Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 1 · अध्याय 79

वाणी वीणा हो, बाण नहीं

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आप केवल इन तीन लोगों पर विश्वास करें–१.जो आपकी हँसी के पीछे का दर्द समझे। २. आपके गुस्से के पीछे का प्यार समझे। ३.आपके मौन होने का कारण समझे।
संगति
वस्तुतः जिनके भीतर आचरण की दृढ़ता रहती है, वे ही विचार में निर्भीक और स्पष्ट हुआ करते हैं।
चरित्र
नेतृत्व उस व्यक्ति को मिलता है जो खड़ा होकर अपने विचार व्यक्त कर सके।
चरित्र
दयार्द्र होकर दान करने से भी कहीं श्रेष्ठ है, प्रसन्न मुख के साथ मधुर वचन व्यक्त करना।
वाणी
सहानुभूति व्यथित हृदय से ही होती है।
विविध
सहानुभूति से हमारा आनंद बढ़ता है और कष्ट कम होते हैं।
विविध
जब आप दूसरों के दुःखों में सहानुभूति रखेंगे तो कल जब आपको उसकी आवश्यकता होगी, तब वे ही लोग आपको तहे दिल से सहयोग देंगे।
विविध
औदार्यमय दान से भी बढ़कर सौन्दर्य वाणी की मधुरता, दृष्टि की स्निग्धता और स्नेहार्द्रता में है।
वाणी
जो मनुष्य सब जीवों पर कृपा तथा दया दिखलाता है, उसे उन पाप परिणामों को नहीं भोगना पड़ता, जिन्हें देखकर ही आत्मा काँप उठती है।
अहिंसा
कहते हैं मिलनसारिता प्रायः उन लोगों में पायी जाती है, जो खुले हृदय से सब लोगों का स्वागत करते हैं।
विविध
कुलीन व्यक्ति स्वभाव की सरलता के कारण अपमानित होने पर भी कटु वचन नहीं बोलता है; मलय चन्दन के वृक्ष पर परशु का प्रहार किए जाने पर भी दुर्गन्ध नहीं निकलती है।
चरित्र
वाणी में भी अजीब शक्ति होती है कड़वा बोलने वाले की शहद भी नहीं बिकती मीठा बोलने वाले की मिर्ची भी बिक जाती है।
वाणी
वाणी में सुई भले ही रखो पर धागा डाल कर रखो, ताकि सुई केवल छेद ही न करें, आपस में माला की तरह जोड़कर भी रखे।
वाणी
विवेक हीन से बात करना अपने शब्दों को व्यर्थ फेंकना है।
वाणी
अक्सर लोग बोलने की फिक्र में सोचना भूल जाते हैं और दौड़ने की फिक्र में मंजिल भूल जाते हैं; ठीक इसी प्रकार कमाने की चिन्ता में यह भूल जाते हैं कि किसलिए और क्यों कमा रहे हैं?
वाणी
बुद्धि का फल तत्त्व विचार है, शरीर का सार व्रत धारण करना है, धन का सार पात्र दान है और वाणी का सार मनुष्यों में प्रीति उत्पन्न करना है।
वाणी
मधुर आवाज व मनमोहक मुस्कुराहट वाले व्यक्ति सबका दिल जीत लेते हैं।
वाणी
जब भी बोलें, धीमें और धैर्य से बोलें तो आपकी वाणी दूसरों के दिल में प्रेम और जिज्ञासा का झरना बहाएगी।
वाणी
यदि आप एक ही धर्म से सारे जगत् को अपने वश में करना चाहते हैं तो दूसरों की निंदा रूपी धान्य भरे खेतों में विचर रही अपनी वाणी रूपी गौ को रोक लीजिए।
वाणी
वचन पालन करने वाला कंजूस की तरह तौल-तौलकर अपने मुख से शब्द निकालता है।
वाणी
जो व्यक्ति वाणी से ईमानदार नहीं, वह सब कामों में बेईमान हो सकता है।
वाणी
वाणी वीणा का काम करे तब तक ठीक, लेकिन वाणी जैसे ही बाण का काम करने लगे कि विनाश समझना चाहिए।
वाणी
वचन जब तक नहीं निकला तब तक वह तुम्हारे वश में है निकलने पर तुम उसके वश में हो जाओगे अतः सोच कर बोलो।
वाणी
वक्तृत्व कला–स्कूल स्तर पर हर विद्यार्थी को एक कुशल वक्ता बनाना, उसका अच्छा अभ्यास करवाना ताकि वह जीवन के हर स्तर पर सफल हो सके।
वाणी
शब्द-शब्द सब कोई कहे शब्द के हाथ न पाँव। एक शब्द औषधि करे एक करे सौ घाव ॥
वाणी
हम बच्चों पर इतना बोझ डाल देते हैं कि उनकी सोचने की क्षमता क्षीण हो जाती हैं, अतः उन्हें पर्याप्त समय देकर उनकी प्रतिभा को उभारना और एक अच्छा विचारक बनाना ताकि वे भविष्य में समाज को नयी संरचनात्मकता दे सकें।
