Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 1 · अध्याय 66

हम बिना रोये, गम भुलाना जानते हैं

60 सूत्र

पात्रता के बिना न संसार में कोई रिश्ता है और न इसके बिना अध्यात्म क्षेत्र में कोई रास्ता है।
चरित्र
कभी उसको नजर अन्दाज ना करो, जो आपकी बहुत परवाह करता हो, वरना आपको किसी दिन एहसास होगा कि पत्थर जमा करते-करते आपने हीरे को गँवा दिया है।
परिवार
आपकी सोच देखो–बेटी ससुराल में खुश है तो आप खुश होते हैं और बहु ससुराल में खुश है तो आपको खराब लगता है, दामाद बेटी की मदद करें तो आपको अच्छा लगता है और बेटा बहु की मदद करें तो जोरू का गुलाम कहा जाता है, बेटी जींस पहने तो खुश होते हैं कि मॉडर्न फैमिली है और बहु जींस पहने तो उसे बेशर्म कहते हैं, बेटी के ससुराल में अकेले काम करना पड़े तो सास खराब है कि मेरी बेटी थक जायेगी और बहू सारा दिन अकेले काम करे फिर भी कामचोर है, बेटी की सास और ननद काम न करे तो गुस्सा आता है और सब अपने घर में बहू की मदद न करे तो सही लगता है, बेटी की ससुराल वाले ताना मारे तो अच्छा नहीं लगता, स्वयं बहू को ताना मारो तो सही लगता है, बेटी को रानी बनाकर रखने वाली ससुराल चाहिए और स्वयं को बहू काम वाली चाहिए, लोग यह क्यों भूल जाते है कि बहू भी किसी के घर की बेटी है, वो भी तो अपने माता-पिता भाई-बहन दोस्तों को छोड़कर आयी है आपके साथ नया जीवन शुरू कर रही है।
परिवार
क्षत्रिय को सम्मान से, ब्राह्मण को भोजन से, वैश्य को द्रव्य देकर और शूद्र को डाँट कर वश में किया जाता है।
विविध
जो काम वासना के वश में नहीं है, उसे कामिनी की कीमत नहीं होती है।
ब्रह्मचर्य
गुरु को विनय, प्रशंसा और सेवा से, प्रभु को भक्ति अथवा ध्यान से, लोभी को धन से, बच्चों को प्रेम से, बड़ों को विनय और सम्मान से, पत्नि को प्रशंसा से, पति को समर्पण से, माँ-बाप को सेवा से वश में किया जाता है।
परिवार
मित्र को निष्कपट व्यवहार से, शत्रु को नीति बल से, राजा को कार्य से, ठाकुर को आदर से, स्त्री को अत्यधिक प्रशंसा से, रसिक को रस से, सबको शील से वश करें।
चरित्र
जमीन, स्त्री, स्वर्ण, सम्पत्ति आदि के लोभ रूपी सर्प को ज्ञान वैराग्य रूपी औषधि और मंत्र से वश में किया जा सकता है।
अनासक्ति
अस्त्र-शस्त्र तो अंग में लगता है पर वचन सर्वांग में लगता है।
वाणी
दिमाग में विचारों का ट्राफिक जितना कम होगा, जिन्दगी का सफर उतना ही आसान होगा।
मन
एक पेड़ से लाखों माचिस की तीलियाँ बनती हैं, लेकिन एक तीली लाखों पेड़ों को जला देती है, इसी प्रकार एक नकारात्मक विचार या शक आपके लाखों सपनों को जला सकता है इसलिए सकारात्मक ही सोचें।
मन
विद्या माता की तरह रक्षा करती है, पिता के समान हित में नियुक्त करती है, स्त्री के समान हर्षित करती है, भाई का समस्त कार्य करती है, आजीविका चलाती है, अनुपम कीर्ति फैलाती है और लोक में प्रियता उत्पन्न करती है।
