Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 1 · अध्याय 68

दुश्मनी मिटाने का फार्मूला

14 सूत्र

'सोचो साथ क्या जायेगा' सभी असफलताओं और बीमारियों का कारण नकारात्मक सोच है।
मन
सुन्दर वस्तु का होना भी सुन्दर शत्रु को जन्म देना है, नारायण प्रति नारायण का झगड़ा प्रारम्भ सुन्दर वस्तु से ही होता है।
अनासक्ति
पढ़ते रहने से दिमाग को नॉलेज बढ़ाने के लिए सामग्री मिलती है, लेकिन जो पढ़ा है उसके बारे में सोचने से ही जानकारियों को अपनाया जा सकता है।
ज्ञान
जीवन में संकटों को सहन कर लेना, पर किसी को कठोर शब्द मत कहना क्योंकि आपके द्वारा कहा हुआ कठोर शब्द संकटों का पहाड़ खड़ा कर सकता है।
वाणी
अपने शत्रु की बातों पर सदैव ध्यान दीजिए क्योंकि आपकी कमजोरियों को उनसे अधिक कोई नहीं जानता है।
विवेक
दुश्मनों के बीच दाँतों के बीच जीभवत् रहिये।
विवेक
शत्रु कौन होता है? आप जो चाहते है वो मिलता रहे तब तो ठीक, आपने जो चाहा नहीं हुआ, जिससे चाहा नहीं किया, जैसा चाहा नहीं किया, बस वही शत्रु बन गया, शत्रु कोई वस्तु नहीं सिर्फ कल्पना है। 'शरीर की रक्षा करना पर अशरीरी होने के लिए'।
क्षमा
आप अपने घर ग्रन्थ जरूर रखना, यह मत सोचना की कोई पढ़ने वाला नहीं है क्योंकि हो सकता है आपके घर कोई ऐसा महापुरुष जन्म ले जो इस ग्रन्थ को पढ़कर निर्ग्रन्थ बन जाये और यदि संस्कृति पर उपसर्ग आया और जिनालय व जिनवाणी नष्ट हो गयी तो आपके घरों की जिनवाणी से जैन धर्म जयवंत हो सकेगा। क्योंकि पहले भी हमारे ग्रन्थों की छह माह तक होलियाँ जली हैं, जिनमंदिर व जिनबिम्ब तोड़े गये हैं।
ज्ञान
उस ग्रन्थ के पढ़ने से क्या प्रयोजन जो हृदय को कंपित न करें।
ज्ञान
जो शिक्षण कराने का सामर्थ्य रखता है उसे कभी सीखना नहीं छोड़ना चाहिए।
ज्ञान
श्रद्धाहीन का गुरु उद्धार नहीं कर सकते, जैसे श्रद्धाहीन मारीचि का परमगुरु आदिनाथ उद्धार नहीं कर पाये थे।
भक्ति
हमारी ओर से सबको दस उपहार सुख, शान्ति, समृद्धि, संस्कार, स्वास्थ्य, संकल्प, सरलता, सहजता, सफलता और संयम प्राप्त हों।
समृद्धि
जो मनुष्य नित्य ही पूजा करने के योग्य, अनेक जीवों के द्वारा अर्जित किए जाने वाले पुण्य के कारणभूत, अंगुष्ठ प्रमाण जिनेन्द्र प्रतिमा को बनाता है वह नित्य ही बहुत भारी पुण्य को प्राप्त होता है।
भक्ति
शास्त्रों में निरन्तर लगी हुई बुद्धि मुक्ति स्त्री को प्राप्त करने के लिए दूती के समान है अतः संसार से भयभीत भव्य जन शास्त्र में बुद्धि लगावें।
ज्ञान