Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 1 · अध्याय 15

चेहरा नहीं, चारित्र उज्ज्वल हो

222 सूत्र · पृष्ठ 1 / 4

कम खाने से शरीर स्वस्थ होता है, गम खाने से आत्मा स्वस्थ होती है और नम जाने से व्यवहार स्वस्थ होता है।
स्वास्थ्य
आज का मनुष्य धर्म के लिए लड़ेगा, मरेगा, लिखेगा पर धर्म के लिए जियेगा नहीं।
धर्म
किसी के बुरा भला कहे जाने पर भी अपनी सहजता, सरलता को संतुलित रखिए क्योंकि यही महानता की निशानी है।
विनम्रता
विपद काल में धैर्य, ऐश्वर्य में क्षमा, सभा में वचन चातुर्य, संग्राम में पराक्रम, सुयश में अभिरुचि और शास्त्रों के अध्ययन का व्यसन ये महापुरुषों के स्वभाव में होते हैं।
चरित्र
आत्मसम्मान, आत्मज्ञान, आत्मसंयम ये तीनों ही जीवन को परम शक्ति की ओर ले जाते हैं।
संयम
निश्चित समय पर चलने वाली गाड़ी के लिए भी जब पहले से सावधानी रहती है तो फिर मौतरूपी गाड़ी का कोई समय निश्चित नहीं है, उसके लिए तो हरदम सावधानी रहनी ही चाहिए।
समाधि
आप उस पाप से बचिए जिसके कारण आप अनजाने भय से घिरे रहते हैं।
कर्म
पाप का मूल 'आलस' है और पुण्य का मूल समीचीन 'पुरुषार्थ' है।
पुरुषार्थ
चरित्र एक ऐसा हीरा है जो अन्य सभी अवगुण रूपी पाषाणों को नष्ट कर देता है।
चरित्र
आदमी की पहचान उसके चेहरे से नहीं चरित्र से होती है।
चरित्र
चरित्र की शुद्धि ही सारे ज्ञान का ध्येय होना चाहिए।
चरित्र
गुण एकान्त में भली-भाँति विकसित होते हैं, जबकि चरित्र का निर्माण संसार के भीषण कोलाहल में ही होता है।
चरित्र
चरित्र वृक्ष है तो प्रतिष्ठा उसकी छाया है।
चरित्र
चरित्र की सम्पत्ति दुनिया की तमाम दौलतों से बढ़कर है।
चरित्र
चरित्र के बिना ज्ञान बुराई की ताकत बन जाता है।
चरित्र
अगर आप अपने चरित्र का ध्यान रखेंगे तो आपकी प्रतिष्ठा आपका ध्यान स्वयं रख लेगी।
चरित्र
चरित्र प्रतिभा से श्रेष्ठ है क्योंकि चरित्र मनुष्य के जीवन का शासक है।
चरित्र
जिस तरह माली घास-फूस निकालकर पेड़-पौधों का जीवन बचाता है, उसी तरह हमें भी अपना चरित्र बचाने के लिए अपनी कमियों को दूर करना चाहिए।
चरित्र
आप प्रत्येक व्यक्ति का चरित्र बता सकते हैं, यदि आप गंभीरता से देखें कि वह प्रशंसा से कितना प्रभावित होता है।
चरित्र
ईमानदारी कोई मुखौटा नहीं है जिसे चाहे जब पहनें या उतार दें, यह तो चरित्र का अविभाज्य अंग है।
सत्य
चरित्र दो वस्तुओं से बनता है, आपकी विचारधारा से और आपके समय बिताने के ढंग से।
चरित्र
उज्ज्वल भविष्य के लिए देखकर पाँव रखें, छानकर पानी पिएँ, सच बोलें और पवित्र आचरण करें।
चरित्र
चरित्र का निश्चित परिचय वाणी के अलावा और कुछ नहीं है।
चरित्र
उत्तम व्यक्ति शब्दों में सुस्त और चरित्र में चुस्त होता है।
चरित्र
सुखमय जीवन का तीन चौथाई आधार नेक चाल-चलन है।
चरित्र
सादगी मनुष्य का अमूल्य पहनावा है।
संतोष
हजारों वर्षों का यश एक बार के दुराचरण से नष्ट हो जाता है जिन भेष में जिन चर्या होना चाहिए निज चर्या नहीं।
चरित्र
सिनेमा या टी.वी. देखने से चार हानियाँ होती हैं— १. चरित्र की हानि, २. समय की हानि, ३. नेत्र-ज्योति की हानि और ४. धन की हानि।
चरित्र
जिस प्रकार समुद्र की लहरें कचरे को बाहर फेंक देती हैं उसी प्रकार सज्जन पुरुष भी मानसिक विकार रूपी कचरे को तुरंत सम्यक् चिन्तन से बाहर फेंक देते हैं।
मन
चेहरे से ज्यादा चारित्र को मूल्य दीजिए क्योंकि चेहरा तो सिर्फ चार दिन सुहाता है पर सुंदर चरित्र तो पूरे जीवन को प्रभावित करता है।
चरित्र
जिस तरह बिल्लौरी पत्थर पास वाली चीज का रंग धारण करता है उसी तरह चेहरा भी दिल की बात को प्रकट करने लगता है।
चरित्र
मकान यहाँ बना रहे हो, सजावट यहाँ कर रहे हो, संग्रह यहाँ कर रहे हो, पर खुद मौत की तरफ भागे चले जा रहे हो। जहाँ जाना है पहले उस परलोक की तैयारी तो करो।