ज्ञान
प्यार और विश्वास कभी मत खोना क्योंकि प्यार हर किसी से नहीं होता और विश्वास हर किसी पे नहीं होता है।
परिवार
डरपोक स्वभाव वालों का, क्रोधी का, धूर्त का, आलसी का कृतघ्न का, दूतों का, नास्तिक का और पुरुषत्व के अभिमान का कभी विश्वास नहीं करना चाहिए।
विवेक
उनका विश्वास मत करो जिनकी भावनाएँ वक्त के साथ बदल जाएँ, विश्वास उनका करो, जिनकी भावनाएँ वैसी ही रहें, जब आपका वक्त बदल जाये तब भी।
चरित्र
आज की औरत आश्रय देने पर सिर चढ़ जाती है, आदर करने पर खुशामद समझती है, विश्वास करने पर हानि पहुँचाती है, प्यार करने पर आघात करती है, उपदेश देने पर मुड़कर बैठती है, उपकार करने पर अस्वीकार करती है और क्षमा करने पर दुर्बल समझती है।
विविध
यह सच है कि किस्मत और फ्नी भले ही परेशान करती है लेकिन जब साथ देती है तो जिन्दगी बदल देती है।
परिवार
वक्त और दौलत में इतना अन्तर है कि आपको पता होता है कि दौलत कितनी है पर यह पता नहीं होता है कि वक्त कितना बाकी है।
समय
जहाँ बात-बात पर सफाई देनी पढ़े वे रिश्ते कभी गहरे नहीं होते हैं।
परिवार
मत फेंक पत्थर पानी में उसे भी कोई पीता है, मत रहो यूँ उदास जिन्दगी में तुम्हें देखकर भी कोई जीता है।
विविध
एक दिन हम सब एक दूसरे को सिर्फ यही सोचकर खों देंगे कि वो हमें याद नहीं करते तब हम उन्हें याद क्यों करें।
परिवार
हम फूल तो नहीं पर महकना जानते हैं, बिना रोये गम भुलाना जानते हैं, लोग खुश रहते हैं हमसे क्योंकि हम बिना मिले ही रिश्ते निभाना जानते हैं।
विविध
जो जैसा है उसे वैसा ही अपना लो रिश्ते निभाना आसान हो जायेगा।
परिवार
गलत फहमियों के सिलसिले आज इतने हैं कि हर ईंट सोचती है दीवार मुझ पर टिकी है।
विविध
रिश्ते भी अब हो गये ज्यों दैनिक अखबार, आज पढ़ लिया प्रेम से कल फिर बेकार।
परिवार
हर रिश्ते की हकीकत दिखाकर खुदा बन्दे से पूछता है बता मेरे सिवा कौन है तेरा।
अनासक्ति
रिश्ते, आज रोटी की तरह हो गये जरा सी आँच तेज क्या हुई कि जल भुनकर खाक हो जाते हैं।
परिवार
जितना बड़ा लक्ष्य उतना बड़ा कष्ट मार्ग आपको चुनना है।
पुरुषार्थ
मांसाहार उनके लिए है जो लड़ेंगे और मरेंगे, शाकाहार उनके लिए है जो सुखमय जीवन जियेंगे एवं विचारशील बनेंगे। खून से कपड़ा व मन दोनों गंदे होते हैं। जरा विचार करो जब आपका अपना सगा सम्बन्धी समय पर घर नहीं आता, तो आप सिर पीट-पीट कर रोते हो, तो फिर दूसरे जीवों को मार कर उनका मांस कैसे खाते हो? क्योंकि कहीं पर उनके बच्चे अपने माँ-बाप का अथवा माँ-बाप अपने बच्चों का इन्तजार करते होंगे, अरे! जब आपको जरा सा काँटा चुभता है तो आप उसके दर्द में चीखते हो, तो फिर आपका हृदय दूसरे प्राणी के प्राण लेते समय क्यों नहीं चीखता है?
