्रजी ने पानी में पत्थर डाला तो डूब गया, तब रामचन्द्र जी ने हनुमान जी से पूँछा आप पानी में पत्थर डालते हैं तो डूबता नहीं इसमें क्या रहस्य है? तो हनुमान जी बोले भगवान्! जो आपके हाँथ से छूट जाएगा वह डूबने से कैसे बच सकता है, इसी प्रकार जिसके हृदय में सच्चे देव-शास्त्र-गुरु के प्रति श्रद्धा नहीं है वह संसार समुद्र में डूबने से कैसे बच सकता है?
भक्ति
कुम्हार का दर्शन- एक व्यक्ति को मुनिराज ने देवदर्शन का नियम दिया तो वह कहने लगा की हमारे घर से मन्दिर दूर है, तो मुनिराज ने कहा तुम्हारे घर के सामने कौन रहता है? व्यक्ति बोला! 'कुम्हार', तो मुनिराज ने कहा प्रतिदिन उसी के दर्शन कर लिया करो, तो व्यक्ति तैयार हो गया और प्रतिदिन कुम्हार के दर्शन करने लगा, एक दिन कुम्हार सुबह-सुबह मिट्टी लेने दूर खान पर चला गया, तो व्यक्ति ढूँढ़ते हुए खान पर गया, कुम्हार मिट्टी खोद रहा था तो उसे स्वर्ण मोहरों से भरा एक घड़ा मिला, व्यक्ति दर्शन करके लौट रहा था, तो कुम्हार ने उसे देख लिया और सोचा कि लगता है इसने ये खजाने का घड़ा देख लिया है और ये अगर राजा के पास जाकर बोल देगा तो खजाना भी जाएगा और मैं भी जेल जाऊँगा, तो उस व्यक्ति को बुलाकर कहा कि देखो आधा तुम ले लो और आधा मैं ले लेता हूँ, व्यक्ति सोचता है कि इस कुम्हार के नियम पूर्वक दर्शन से इतना लाभ हुआ है तो भगवान् के दर्शन करने से पता नहीं कितना लाभ होगा और उसने प्रतिदिन देवदर्शन का नियम ले लिया।
भक्ति
एक राजा की असमय में मृत्यु हो गई, उसका बच्चा छोटा था उसे ही राजा बना दिया, पड़ोसी राजा ने मौके का लाभ उठाना चाहा, पर बच्चे के मंत्रियों ने कहा राजन्! राज्य तो राजा सम्भालेंगे, जब तक वे छोटे हैं तब तक हम सहयोग करेंगे, मन्त्री की बात सुनकर राजा ने कहा यदि हमारे प्रश्नों का बच्चा उत्तर दे देगा तो हम राज्य नहीं लेगें, सबको चिन्ता हुई, माँ ने बच्चे को रात भर समझाया बेटा राजा ऐसा पूँछे तो ऐसा उत्तर देना, प्रात: काल जब जाने लगा तो बच्चे ने कहा माँ! यदि राजा ने इन प्रश्नों में से कोई भी प्रश्न नहीं पूँछा तो क्या मैं अपनी कल्पना से भी उत्तर दे सकता हूँ? माँ ने कहा! हाँ बेटा पर लाज रखना, बच्चा राजा के सामने उपस्थित हुआ, राजा ने उसके दोनों हाँथ पकड़ लिये और कहा आप पराधीन हो अपनी रक्षा कैसे करोगे? तब बच्चे ने उत्तर दिया, राजन् विवाह के समय जब लड़का कन्या का एक हाँथ पकड़ता है तो पूरे जीवन रक्षा करनी पड़ती है, आपने तो मेरे दोनों हाथ पकड़ लिये हैं, अब हम निश्चिन्त हैं, राजा ने प्रसन्न होकर छाती से लगा लिया, राज गद्दी दे दी, इसी प्रकार जो भगवान के दोनों चरण की शरण ले लेता है उसे किसी प्रकार की चिन्ता नहीं रहती है।
भक्ति
यदि हम दया के विना चलते हैं तो वह मोक्ष मार्ग नहीं मोह मार्ग है।
अहिंसा
मन्दिर जाने के लिये घड़ी देखकर शीघ्र आरम्भ का त्याग करना मोह की मन्दता है एवं मन्दिर में घड़ी देखकर पूजा बन्द करना मोह की तीव्रता है।
भक्ति
भगवान की पूजा और पत्नि से प्यार में नौकर नहीं रखा जाता है।
भक्ति
तलवार का नाम लेने से जीभ नहीं कटेगी पर परमात्मा का नाम लेने से कर्म जरूर कटेंगे पर आज मन्दिरों में भक्त कम और भिखारी ज्यादा आते हैं।
भक्ति
सच्चा धर्मात्मा वह नहीं जो भगवान को दो-दो थाली द्रव्य चढ़ाता है, किन्तु सच्चा धर्मात्मा तो वह है जो भोजन करने बैठता है और उसे पता चले कि पड़ोसी भूखा है, तो अपनी आधी थाली उसके घर दे आता है।
दान
विसर्जन की कथा- गणेश जी के भक्त, नाव में बैठकर, नदी पार कर रहे थे, तूफान को आया देखकर सभी डर रहे थे, अचानक नाव में पानी भरने लगा, तो हर भक्त गणेशजी का स्मरण करने लगा, गणेशजी नाव पर दौड़े-दौड़े आये, कुछ नृत्य के दृश्य दिखलाये, नाव थर्राने लगी, भक्त की जान मुंह में आने लगी, भक्त बोला, भगवान हम मर रहे हैं, ऐसे समय में आप ये क्या कर रहे हैं? गणेशजी बोले प्रिय भक्तों, जिस तरह तुम मुझे विसर्जन करने के लिये ले जाते हो, तब तुम जिस तरह नाचते गाते खुशियाँ मनाते हो, मैं भी बस उसी क्रम को दोहरा रहा हूँ, और नाच गा कर तुम्हे डुबा रहा हूँ।
भक्ति