Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 2 · अध्याय 383

सुरसुन्दरी-मदनसुन्दरी अध्ययन

1 सूत्र

साधुओं की सङ्गति ही वास्तविक सङ्गति है, वह हमेशा श्रेष्ठ सुखदायी होती है, भव्यों के लिए कल्पवृक्ष के समान परमानन्द देने वाली होती है।
संगति