Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 2 · अध्याय 273

वृक्ष की उदारता।

10 सूत्र

चोरी करे निहाई की, सुई का देवे दान। महलों पर चढ़ देखते, कितनी दूर विमान॥
चरित्र
बिन माँगे दे दूध बराबर, माँगे दे सो पानी। वह देना है खून बराबर, जिस में खींचा तानी॥
दान
धन की तीन गति होती हैं दान, भोग और नाश।
धन
सच्चा दान वही है, जिसमें छिपी नहीं है फल की चाह। सच्चा धर्म वही है जिसमें रहे निरन्तर एक प्रवाह॥
दान
तन से सेवा कीजिए, मन से भले विचार। धन से इस संसार में, कीजे पर उपकार॥
दान
भीम ने नगाड़ा पीटा- एक याचक ने धर्मराज से कुछ याचना की, धर्मराज ने कल के लिये कहा भीम ने सुना भैया ने काल को जीत लिया,तो नगाड़ा पीट दिया, इसलिये अच्छे कार्य आज ही करना चाहिये।
समय
आदिनाथ जी ने विद्यादान नारी को दिया, जिससे कि ये सन्तान को शिक्षित कर सके, औरबेटों को तलवार सिखाई और छःखण्ड का अधिपति बनाया।
ज्ञान
पण्डित दौलतराम जी गरीब थे, छहढाला की रचना कर रहे थे, तभी बेटी ने आकर भोजन मांगा, तब उनके मुख से निकलता है, 'आतम को हित है सुख सो सुख आकुलता बिन कहिये, आकुलता शिव माहीं न तातें शिव मग लाग्यो चहिये' आत्मार्थी को हर परिस्थिति में मोक्ष मार्ग ही दिखाई देता है।
धर्म
वर्णी जी का श्रोता- गणेशप्रसाद वर्णी जी के प्रवचन सुनने एक साहुजी आते थे, एक दिन वह देर से आये, लोगों ने बहुत कहा महाराज प्रवचन करो, वर्णी जी ने कहा श्रोता आ जाय, जब साहुजी आये तब वर्णीजी ने प्रवचन शुरू किया, वर्णीजी ने पूँछा 'भैया आज लेट काय हो गये' उनने कहा आज पत्नि से झगड़ा हो गया, कारण? कि आज रात में चोर आये थे, उन्होंने चारों कोने छाने पर कुछ नहीं मिला, हम करवट से लेटे थे, उन्होंने हमारी घड़ी, अङ्गूठी उतार ली, करवट बदला कि ये सोने का कड़ा भी उतार ले लेकिन वे विना कड़ा उतारे भाग गये, पत्नि ने कहा तुमने करवट काय बदली बेचारे विना कड़ा लिये भाग गये,ये है निरीह वृति।
अनासक्ति
वृक्ष की उदारता- धरती ने वृक्ष से कहा मैं तुम्हें रस प्रदान करती हूँ, तुम यूँ ही बर्बाद कर देते हो, किसी को दिया मत करो, अपने पास रखो, वृक्ष बोला नहीं माँ मैं देता हूँ तभी फलता हूँ, देने...
दान