एक राजा जङ्गल में सैर करने गया, अचानक आँधी तूफ़ान आने से सभी सैनिक-साथी बिछुड़ गये, छाया पाने की इच्छा से राजा एक महात्मा की झोपड़ी में गया, महात्मा लेटा हुआ था, राजा को देखकर बैठ गया, सोचा बैठने से दो लोग बन जायेंगे, इतने में पानी में भीगता हुआ एक गधा भी आ गया, महात्मा बोले राजन्! हम लोग खड़े हो जाते हैं, जिससे ये गधा भी झोपड़ी के अन्दर आ जायगा, राजा ने कहा! क्या करते हो गधे को भी झोपड़ी के अन्दर? महात्मा ने कहा राजन्! ये साधु की झोपड़ी है यहाँ गधों से भी मनुष्यों जैसा व्यवहार किया जाता है, ये रईसों की कोठी नहीं है जहाँ मनुष्यों से भी गधों जैसा व्यवहार किया जाता है। विनम्रता 0 – भेजें
पण्डित पन्नालाल जी सागर वालों का बेटा बीमार हो गया, इन्दौर ले गये, भोजन अपने हाथ से बनाते थे, तो माचिस खरीदने बाजार गये, कहीं माचिस नहीं मिली, पण्डित जी ने पूँछा, तो दुकानदारों ने कारण बताया, कि हमारे यहाँ एक गरीब है, उससे माचिस बिकवाते हैं, ताकि वह भी सम्पन्न हो जाय, यदि हम लोग रुपये देते तो उसको हीनता महसूस होती। दान 0 – भेजें
जनता पार्टी के नेता श्री के-के- हेगड़े की पत्नि ने आचार्य विद्यानन्द जी को बतलाया था कि सौ वर्ष पहले की बात है, कि जैन परिवार में एक व्यक्ति ने शिकार कर दिया था तो समाज ने उसे जाति से बन्द कर दिया था, प्रभावशाली परिवार होने से दस हजार अन्य लोग भी वैष्णव बन गये थे, जिस दिन वे लोग जैन से वैष्णव बने थे, उस दिन वे लोग प्रति वर्ष जैन मन्दिर में पूजा पाठ करते हैं एवं सात्विक भोजन करते हैं, अतः एक व्यक्ति के पाप के पीछे अनेकों को वीतराग धर्म से वञ्चित नहीं करना चाहिए, प्रायश्चित्त प्रतिक्रमण से शुद्ध करना चाहिए। अहिंसा 0 – भेजें
कल्याण सागर जी महाराज गृहस्थ अवस्था में यात्रा के दौरान बीमार हो जाने पर एक व्यक्ति ने सहयोग किया था बदले में पैसे न लेकर कहा आप भी परोपकार करना उसका प्रभाव यह हुआ कि उन्होंने मुनि दीक्षा लेकर भी 'णमोकार द्वारा पर का कल्याण किया था। णमोकार 0 – भेजें