Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 2 · अध्याय 127

गाय बछड़े के प्रेम ने शेर का।

2 सूत्र

दो मित्र विदेश से धन कमाकर लाये, रास्ते में रात हो गई, धन की रक्षा हेतु तीन-तीन घण्टे सोने का वादा किया, एक देव सर्प बनकर के आया, एक मित्र को काटने लगा तो दूसरे ने विरोध किया, तो सर्प ने कहा! तुम मित्र के गले का दो बूँद खून दो तो हम चले जायेगें, तलवार से गर्दन रेत कर खून निकाला तो मित्र की नींद खुल गई गर्दन पर तलवार चलते देखी लेकिन फिर सो गया, सर्प चला गया खून देने वाले मित्र को आकुलता हुई मित्र क्या सोचेगा, जब इसका नम्बर आया सोने का तो नींद नहीं आई कारण पूछा तो कहा! कि मैंने आपका खून निकाला था तब आपने क्या सोचा था? तब मित्र ने कहा कि मित्र गर्दन काट रहा है तो हमारा भला ही कर रहा होगा, मित्र पर ऐसा विश्वास वफादार होना चाहिए।
संगति
एक शाम बूढ़ी गाय धीरे-धीरे चलकर घर की ओर आ रही थी, इतने में एक शेर सामने आ गया और गाय से कहा मैं बहुत दिनों से भूखा हूँ अतः आज अपनी भूख शांत करूँगा, तब गाय ने शेर से कहा! मैं अपने बछड़े को दूध पिला आऊँ फिर तुम मुझे खा लेना, शेर हँसा और बोला! कि तुम मुझे धोखा देना चाह रही हो, गाय ने कहा मैं बछड़े की सौगन्ध खाकर कहती हूँ, दूध पिला कर अवश्य आ जाऊँगी, शेर ने बोला ठीक है, जैसे ही गाय घर पहुँची और बछड़े से दूध पीने को कहा, तो बछड़े ने देर से आने का कारण पूँछा, बताने पर उसने कहा, कि आपके स्थान पर मैं जाऊँगा, आग्रह करने पर भी उसने दूध नहीं पिया और दोनों शेर के पास चल दिए, एक के स्थान पर दो को आता देख शेर खुश हुआ, बछड़ा कहता है शेर पहले मुझे खायगा और माँ सींगों से उसे पीछे करके कहती है कि शेर पहले मुझे खायगा, गाय-बछड़े के प्रेम ने शेर का हृदय परिवर्तन कर दिया और उनका वात्सल्य देखकर दोनों को खाने का इरादा छोड़ दिया।
अहिंसा