Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 2 · अध्याय 362

जीवाधिकरण के 108 भेद। उपयोग संयोग। फोटो बिगाड़ दी।

10 सूत्र

उपयोग करना अपने अधीन है- बच्चे को पाँच रुपये दिये चाहे तो खर्च कर सकता है या दान कर सकता है अथवा विभाग करके उपयोग कर सकता है, उसी प्रकार पाँच इन्द्रियाँ मिली हैं, चाहे तो भोग करें अथवा संवर निर्जरा करें।
संयम
कषाय करने से नरक निगोद के छाले पड़ते हैं, जैसे रेत मथने से मक्खन नहीं निकलता उल्टा हाथों में छाले पड़ते है।
क्षमा
अनन्तानन्त जीवों को तो सुखाभास भी नहीं है, जैसे अस्पताल में भर्ती जीव और निगोदिया आदि जीव।
विविध
तीव्र भाव से संज्ञी पञ्चेन्द्रिय जीव सत्तर कोड़ा-कोड़ी सागर की मिथ्यात्व की स्थिति का बन्ध करता है।
कर्म
अधिकरण- बालक के हाथ में पिस्तौल आती है, तो वह किसी भी बालक को या माता-पिता, भाई-बहन के सीने में लगाने लगता है, यदि इसके हाथ में माला दे दो, तो वह सीधा अकड़ कर बैठ जाता है और यदि पिच्छी हाथ में आ जाये तो मुनि बनने की चेष्टा करने लगता है, अतः अच्छे उपकरणों को ही अपने पास रखना चाहिए।
विविध
जीवाधिकरण के एक सौ आठ भेद- अशुभ और शुभ दोनों एक सौ आठ-एक सौ आठ भेद वाले होते हैं, यह अधिकरण समरम्भादि सत्ताईस का चार कषाय के साथ गुणा करने से एक सौ आठ भेद होते हैं और अनन्तानुबन्धी आदि सोलह के साथ गुणा करने पर चार सौ बत्तीस भेद हो जाते हैं।
विविध
उपकरण संयोग- दूसरे के वस्त्र, पिच्छी, पेन आदि उपयोग नहीं करना चाहिए।
संयम
'आओ चोर चोरी कर ले गओ, मोरी मूँदत मुगद फिरे' अर्थात् किसी के घर में चोरी हो गयी, दूसरे दिन उसने घर के पीछे की पानी बहने की मोरी बन्द कर दी, किन्तु खिड़की बन्द की ही नहीं, जहाँ से चोर आ सकता था, उसी प्रकार अज्ञानी प्राणी जिन भावों से कर्मों का बन्ध होता है उन्हें पहचानता ही नहीं है।
कर्म
सामान्य साधु के अवर्णवाद से जब मनुष्य दुर्गति को प्राप्त होते हैं तो केवली के अवर्णवाद से कहाँ जावेंगे?
वाणी
फोटो बिगाड़ दी- फोटोग्राफर ने कहा! रेडी, तभी नाक पर मक्खी बैठी, उसे उड़ाने के लिये हाथ आगे आ गया, अब कहता तुमने फोटो बिगाड़ दी, इसी तरह आयु कर्म का बन्ध त्रिभाग (जीवन का दो हिस्सा बीत जाने पर) होता है, कब त्रिभाग पड़े, यह मालूम नहीं इसलिए सावधान रहना चाहिए अन्यथा भव विगड़ जाता है।
कर्म