Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 2 · अध्याय 203

प्राञ्जल कथानक-दूसरों को खाई अपने लिए कुंआ। मृदुमुनी। माया का फल। घुड़सवार। दो चेहरे। मयूर और कछुए की मैत्री।

21 सूत्र

व्रती मायाचारी मिथ्यात्व एवं निदान शल्य से रहित होता है।
चरित्र
नहीं लहे लक्ष्मी अधिक छल कर कर्म बन्ध विशेषता- मायाचारी से अधिक लक्ष्मी की प्राप्ति नहीं होती वल्कि कर्म बन्ध अधिक होता है।
चरित्र
सरल स्वभावी होय ताके घर बहु सम्पदा- जो सरल होता है उसके पास बहुत धन होता है।
चरित्र
दगा किसी का सगा नहीं, न मानो तो कर देखो। जिसने किया किसी के साथ, बिगड़ा उसका घर देखो।।
चरित्र
कपट छिपाये न छिपे, छिपे न मोटा भाग। दावी दूवी न रहे, रुई लपेटी आग।।
चरित्र
लाख छिपाओ छिप न सकेगा, राज ये कितना गहरा। दिल की बात बता देता है, असली नकली चेहरा।।
चरित्र
मुनाफा चौगुना लेकर दिया ऊपर से ताना है, इसीलिये दे दिया सस्ता कि तु ग्राहक पुराना है। इसी बीच में आकर, किसी ने कह दिया उनसे, सज्जन तुम झूठ मत बोलो, खुदा के पास जाना है।।
चरित्र
कौन कहता है हम किस्मत के लिए रोते हैं। अब तो रिश्ते भी जरूरत के लिये होते हैं।
चरित्र
चिन्तन कुछ फिर सम्भाषण कुछ। क्रिया कुछ की कुछ होती है।।
चरित्र
मन मलिन तन सुन्दर ऐसे। विष से भरा कनक घट जैसे।।
चरित्र
हमने जिसे सिखाया अङ्गुली पकड़-पकड़ के। वे आज चल रहे हैं तेवर बदल-बदल के।।
चरित्र
उसे सब दुष्ट कहते हैं प्रकट जो पाप करते हैं। अधम से भी अधम वे हैं जो पर्दों में बिगड़ते हैं।।
चरित्र
नमन-नमन में फेर है, अधिक नमे बेईमान। दगाबाज दूना नमे, चीता-चोर-कमान।
चरित्र
दूसरों को खाई, अपने लिए कुँआ- एक दयालु सेठ गरीबों को रोज भोजन देता था, लेकिन सेठानी इस पक्ष में नहीं थी, वह कहती थी, कि मैं भोजन बनाकर परेशान होती हूँ, ये बनाया हुआ भोजन बाँट देते हैं। एक दिन सेठजी व्यापार हेतु किसी गाँव गये और सेठानी से बोल गये कि गरीबों को भोजन दे देना। सेठानी ने अवसर पाकर विषाक्त भोजन बना दिया। उस दिन सिर्फ एक ही गरीब भोजन लेने आया, वह भोजन को अपने घर ले जा रहा था रास्ते में भूख से पीड़ित सेठजी मिल गये, उसने वह भोजन सेठ को दे दिया उसका सेवन करके सेठ की मृत्यु हो गयी मायाचारी का फल तुरन्त मिल गया।
चरित्र
जो व्यक्ति परीक्षा के विना किसी पर विश्वास करेगा वह आपत्तियों का घर बनेगा।
विवेक
मायाचार से मृदुमति मुनि त्रिलोकमण्डन हाथी बने- नगर के बाहर एक मुनिराज ने चार माह के उपवास किये और विना आहार किये विहार कर गये, उस स्थान पर अन्य मुनिराज आकर विराज मान हो गये, लोगों को मालूम नहीं था कि उपवास वाले ये ही मुनि हैं या नहीं, और मासोपवासी जानकर पूजा की, मुनिराज ने बताया नहीं की हम मासोपवासी नहीं है, इस माया के कारण वे मृदुमति मुनिराज मरकर पहले छठवें स्वर्ग में गये बाद में त्रिलोकमण्डन हाथी बने।
चरित्र
माया का फल स्वयं ने पाया- एक ठाकुर था वह एक व्यापारी से द्वेष करता था, एक दिन व्यापारी उस गाँव में अपनी वसूली करने के लिए गया, तो उस ठाकुर ने अपने एक नौकर को नियुक्त किया कि इस रास्ते से व्यापारी आये तो तुम उसको मार डालना, भाग्य की बात व्यापारी दूसरे रास्ते से अपने घर चला गया। बहुत देर तक जब नौकर नहीं आया तो ठाकुर ने अपने लड़के को भेजा। जैसे ही नौकर को लड़का आता दिखा उसने गोली मार दी, उसने समझा यही व्यापारी है। माया का फल स्वयं को भोगना पड़ा।
चरित्र
गड़रिया ने लोगों को ठगा, अन्त में प्राण गये- एक बालक भेड़ों को चराने नदी के उस पार ले जाता था और रोज चिल्लाता 'शेर आया-शेर आया' लोग उसको बचाने के लिए दौड़कर आते वह हँसने लगता, एक दिन वास्तव में शेर आ गया उसने चिल्लाया पर कोई उसे बचाने नहीं आया और शेर उसे खा गया।
चरित्र
विद्यार्थी ने छल किया- एक लड़के ने चोरी की, गुरूजी ने बच्चों को लकड़ी दी और कहा कि जिस बच्चे ने चोरी की है, उस की लकड़ी दो इञ्च बड़ी हो जाएगी। जिसने चोरी की थी उसने अपनी लकड़ी दो इञ्च तोड़ दी, और वह पकड़ा गया।
चरित्र
घुड़सवार से अपेक्षा- एक बुढ़िया ने जङ्गल में एक घुड़सवार से अपनी पोटली गाँव तक ले जाने को कहा उसने मना कर दिया। बाद में घुड़सवार के मन में आया की इसकी पोटली ले लेता हूँ और भाग जाता हूँ, ठीक यही विचार बुढ़िया के भी मन में आया कि अगर इसको पोटली दे देती और ये लेकर भाग गया होता तो? बाद में घुड़सवार पोटली लेने आया तो, बुढ़िया ने कहा जो तेरे दिमाग में आया वही मेरे दिमाग में आया।
चरित्र
दो चेहरे- एक ही चेहरा समय-समय पर पापी और धर्मात्मा का बनता है, महाराज जयसिंह ने एक बिल्ली पाल रखी थी, वह बिलकुल शान्त बन गयी, राजा के साथ नित्य रहती थी, राजा उसके माथे पर दीपक रखकर पुराण पढ़ते थे, राजा उसकी खूब प्रशंसा करते थे, बिल्ली की परीक्षा करने के लिए मन्त्री ने एक चूहा छोड़ा तो बिल्ली के कान खड़े हो गये, दूसरा छोड़ा तो बिल्ली के रोंगटे खड़े हो गये, तीसरा छोड़ा तो बिल्ली ने छपट्टा मारा, दीपक गिर गया, तैल फैल गया और पुराण गन्दा हो गया, इसी प्रकार दुनिया में एक व्यक्ति के दो चेहरे होते हैं।
चरित्र