Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 1 · अध्याय 26

मुस्कुराती शकल से आती अकल

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जो तटस्थ होता है वही सत्य को समझ सकता है और जो विकल्पों को दूर रख सकता है वह तटस्थ होता है।
सत्य
सत्यवादी को वचन सिद्धि हो जाती है।
सत्य
वह सत्य भी असत्य है जिससे धर्म और धर्मात्मा पर अँगुली उठती हो।
सत्य
ऐसा सत्य भी झूठ है, जिससे शान्ति भंग होती है।
सत्य
मनुष्य झूठ बोलकर जीवन की काफी सम्पदा खो देता है।
सत्य
झूठ बोलने पर कई बातें याद रखना पड़ती हैं किन्तु सच बोलने पर कुछ भी याद नहीं रखना पड़ता है।
सत्य
झूठ दुनिया भर में घूमता-फिरता है, सच मजबूती से कदम जमाए रहता है।
सत्य
झूठ से जो पाया जाता है, वह पाना नहीं खोना है और सत्य से जो खोया जाता है वह खोना नहीं पाना है।
सत्य
झूठ बोलना कायरता की निशानी है।
सत्य
झगड़े में सत्य हमेशा खो जाता है।
सत्य
मान-सम्मान, वैर-विरोध, लोभ-हास्य में असत्य भी सत्य जैसा दिखता है परन्तु होता नहीं है। सत्य उनके लिए कड़वा है, जो कामवासना और असत्य में जीते हैं।
सत्य
खुली आँख का सपना आँख बन्द होने पर और बन्द आँख का सपना आँख खुलने पर झूठा होता है।
सत्य
सच सुनने से न जाने क्यों कतराते हैं लोग, तारीफ चाहे झूठी हो सुनकर खूब मुस्कुराते हैं लोग।
सत्य
एक दिन की खुशी के लिए पिकनिक मनाइये, एक माह की खुशी के लिए शादी कर लीजिए और यदि जीवन भर के लिए खुशी चाहिए हो तो मस्त रहने की आदत बना लीजिए।
संतोष
सब रोगों की एक दवाई, हँसना सीखो मेरे भाई।
स्वास्थ्य
हँसते हुए लोगों की संगत इत्र की दुकान जैसी है, कुछ न खरीदो फिर भी रूह महका देती है।
संगति
सबको हँसाना पर किसी पर हंसना मत, सबके दुःख बाँटना पर किसी को दुःखी करना मत, सबकी राह में दीपक जलाना पर किसी से जलना मत।
चरित्र
मुस्कुराते हुए चेहरे से किया गया स्वागत और जलपान पूरे भोजन के बराबर होता है।
चरित्र
मुस्कुराहट वो हीरा है जिसे आप बिना खरीदे पहन सकते हैं और जब तक हीरा आपके पास है आपको सुन्दर दिखने के लिए किसी और चीज की आवश्यकता नहीं है।
चरित्र
जरा सी मुस्कान से फोटो अच्छी आ सकती है तो फिर हमेशा मुस्कुराने से जिन्दगी अच्छी क्यों नहीं बन सकती है?
चरित्र
दूध पीने वाला शिशु जैसी निर्दोष हँसी हँसता है, वैसी हँसी मस्ती बिखेरने वाली हँसी, कष्टों को विदा करने की अचूक दवा है।
स्वास्थ्य
प्रसन्न-मुख होना मोतियों के खजाने के दान से भी अच्छा है।
संतोष
प्रसन्नता पूर्वक उठाया गया बोझ हल्का प्रतीत होता है।
संतोष
खुश मिजाज और दिल के साफ आदमी का काम नहीं रुकता है।
समृद्धि
हम जो चाहते हैं यदि वह नहीं पा सके तो उसमें खुश रहें जो हमें मिला है।
संतोष
खुशी से बढ़कर पौष्टिक खुराक और कोई नहीं है।
स्वास्थ्य
किसी भी व्यक्ति को इतना निर्धन नहीं होना चाहिए कि वह दूसरों को मुस्कान रूपी उपहार भी न दे सके।
चरित्र
तीनों लोकों में ये मैत्री, दया, दान और प्रियवचन मनुष्य को सदैव प्रसन्न चित्त रखती हैं।
संतोष
जीवन पथ पर फूल नहीं बिखेर सकते तो कम से कम मुस्कान तो बिखेर सकते हो।
चरित्र
प्रसन्नता टेंशन मुक्ति की रामबाण औषधि है।
स्वास्थ्य
अपने पास प्रतिक्षण प्रसन्नता का गुलाब जल रखें।
संतोष
सदैव प्रसन्न रहो, इससे मस्तिष्क में अच्छे विचार आते हैं और चित्त शुभ कार्यों की ओर लगा रहता है।
संतोष
