Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 2 · अध्याय 217

सोने का बैल।

4 सूत्र

लोभ पाप का बाप बखाना– एक विप्र बनारस से पढ़कर आया, पत्नि ने प्रश्न किया कि 'पाप का बाप कौन है'? उसने कहा सब कुछ पढ़ा, लेकिन ये पढ़ा ही नहीं, पत्नि ने कहा फिर से जाओ और पढ़कर आओ, रास्ते में वेश्या से पूँछा, उसने कहा मैं इसका उत्तर जानती हूँ मेरे घर चलो, उसने कहा पहले में आपका आतिथ्य करना चाहती हूँ आप भोजन कर लें, विप्र बोला मैं आपके यहाँ भोजन नहीं कर सकता, वेश्या ने कहा मैं आपको सौ रुपए दूँगी आप भोजन सामग्री ले लें, विप्र तैयार हो गया, तब उसने कहा मैं भोजन बना देती हूँ दो सौ रुपए ले लेना, विप्र तैयार हो गया, अन्त में उसने कहा एक ग्रास मेरे हाथ से खा लो पाँच सौ रूपए ले लेना मेरे जीवन के सारे पाप धुल जायेंगे, विप्र ने सोचा इसने बनाया तो है ही अब इसके हाथ से एक ग्रास खाने में क्या जाता है, यहाँ कोई देख भी नहीं रहा है, पैसों के लोभ से विप्र उसके हाँथ से भोजन करने के लिए तैयार हुआ तो वेश्या ने एक चाँटा मारा और कहा यही लोभ, पाप का बाप है।
धन
मृत्यु शय्या पर पड़े पिता को देखकर बेटे सोचते हैं, कब इनके प्राण निकलें और हम सारी सम्पत्ति बटोर लें, और पिता सोचता है कि जब तक मैं जिन्दा हूँ तब तक कोई मेरी सम्पत्ति को छू नहीं सकता, दोनों तरफ लोभ है।
धन
धूर्त ने कञ्जूस को ठगा– धूर्त ने कञ्जूस सेठ से कहा कि हमारे यहाँ मेहमान आये हैं, बर्तन दे दो, सेठ ने बर्तन दे दिये, धूर्त बर्तन वापस करने आया तो दस के स्थान पर बीस बर्तन ले आया, सेठ ने पूँछा ये कहाँ से आये, उसने कहा ये सब बर्तन गर्भवान थे हमारे यहाँ जाकर इन ने बच्चे दे दिये, सेठ प्रसन्न हुआ और सभी बर्तन रख लिये कुछ समय बाद सोने–चाँदी के बर्तन लेने आया सेठ ने दे दिये, अब कुछ दिन बाद सिर मुड़ाकर आया और बोला सारे बर्तन मर गये, हमने उनका संस्कार किया एक हजार रूपये खर्च हुये। सेठ ने कहा बर्तन मरते हैं क्या? उसने कहा जब बर्तन बच्चे देते हैं तो मरते भी हैं। धूर्त ने सभी सोने–चाँदी के वर्तन भी रख लिए और पञ्चायत बैठाकर एक हजार रूपये भी ले गया।
धन
सोने का बैल चाहिये– एक व्यक्ति के पास समस्त जानवरों के सोने की जोड़ी थी, पर सोने का बैल केवल एक ही था, अतः ठण्ड की परवाह न करता हुआ नदी में लकड़ी पकड़ रहा था, ताकि लकड़ी बेंचकर सोने का बैल बनवा सके, रानी ने महल से देखा इतना गरीब भी हमारे राज्य में है, राजा ने उसे बुलाया और पूँछा क्या चाहते हो, उसने कहा एक बैल, राजा ने कहा जाओ हमारे बैलों में से जो बैल पसन्द हो वह ले लो, वह गया पर कोई भी बैल पसन्द नहीं आया, उसको सोने का बैल चाहिये था, ये है तीव्र लोभ।
धन