समाधि
कोई मनुष्य जब लिख रहा हो तो बिना उसकी आज्ञा के उसे पढ़ने की कोशिश मत करो।
चरित्र
शुभ कार्य को जल्दी और अशुभ कार्य को देरी से करने वाला सुख पाता है।
कर्म
आज को इस प्रकार जिएँ कि वह कल के लिए यादगार बन जाए।
समय
मानव जीवन समय काटने को नहीं पाप काटने को मिला है।
समय
जो दूसरों के लिए जीवन जीता है, उसका जीवन साधु जैसा होता है।
दान
संसार में जो अच्छा आचरण करते हुए जीवनयापन करता है वह दीर्घजीवी होता है। नेक बनने में सारी उम्र लग जाती है, बदनाम होने में तो एक दिन भी नहीं लगता है।
चरित्र
दर्पण को नहीं अपने दिल को साफ कीजिये। चेहरे को नहीं चरित्र को ठीक कीजिए।
चरित्र
दीक्षा लेते समय के परिणामों का हमेशा चिन्तन करते रहने से संयम और वैराग्य सुदृढ़ रहता है।
संयम
दुर्गुणों को दूर करो, दुःख दूर हो जाएगा।
चरित्र
हे मानव! दुःखी मत हो, यदि तकदीर बदलनी है तो अपनी तरकीब बदलो खुशहाली आपके चारों ओर बरसेगी।
पुरुषार्थ
दुनिया में राय देने वाले बहुत हैं पर सन्मार्ग पर चलाने वाले बहुत कम हैं, सलाहकार बहुत हैं पर सहयोगकार बहुत कम है, आदर्श की बातें करने वाले बहुत हैं पर आचरण करने वाले बहुत कम हैं।
चरित्र
चरित्रवान् अपने दोषों को सुनना पसंद करते हैं दूसरी श्रेणी के लोग नहीं।
विनम्रता
धर्म के नाम पर शर्म करने वालों को सुख की प्राप्ति नहीं होती है।
धर्म
मनुष्य जब एक नियम तोड़ता है तब दूसरा अपने आप ही टूट जाता है इसलिए प्राण जाने पर भी प्रण (नियम) को नहीं त्यागना चाहिए।
संयम
छोटे-छोटे संकल्प ही आत्मशक्ति को बढ़ाते हैं।
संयम
क्रोध, हर्ष, गर्व, लज्जा, उद्दण्डता तथा अपने को पूज्य समझना; ये भाव जिसको पुरुषार्थ से भ्रष्ट नहीं करते वही पण्डित कहलाता है।
संयम
जो पहले निश्चित करके फिर कार्य का आरम्भ करता है, कार्य के बीच में नहीं रुकता, समय को व्यर्थ नहीं जाने देता और चित्त को वश में रखता है वही पण्डित (ज्ञानी) कहलाता है।
पुरुषार्थ
जो बहुत धन, विद्या तथा ऐश्वर्य को पाकर इठला कर नहीं चलता वह पण्डित (ज्ञानी) कहलाता है।
विनम्रता
जिसका जन्म गुरु सेवा में, मन समीचीन ध्यान की चिन्ता में और धन का उपयोग सत्पात्र दान में जाता है वह पंडित है।
ज्ञान
संयम व विवेक से रहने वाले पाप से बचते हैं।
संयम
सन्त के चरण छूने से पुण्य गुण व आचरण में लाने से परमात्मा मिलता है।
भक्ति
जो काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद तथा मात्सर्य इन छह शत्रुओं को वश में कर लेता है, वह जितेन्द्रिय पुरुष पापों से लिप्त नहीं होता और अनर्थों में नहीं पड़ता है।
संयम
जिन वस्तुओं के बिना भी हम रह सकते हैं, फिर उनके हम गुलाम क्यों बनें?
अनासक्ति
जहाँ सजावट है, वहाँ मिलावट है, जहाँ मिलावट है वहाँ बनावट है, जहाँ बनावट है वहाँ दिखावट है और जहाँ दिखावट है वहाँ गिरावट है।
चरित्र
किसी को अपनी प्रशंसा करने के लिए विवश कर देने का केवल एक ही उपाय है कि आप 'सत्कर्म' करें।
चरित्र
मेहनत के बिना दौलत, अंतरात्मा के बिना आनंद, चारित्र के बिना ज्ञान, त्याग के बिना धर्म, सिद्धान्तों के बिना राजनीति, नैतिक मूल्यों के बिना व्यापार और इंसानियत के बिना विज्ञान व्यर्थ है, पाप है।
चरित्र
कलम चलाने से नहीं कदम बढ़ाने से मंजिल मिलती है, अतः कलम पर नहीं कदम पर भरोसा रखो।
पुरुषार्थ
दिन में वही कार्य करें जिससे रात में सुख से सो सकें। आठ माह में वह कार्य कर लें जिससे बरसात के चार माह धर्मध्यान से व्यतीत कर सकें। जवानी में तपस्या-साधना, दान-पुण्य कर लें जिससे वृद्धावस्था में प्रसन्न रह सकें। जीवन को सदाचार से जियें जिससे मरण समय में हँसते हुए विदा हो सकें। पूरे जीवन ऐसा काम करें जिससे भविष्य उज्ज्वल हो जाये।
चरित्र