ज्ञान
आर्थिक शिक्षा–अमीर कैसे बनना? इसकी शिक्षा वह नहीं दे सकता जो खुद अमीर नहीं है और किसी ने पैसा कमा भी लिया हो तो उस पैसे को कैसे निवेश करना कि अमीरी बनी रहे।
धन
मौत के बाद दूसरा सबसे बड़ा भय होता है जनता के बीच बोलने का।
वाणी
आपकी वाणी में इतनी दम होना चाहिए कि जिसे सुनकर लोगों को जिनवाणी पर श्रद्धा हो जाये।
वाणी
इंसान तो हर घर में जन्म लेते हैं बस इन्सानियत कहीं-कहीं है।
चरित्र
अपनी वाणी पर नियंत्रण रखो कहीं यह आपका सौभाग्य ही नष्ट न कर दे।
वाणी
जिसका भाषण सुनकर श्रोता अमृत पान जैसा आनंद मानते हैं वह श्रेष्ठ वक्ता है।
वाणी
जिसके पास मीठी जुबान होती है उसे हीरे मोती पहनने की जरूरत नहीं होती है।
वाणी
अगर आपकी आँखें अच्छी हैं तो आप दुनिया को अच्छी देखेंगे अगर आपकी जुबाँ अच्छी तो आप दुनिया को अच्छे लगोगे।
वाणी
हर इंसान जुबान के पीछे छुपा है, अगर उसे समझना चाहते हो तो उसे बोलने दो।
वाणी
जो मन चाहा बोलता, उसे अनचाहा सुनना पड़ता है।
वाणी
आदमी जन्म के दो वर्ष बाद बोलना सीख जाता है पर 'क्या बोलना' यह सीखने के लिए पूरी जिन्दगी बीत जाती है।
वाणी
शालीनता से बात करने पर इज्जत मुफ्त में मिलती है।
वाणी
यदि आपके एक शब्द से भी किसी को कष्ट पहुँचता है तो आप अपनी सर्व भलाई नष्ट हुई समझो।
वाणी
लोकप्रियता के लिए वाणी माधुर्य, अनुपम जादू है, वाणी व्यक्ति को रुला भी देती है हँसा भी देती, रागी को वैरागी व वैरागी को रागी, वाणी कर्म बंध भी करा देती, कर्म बंध से मुक्ति भी करा देती है। 'साधक की वाणी मृदु, मधुर व गंभीर हो।'
वाणी
बीन सुनकर साँप खड़ा हो जाता ऐसे ही आप वाणी का प्रयोग करें कि 'सोता' व्यक्ति भी खुशी से जाग जाये।
वाणी
पानी मर्यादा तोड़े तो विनाश और वाणी मर्यादा तोड़े तो सर्वनाश होता है।
वाणी
प्रियवाणी बोलने वाले का कोई शत्रु नहीं होता है और कटु बोलने वाले का कोई मित्र नहीं होता है।
वाणी
कर क्रोध को पित्त के समान छोड़कर, लोभ को आँव के समान छोड़कर, भय को वात के समान भेद नष्ट कर, हास्य को कफ के समान नष्ट कर स्वस्थ हो मनुष्य को वाणी बोलना चाहिए।
वाणी
प्रभावी ढंग से बोलना सीखें।
वाणी
बहुत अधिक बोलने वाले पर बोला गया शब्द इतिहास बन जाता है।
वाणी
विचार चाहे पुराना हो और बहुत बार पेश किया जा चुका हो, लेकिन आखिरकार वह उसका है जो उसे बेहतरीन तरीके से पेश करे।
वाणी
बार-बार कहने से झूठ सच में नहीं बदल जाता है।
सत्य
एक झूठ को यदि सौ बार सत्य बना करके बोला जाये तो वह झूठ भी सत्य सा महसूस होने लगता है।
सत्य
असत्य हमेशा सत्य की बैसाखियों पर चलकर आता है।
सत्य
असत्य तभी बोलिए जब सच खतरे में पड़ा हो।
सत्य
असत्य विजयी भी हो जाये तो भी उसकी विजय अल्पकालिक होती है।
सत्य
झूठ बोलकर भविष्य की किसी विशेष अर्थ हानि को बचाया जा सके अथवा महान् कार्य सिद्ध हो सके तो वह झूठ झूठ नहीं है।
सत्य
प्राणघात के अवसर पर यदि झूठ बोलकर किसी निरपराध व्यक्ति के प्राणों की रक्षा की
सत्य
वक्ता वह नहीं जो कि सुंदर बोलने वाला हो अपितु वह है जिसका अंतरंग आत्म विश्वास से ओत-प्रोत हो।
वाणी
गाली देकर सिर्फ अपमान ही किया जा सकता है मान की प्रतिष्ठा नहीं की जा सकती है।
वाणी
कठोर बात ही दुनिया में सबसे ज्यादा कमजोर होती है।
वाणी
गाली वापसी का टिकट लेकर ही आती है।
वाणी
जिस तरह भूसे को कूटना निरर्थक है उसी तरह विचार हीन व्यक्ति से युक्ति युक्त बात करना निरर्थक है।
वाणी
अशान्ति न करने वाला, प्रिय, हितकारी, यथार्थ सत्यभाषण और स्वाध्याय का अभ्यास– ये सब वाणी के तप कहे जाते हैं।
वाणी