Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 2 · अध्याय 146

माँ एक रानी अनेक।

13 सूत्र

जन्म लेने मात्र से मातृभूमि का ऋण चढ़ जाता है, तब नौ माह गर्भ में रखने वाली माँ का ऋण कितना होगा?
परिवार
लोक में माँ के समान कोई हितकारी नहीं है जो माँ को ठुकराते हैं वे जीवन में उन्नति नहीं कर पाते हैं।
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समस्त रिश्तों में माँ का रिश्ता नौ माह बड़ा होता है।
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एक माँ का दिल है जो दुनिया में मुफ्त में दुआ देता है, पत्नि तलाक दे सकती है पर माँ नहीं।
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हमारा रिश्ता माँ से प्रारम्भ होता है- जैसे आसमाँ, धरती माँ, जिनवाणी माँ, गौ माँ और भारत माँ।
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माँ की पूजा होती है, क्योंकि माँ और परमात्मा के शरीर में दूध रहता है, पृथ्वी माँ से दूध की नदियाँ बहती हैं, गौ माँ मीठा दूध देती है।
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आज का बेटा माँ के साथ ऐसा व्यवहार करता है जैसे फटा पुराना सामान कोने में डाल देते हैं।
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भगवान् बनने के बाद भी माँ को याद करते हैं, वामादेवी, त्रिशलानन्दल, कौशल्यानन्दन, मरूदेवी के लाल।
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माँ ने तुम्हे मात्र दूध से नहीं पाला गर्भ में नौ माह खून से पाला है, तभी तो कहते हैं 'हमारा खून है'।
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कुत्ता तोता को पालता-पालने वाले को नहीं पालता- आज की औलाद कुत्ते, तोते आदि जानवरों को तो पालती है पर पालने वाले माँ-बाप को नहीं पालती है, एक माँ-बाप कह रहे थे काश हम कुत्ता होते तो बेटे-बहु के हाथ का खाना तो मिलता।
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माँ की महिमा वरणी न जाय- विवेकानन्द जी से किसी ने पूछा आप अपनी माँ के गीत क्यों गाते रहते हो, उन्होंने अपनी पगड़ी उतारी और कहा, उस पत्थर को पगड़ी में बाँध कर नौ घण्टे पेट में बाँधो और घूम कर आओ, वह घबरा गया, मैं तो नौ मिनट भी नहीं बाँध सकता, तब उसे माँ की महिमा समझ में आई।
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माँ-बाप सन्तान को बुढ़ापे की लाठी समझते हैं पर वही लाठी माँ-बाप का सिर फोड़ देती है।
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माँ एक रानी अनेक- माँ बाप के इतने उपकार होते हैं कि सात जनम तक स्वयं के शरीर की चमड़ी के जूते बनाकर पहनाओ तो भी नहीं चुकेंगे। रानी छयानवें हजार हो सकती हैं पर माँ एक ही होती है।
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