Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 2 · अध्याय 200

वेरिस्टर चित्तरञ्जन दास।

10 सूत्र

सत्य बोलता है, ताकि लोग सत्यवादी समझ कर सम्मान करें। तुम्हारे लिए वस्तु लाये हैं, ऐसा कहकर बेचना, चाहे वह वस्तु उसके काम में आये या नहीं।
सत्य
दुर्बलता बताते हुए प्रायश्चित्त लेना किसी दोष का प्रायश्चित्त पूँछ लेना और चुप चाप ले लेना। प्रकट दोषों का प्रायश्चित्त लेना, प्रतिष्ठा के लोभ में निर्दोष होकर भी प्रायश्चित्त लेना।
चरित्र
नमक का त्याग हलुआ पुड़ी के लोभ से करना, अन्न का त्याग फल मेवा के लोभ से करना।
चरित्र
महाराज को आहार देना है, तो छः वर्ष के बेटे को आठ वर्ष का बताते हैं, ट्रेन में सफ़र करना हो तो आठ वर्ष के बच्चे को चार वर्ष का बताते हैं।
चरित्र
तुम आदमी की नहीं गधे की बात मानते हों- एक दिन पड़ोसी गधा माँगने आया तो बोल दिया गधा जङ्गल चरने गया है, इतने में अन्दर से रेंकने की आबाज आई, पड़ोसी ने कहा कि गधा अन्दर है! तो बोलता है तुम आदमी का नहीं गधे का विश्वास करते हो।
चरित्र
गुमची- कुछ लोग गुमची की तरह होते हैं देखने में सुन्दर लेकिन दूसरी ओर काले होते हैं।
चरित्र
बाण सीधा है पर घाव करता है, तमूरा टेड़ा है पर मिष्टवादी है, अतः मनुष्य को आकृति से नहीं, उसके कामों से उसे महत्त्व देना चाहिए।
चरित्र
एक ठगिया- एक परिवार को प्रेत की बाधा थी, एक ठगिया ने प्रेत को भगाने के बहाने एक टङ्की बुलवायी उसमें घर का सारा सोना, चाँदी, रूपया आदि भरकर ले गया, उस समय परिवार के लोगों को बाहर निकाल दिया था, परिवार दो दिन बाद घर में आया देखा तो सब कुछ लुट गया था।
चरित्र
बैरिस्टर चितरञ्जनदास मुखर्जी ट्रेन से यात्रा कर रहे थे, पूरा कम्पार्टमेंट खाली था, वे पेपर पढ़ रहे थे, वहाँ एक युवती आई और बोली मैं यहाँ बैठ जाँऊ? बैरिस्टरजी ने मौन स्वीकृति दे दी, थोड़ी देर अपनी विपत्ति बताई और गाड़ी ने जैसे ही स्पीड पकड़ी तो बोली हमें हजार रुपये दे दो नहीं तो मैं चिल्ला दूंगी कि एकान्त में ये मेरे साथ बदतमीजी कर रहे थे। बैरिस्टरजी ने इशारा किया न मैं बोल सकता हूँ और न ही सुन सकता हूँ। एक कागज में लिखकर दो उसने वही बात लिख दी। बैरिस्टरजी ने अच्छे ढंग से पढ़ा और जेब में रख लिया और गाल पर एक चाँटा मारा और कहा अब चिल्लाओ कितना चिल्लाती हो। वह चुप रह गयी और अपनी ही चाल में फँस गयी, उन्होंने उसे गिरफ्तार करवा दिया।
चरित्र
मुझे बड़ी शान्ति मिलेगी- एक व्यक्ति बहुत कुटिल था, वह जब मरने लगा तब अपने बेटों से बोला कि मैं जब मर जाऊँ तो मेरे हाथ पैर काटकर पड़ोसी के यहाँ फेक देना मुझे बड़ी शान्ति मिलेगी।
चरित्र