Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 2 · अध्याय 405

तीन बन्दर। क्षमा। राष्ट्रपिता।

10 सूत्र

भारत को ब्रिटिश शासन से सन् 1947 में मुक्ति प्राप्त हुयी थी, भारत की स्वतन्त्रता के अङ्कुर 1857 में प्रकट हुये थे, नब्बे वर्ष तक स्वतन्त्रता के अङ्कुर की रक्षा नहीं हो सकी, इस पौधे को अपने रक्त से सींचकर बड़ा करने वाले बलिदानियों की लम्बी पङ्क्ति है, जैसे महारानी लक्ष्मीबाई, तात्याटोपे, टीपूसुल्तान, बालगङ्गाधर तिलक, लाला लाजपतराय, महात्मागाँधी, मोतीलाल नेहरू, नेताजी सुभाषचन्द्र बोस, भगतसिंह, चन्द्रशेखर आजाद, सुखदेव आदि अनेक क्रान्तिकारी नवयुवकों ने इस पौधे की रक्षा के लिए अपना बलिदान दिया है।
विविध
जो शहीद हुये हैं उनकी जरा याद करो कुर्बानी।
विविध
आज का दिन बड़ी कठिनाई से देखने को मिला था, दुर्भाग्य यह रहा कि हमारी खुशी आधी रह गयी, भारत को खण्डित स्वतन्त्रता प्राप्त हुयी थी, भारत के एक भू भाग को काटकर, पकिस्तान का निर्माण कर दिया गया था।
विविध
मुख, आँख, कान बन्द किये गाँधी जी के तीन बन्दर हमें शिक्षा देते हैं, बुरा मत बोलो, बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो और बुरा मत सोचो।
चरित्र
नदी पर बुढ़िया आधी धोती पहनकर धो रही थी, उसकी गरीबी देखकर गाँधी जी ने खादी और घुटने तक धोती पहनने का नियम लिया था।
चरित्र
विदेश जाने पर माँ के द्वारा दिये मांस, मदिरा, अण्डे को सेवन न करने के नियमों का पालन किया था।
आहार
क्षमा- एक अंग्रेज ने गाँधी जी के गाल पर चाँटा मारा तो गाँधीजी ने अपना दूसरा गाल आगे कर दिया, तो इसे देखकर वह पानी पानी हो गया था।
क्षमा
पिता- 1947 से आज तक पन्द्रह राष्ट्रपति बन गये हैं किन्तु राष्ट्रपिता एक ही हुआ है, राष्ट्रपति चुनाव से बनता है राष्ट्रपिता नहीं।
विविध
जलिया वाला बाग अमृतसर सभा में स्थित दो हजार लोगों को अंग्रेजों ने मौत के घाट उतार दिया था। दो हजार लाशों की रुधिर नदी के बीच, एक नारी अपने पति की दिया जलाये पूरी...
विविध
समवसरण में ग्यारह गणधर, चौदह हजार मुनि, छत्तीस हजार आर्यिका, एक लाख श्रावक, तीन लाख श्राविकायें थीं। महावीर का शुभ सन्देश जियो और जीने दो था।
अहिंसा