राजा के बेटे के भाग्य में काला घोड़ा और पाँच रुपये थे, उसने दान देना प्रारम्भ किया तो भाग्य बदल गया और वह राजा बन गया। दान 0 – भेजें
सुपात्र दान के फल से उत्तम कुल, रूप, सुलक्षण, बुद्धि, शिक्षा, स्वभाव, गुण, चरित्र तथा सकल सुखों का अनुभव प्राप्त होता है। दान 0 – भेजें
गृहस्थों को दान के आलम्बन के विना अन्य कोई सुदृढ़ साधन संसार कूप से निकालने वाला नहीं है। दान 0 – भेजें
जो उत्तम पात्र विशेष के लिए उत्तमभक्ति से एक दिन भी दान देता है, उसका वह दान उसे इन्द्र का उत्तम सुख देता है। दान 0 – भेजें
दान और जीवरक्षण के बीच दान की अपेक्षा जीव रक्षण श्रेष्ठ है क्योंकि दान से मनुष्य स्वर्ग को प्राप्त होता है और जीवरक्षण से अविनाशी मोक्षपद को प्राप्त होता है। अहिंसा 0 – भेजें
लोक में भोजन कराने से कौन मनुष्य वश में नहीं होता? क्योंकि आटे के लेप से मृदङ्ग भी मधुर शब्द करता है। दान 0 – भेजें
गृहत्यागी साधुओं को दिया हुआ दान घर के कार्यों से संचित पापों को उस तरह धो देता है, जैसे पानी खून को धो देता है। दान 0 – भेजें
मुनि को दान देकर जो भोजन करता है वह उत्तम श्रावक है, जो मुनि के आहार को देखकर भोजन करता है वह मध्यम श्रावक है और जो मुनि के आहार की बेला टालकर भोजन करता है वह जघन्य श्रावक माना जाता है और जो मुनि के आहार के पहले भोजन करता है, वह जघन्य से भी जघन्य श्रावक माना जाता है। दान 0 – भेजें
आध्यात्मिक आनन्द की खोज भारतीय साधना का मूल है, अतः वैभव सम्पन्न लोग साधना सम्पन्न साधको के चरणों में झुकते हैं। भक्ति 0 – भेजें