Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 2 · अध्याय 389

श्रीपाल जी की साधु वंदना।

3 सूत्र

पुण्य से अत्यन्त दूर वस्तु भी पास आ जाती है, पाप से हाँथ की वस्तु भी नष्ट हो जाती है।
कर्म
जेठ तपै रवि आकरो, सूखे सरवर नीर। शैल शिखर मुनि तप तपै, दाझै नगन शरीर।। पावस रैन डरावनी, बरसै जलधर धार। तरुतल निवसै साहसी, चालै झंझा बयार।।
संयम
जो संसार के दुःखों से निकालकर उत्तम सुख में पहुँचा दे, उसे धर्म कहते हैं।
धर्म