स्वप्न में गृहस्थी- एक सन्यासी पानी पीकर कुंए के पत्थर पर सो गया, उसने स्वप्न में देखा कि मैं अपनी स्त्री बच्चों के साथ सो रहा हूँ, इतने में स्त्री ने कहा थोड़ा खिसको गर्मी लग रही है, थोड़ी देर में पत्नी ने पुनः कहा थोड़ा और खिसको बच्चा पसीना-पसीना हो रहा है, जैसे ही सन्यासी खिसका तो कुंए में गिर गया, चिल्लाया तो किसान दौड़ कर आया और सन्यासी को बाहर निकाला, पूँछा आप कुंए में कैसे गिर गये थे? सन्यासी ने कहा स्वप्न में थोड़ी देर के लिये स्त्री के साथ सोया तो कुंए में गिर गया, जो लोग जीवन भर स्त्री के साथ सोते हैं तो क्या वे नरक रुपी कुंए में नहीं गिरेंगे? ब्रह्मचर्य 0 – भेजें
ध्यान के लिये वीर्य शुद्धि और ब्रह्मचर्य बहुत आवश्यक है, दूध, घी, आदि रसों का अधिक मात्रा में सेवन करने से वीर्य पर्याप्त मात्रा में बढ़ता है, घी सर्वाधिक वीर्य वर्धक वस्तु है उसका सेवन काम वासना उत्तेजित करता है, चञ्चलता बनी रहती है, यदि वीर्य सञ्चित होता है तो चञ्चलता बढ़ती है और वीर्य का विसर्जन होता है जिससे दुर्बलता आती है, दुर्बलता से मन सन्तुलित नहीं हो पाता, अतः ध्यान की कल्पना भी नहीं हो सकती है, इसलिए रसों का प्रचुर मात्रा में सेवन करना ध्यानाभ्यासी के लिये हितकर नहीं है। ब्रह्मचर्य 0 – भेजें
कालेज की लड़की- सागर जिला में एक लड़की बस से रोज कॉलेज जाती थी, कण्डक्टर से परिचय हो गया, दोनों प्रेम की डोर में बन्ध गये, दोनों के माँ-बाप ने रोका, नहीं माने और शादी कर ली, जब वधू घर पहुँची, तब लड़के के माँ-बाप ने स्वीकार नहीं किया, पिता ने कहा हमारे घर भर के लोगों का थूक पियो तो स्वीकार करेंगे, लड़की ने स्वीकार कर लिया, गिलास में परिवार के लोगों ने थूका, लड़की को दिया, उसने पी लिया, कुछ दिन बाद पति-पत्नी में अनबन हो गयी, मारना-पीटना शुरू हुआ, बहुत दुःखी हुयी और बाद में तलाक हो गया। ब्रह्मचर्य 0 – भेजें
राजा ने रानी को अमृत फल दिया ताकि रानी हमेशा सुन्दर बनी रहे, रानी ने कोतवाल को दिया, उसने वेश्या को दिया, वेश्या ने राजा को दिया, राजा फल को देखकर चिन्तन करने लगा। मैं जिस रानी का निरन्तर चिन्तन करता हूँ, वह रानी मुझसे विरक्त है और वह कोतवाल को चाहती है कोतवाल वेश्या को चाहता है वेश्या मुझे चाहती है, इसीलिए उस रानी को धिक्कार... ब्रह्मचर्य 0 – भेजें