हर्र, बहेरा आँवला, घी शक्कर से खाय। स्वास्थ्य सदैव बना रहे, अतुलित शक्ति प्रदाय।। स्वास्थ्य 0 – भेजें
काली मिर्च जो पीसकर घी शक्कर से खाय। नेत्र दोष वाके मिटे, गिद्ध दृष्टि हो जाय।। (ग्यारह नग काली मिर्च, पाँच ग्राम गाय का घी, दस ग्राम बूरा) स्वास्थ्य 0 – भेजें
मीठा, खट्टा, नमकीन, ''वातनाशक'' रस हैं। मीठा, कषायला, कड़वा, ''पित्तनाशक'' रस है। कड़वा, कषायला, चरपरा ''कफनाशक'' रस है। स्वास्थ्य 0 – भेजें
प्रतिदिन एक या दो नींबू का रस पानी में मिलाकर अन्त में पीने से खायी हुयी वस्तु सड़ती नहीं है। स्वास्थ्य 0 – भेजें
कान खींचने से दिमाग खुलता है, पहले लोग बड़े-बड़े कुण्डल पहनते थे कि कान खिंचते रहें। स्वास्थ्य 0 – भेजें
प्राकृतिक चिकित्सा को अपनाएं- जल चिकित्सा, योग, व्रत, मिट्टी, मालिश, एक्युप्रेशर, सूर्यचिकित्सा, सात्विक भोजन, शान्ति दायक सफ़ेद आदि रङ्गों का प्रयोग करें, आपातकाल में एलोपेथिक का प्रयोग कर सकते हैं। उचित रङ्गों का चुनाव- नीला रङ्ग शीतलता, हरा रङ्ग सन्तुलन, सफ़ेद रङ्ग शुद्धता व आध्यात्मिकता, लाल व पीला रङ्ग सुस्त मन पर प्रेरक प्रभाव, उत्साह व शक्ति भरते हैं, काला रङ्ग घृणा द्वेष को दर्शाता है और मस्तिष्क को सुस्त, मन्द तथा निष्क्रिय बनाता है। हँसिये और हँसाइये- स्वयं प्रसन्न रहें एवं अपने सानिध्य में रहने वालों को प्रसन्न रखें। स्वास्थ्य 0 – भेजें
सूर्योदय से पूर्व का समय ही सर्वाधिक उपयोगी होता है, जब आप प्राणवायु से भरपूर लाभ प्राप्त करते हैं। श्वाँस एवं हृदय रोगों से भी मुक्ति मिलती है। प्राणायाम प्राचीन तकनीक है, इससे ऋषियों ने सैकड़ो वर्षों की उम्र पायी थी और अपने मस्तिष्क को बुद्धिमत्ता का अक्षय कोष बनाया था। प्राणायाम वह उत्तम विधि है, जिससे आप एक पन्थ दो काज नहीं तीन काज वाली उक्ति चरितार्थ करते हैं। एक तो हृदय एवं फैफड़ों का व्यायाम जो हृदय और श्वाँस सम्बन्धी रोगों को व्यक्ति के पास फटकने भी नहीं देता है, दूसरे मस्तिष्क को ऋणायन से भरपूर प्राणवायु रूपी पर्याप्त भोजन मिलता है, तीसरा प्राणायाम से आप अद्भुत शान्ति का अनुभव के साथ मानसिक तनाव से मुक्ति प्राप्त करते हैं। स्वास्थ्य 0 – भेजें
आधा अन्न, दुगनी सब्जी, तिगुना पानी, चार गुनी हँसी से सदा स्वस्थता और प्रसन्नता रहती है। स्वास्थ्य 0 – भेजें
पूर्व, आग्नेय, दक्षिण, नैऋत्य, पश्चिम, वायव्य, उत्तर, ईशान, धरती, आसमान ये दस दिशाएं हैं। विविध 0 – भेजें
पूर्व में सिर रख कर सोने से विद्या की प्राप्ति होती है, दक्षिण में सिर रख कर सोने से बल और आयु की प्राप्ति होती है, पश्चिम में सिर रख कर सोने से चिन्ता बढ़ती है, और उत्तर में सिर रख कर सोने से धन और जीवन की हानि होती है। स्वास्थ्य 0 – भेजें
चार पहर-शाम छः बजे से नौ बजे तक रौद्र पहर, नौ बजे से बारह बजे तक राक्षस पहर, बारह बजे से तीन बजे तक गन्धर्व पहर, तीन बजे से छः बजे तक मनोहर पहर कहलाता है। समय 0 – भेजें
रोगी पूरब सिर जो सोए, तन मन का सुख चैन संजोए। शयन करो ले बाँयी करवट, उठो सदैव दाँहिनी करवट।। पश्चिम मुख मज्जन कर आना, पूर्व मुखी हो सदा नहाना। पढ़ने उत्तर मुख हो जाना, भोजन दक्षिण मुख न पकाना।। पूर्व मुखी होकर जो खाता, लम्बे जीवन का सुख पाता। दक्षिण मुख होकर जो खाता, भारी नाम बढ़ाई पाता।। श्वेत वस्त्र उत्तर मुख धारो, पूर्वोत्तर मुख जाप सम्हारो। उत्तर दक्षिण मुख निहारा, दिशा बोध यह सीखो सारा।। स्वास्थ्य 0 – भेजें
कार्तिक सुदी अष्टमी से अगहन वदी अष्टमी तक, सोलह दिनों को प्राणघातक माना जाता है, इन दिनों में रोग हो गया तो व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती है। स्वास्थ्य 0 – भेजें