अहिंसा
वक्त कब क्या रंग दिखायें हम नहीं जानते वरना जिस 'राम' को राज्य मिलना था वनवास न मिलता।
समय
अनादर के अत्यधिक स्थानभूत पुरुषों के बालों की सफेदी को देखकर तरुण स्त्रियाँ शीघ्र ही दूर चली जाती हैं।
अनासक्ति
कामी-क्रोधी जल्दी बूढ़े होते हैं।
क्षमा
लोभी को धन से, अभिमानी को विनम्रता से, मूर्ख को मनोरथ पूरा करके और पंडित को सच बोलकर वश में किया जाता है।
विवेक
जो निज को वश में कर लेता है वो परवश नहीं होता है।
संयम
जो अपने को वश में कर लेता है दुनिया उसके वश में हो जाती है।
संयम
वर्तमान परिणति हमारे भूत और भविष्य को बता देती है।
समय
भूत को याद कर भविष्य को खराब मत करो सिर्फ वर्तमान में जियो।
समय
जैसे सुबह गाय को खिलाई गयी घास शाम को दूध में वृद्धि कर देती है, वैसे ही वर्तमान में किया गया पुण्य भविष्य में सुखों की वृद्धि कर देता है।
कर्म
जो मनुष्य प्रायश्चित्त, आयुर्वेद, ज्योतिष और धर्म निर्णय की बात शास्त्र के बिना कहता है, उसे ब्रह्म घाती कहते हैं।
ज्ञान
समझदार लोग पहले सामने वाले की बात सुनते हैं फिर अपना मौन खोलते हैं।
वाणी
आपके सामने चींटी भी पानी में गिर जाये तो आप अँजुली बनाकर निकालते हैं, फिर आप अपने को वासना के गड्ढे में क्यों गिराते हैं, आपकी दया कहाँ सो गयी है?
संयम
वासना का भूत साधक के दुर्भाग्य को करने वाला होता है।
ब्रह्मचर्य
विषयी जीव पहले प्राप्ति की आकांक्षा में दुःखी होता है फिर सेवन करने के बाद तृप्ति न होने से दुःखी फिर विषयों के अन्तरंग से छूट न पाने से दुःखी, फिर विषयों के सेवन के पाप के पश्चाताप में दुःखी होता है।
अनासक्ति
विषमता मानवता की खोज करा देती है।
चरित्र
जब एक के विरोध से भी मनुष्य विपत्ति को प्राप्त होता है तो बहुतों के साथ विरोध होने पर क्या कहना? देखो चींटियाँ बड़े बलशाली सर्प को खा जाती हैं। निर्बल लोगों का समुदाय भी शक्ति शाली होता है, जैसे सार हीन तृणों से बनाई गयी रस्सी से हाथी भी बाँधा जाता है।
संगति
मनुष्य की वास्तविक पूँजी धन नहीं विचार हैं।
मन
पवित्र विचार मानव जीवन की श्रेष्ठ शक्ति है।
मन
विचारों के युद्ध में पुस्तकें ही अस्त्र हैं।
ज्ञान
विचार का दीपक बुझ जाने पर आचार अंधा हो जाता है।
चरित्र
विचार में जो अनेकान्त है वही वाणी में स्याद्वाद है।
ज्ञान
आचरण रहित विचार कितने ही अच्छे क्यों न हो उन्हें खोटे मोती की तरह समझना चाहिए, अच्छे विचार समय, श्रम व धन की बचत करते हैं।
चरित्र
पत्थर से भी भारी होता है खोटा विचार जो हमें ले डूबता है।
मन
शुद्ध विचारों से शुद्ध और सत्य कार्य उत्पन्न होते हैं, सत्य कार्यों से शुद्ध जीवन प्राप्त होता है और शुद्ध जीवन से परमानन्द प्राप्त होता है।
मन
चाहे कोई बुरा करे या अच्छा पर आप किसी के प्रति बुरे विचार नहीं लाना यही आपकी अच्छाई है।
क्षमा
एक बार अशुभ विचार आने पर पूरा शरीर विषैला हो जाता है।
मन
जो योग्यता के अभाव में पद प्राप्त कर लेते हैं, वे धर्म और राज्य का विनाश करते हैं क्योंकि दूसरों की बात सुनकर मानता है, दूसरे के अनुसार चलता है उसका विनाश निश्चित है।
विवेक
जो विद्या आपको आलस, अनीति, असंयम की ओर धकेले उसे प्राप्त करने की अपेक्षा अशिक्षित रहना अच्छा है।
ज्ञान
विश्वास तर्क से ज्यादा अच्छा मार्गदर्शक है, तर्क तो बस कुछ ही दूर जा सकता है किन्तु विश्वास की कोई सीमा नहीं होती हैं।
भक्ति
खोई हुई चीजें तो अक्सर वहाँ मिल जाती हैं जहाँ वे खोई हों, पर विश्वास वहाँ कभी नहीं मिलता जहाँ खोया हो।
भक्ति
भरोसा खुद या खुदा पर हो तो ताकत बन जाता है, दूसरों पर या भाग्य पर हो तो कमजोरी बन जाता है।
भक्ति