प्रसन्नचित्त व्यक्ति जहाँ कहीं भी जाता है, वहाँ अपना प्रभाव छोड़ आता है, वह सबको उत्साहित करने के साथ-साथ प्रेरणा देना, प्रसन्न रहना सिखाता है, ऐसा प्रसन्नचित्त व्यक्ति धूप की वह किरण है जिसका अत्यन्त सुखद प्रभाव खेतों और वनस्पतियों पर पड़ता है।
संतोष
मुस्कुराहट के द्वार पर बुढ़ापा दस्तक नहीं देता, इसलिए परमात्मा कभी बूढ़े नहीं होते। सम्पन्नता में सुख नहीं, प्रसन्नता में सुख है।
संतोष
प्रसन्नता परम स्वास्थ्यवर्धक है, देह और मन दोनों के लिए मित्र-तुल्य है।
स्वास्थ्य
विनोदप्रियता से ज्यादा असरकारक कोई भी स्वास्थ्यवर्धक टॉनिक नहीं होता है।
स्वास्थ्य
आपको जो भी चाहिए हो उसे अपनी मुस्कुराहट से प्राप्त करो न कि तलवार के जोर से। जीवन में प्रसन्नता उत्पन्न करो क्योंकि प्रसन्न व्यक्ति सबका प्रिय होता है।
संतोष
प्रसन्नता स्वास्थ्य है, उदासी रोग है।
स्वास्थ्य
मन की प्रसन्नता ही व्यवहार में उदारता बन जाती है।
संतोष
मुस्कुराहट से खर्च कुछ नहीं होता किन्तु इससे मिलता बहुत है।
संतोष
मुस्कुराहट थके हुओं के लिए आराम है, निराश लोगों के लिए आशा की किरण है, दुःखी लोगों के लिए सूर्य की रोशनी है और कष्टों के लिए प्रकृति की सबसे बेहतरीन दवा है।
संतोष
मुस्कुराहट मोल नहीं मिलती, न ही इसे चुराया जा सकता है, न ही उधार लिया जा सकता है, न ही भीख में मिलती है क्योंकि इसका तब तक कोई मोल नहीं है, जब तक कि इसे दूसरों को नहीं दिया जाता है।
संतोष
संसार में प्रसन्न रहने का एक ही उपाय है कि अपनी आवश्यकताओं को कम से कम रखो।
संतोष
इस संसार में वही जीव सुख का अधिकारी है जो लौकिक निमित्तों के मिलने पर हर्ष और विषाद से अपने को बचा सकता है।
संतोष
स्वार्थ पूर्ति के लिए बोले गये सत्य वचन भी असत्य से बढ़कर हैं।
सत्य
जो बहुत खिल-खिलाकर हँसते हैं, समझ लो भीतर-ही-भीतर बहुत दुःखी होते हैं, बात-बात पर हँसी भरे-पूरे जीवन का चित्र नहीं उभारती, जीवन की शून्यता और दर्द को उभारती है।
मन
मुस्कान पाने वाला मालामाल हो जाता है, परन्तु देने वाला दरिद्र नहीं होता है।
संतोष
दूसरों को हँसाने की कला सीखिए।
चरित्र
सर्व रोगों की रामबाण औषधि हँसी है जो बिना पैसे की मिलती है और इसका कोई (दुष्प्रभाव) साइडइफेक्ट नहीं होता है।
स्वास्थ्य
होंठों से तो सभी मुस्कुराते हैं, आप आँखों से मुस्करायें तो मुस्कान चौगुनी असरदार होगी।
चरित्र
यदि हम दूसरों के लिए रोना सीख लेंगे तो बहुत से लोग हँसने लगेंगे।
दान
हँसना अच्छा है किन्तु हँसने से पूर्व हमें यह अवश्य जान लेना चाहिए कि हमारी हँसी कहीं किसी के रुदन का कारण तो नहीं है।
चरित्र
जो खुद पर हँसना नहीं जानता, उस पर लोग हँसते हैं।
चरित्र
दूसरों की हार पर हँसने वाला, एक दिन खुद अपनी हार पर आँसू बहाता है।
चरित्र
हँसी आये तो हँस लेना इससे आँतें खुल जाती है और रोना आये तो रो लेना इससे आँखें धुल जाती हैं।
स्वास्थ्य
अगर आपको किसी की हँसी निर्मल लगती है तो जान लीजिए वह आदमी भी निश्छल है।
चरित्र
यदि विश्व में कोई ऐसा सद्गुण है जिसकी प्राप्ति सदैव हमारा लक्ष्य होना चाहिए तो वह है प्रसन्नता।
संतोष
जिसके पास प्रसन्नता है समझो उसकी आवश्यकता एवं इच्छाएँ कम हैं।
संतोष
जिसके पास पैसा नहीं वह दरिद्री नहीं अपितु जो दूसरों को देखकर प्रसन्न नहीं होता, दूसरों की प्रशंसा नहीं करता वह दरिद्री हैं।
चरित्र
कोई व्यक्ति सिर्फ इसलिए प्रसन्न नहीं दिखाई देता कि उसको कोई परेशानी नहीं है। बल्कि इसलिए प्रसन्न रहता है कि उसका जीवन जीने का दृष्टिकोण सकारात्मक है।
संतोष