Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 2 · अध्याय 384

सुरसुन्दरी को इच्छित वरदान।

2 सूत्र

जिनेन्द्र भगवान् के दर्शन से और साधुओं को नमस्कार करने से पाप उस प्रकार नहीं ठहरते जिस प्रकार अञ्जुलि का जल ज्यादा देर नहीं ठहरता है।
भक्ति
सत्सङ्गति अज्ञानता दूर करती है, वचनों में सत्यता लाती है, सम्मान दिलाती है, पाप दूर करती है, मन प्रसन्न करती है, दिशाओं में कीर्ति फैलाती है और ऐसी कौन सी चीज है जो सत्सङ्गति से प्राप्त नहीं होती है?
संगति