दुःखों के कारणभूत मार्ग में, खोटे मार्ग में स्थित व्यक्तियों के विषय में मन से सम्मति नहीं देना, शरीर से सम्बन्ध नहीं रखना, वचन से प्रशंसा नहीं करना अमूढ़दृष्टि अङ्ग माना जाता है। विवेक 0 – भेजें
स्वयं शुद्ध मार्ग की, बालक व असमर्थ लोगों के द्वारा होने वाली निन्दा को जो दूर करते हैं, उसे उपगूहन अङ्ग कहते हैं। विवेक 0 – भेजें
खोटे शास्त्रों में, मिथ्यामतों में एवं कुदेवों में आत्मज्ञानी को सावधानी रखनी चाहिये इसे अमूढ़दृष्टि अङ्ग कहते हैं। विवेक 0 – भेजें
सम्यग्दर्शन की शोभा अमूढ़ता से है, सूक्ष्म, अन्तरित व दूरवर्ती पदार्थों में मूढ़ता नहीं होना चाहिए। विवेक 0 – भेजें
नदी और सागर में स्नान करना, बालू और पत्थर के ढेर लगाना, पर्वत से गिरना और अग्नि में जलकर (सतिप्रथा को) धर्म मानना लोक मूढ़ता है। विवेक 0 – भेजें
संसार में भ्रमण करने वाले, आरम्भ परिग्रही, हिंसक, कुगुरुओं का सम्मान करना गुरु मूढ़ता कहलाती है। विवेक 0 – भेजें