Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 1 · अध्याय 74

सराहना से भी प्रभावना

17 सूत्र

जिन लोगों के विचार महत्त्वपूर्ण कार्यों में रत हैं और जो सौभाग्य लक्ष्मी के कृपा पात्र हैं, वे अपनी स्त्री के मोहजाल में फँसने की कुबुद्धि नहीं करते हैं।
परिवार
विषयों में स्वाद कम है, बन्धन अधिक है, केवल अतृप्ति है, सज्जनों द्वारा निन्दा होती है और पाप निश्चित है, ऐसा समझकर कौन व्यक्ति काम नामक विष को ग्रहण करेगा?
ब्रह्मचर्य
बुराई का त्याग करना, भलाई को स्वीकार कर पालन करना ही श्रेष्ठ चक्रवर्ती व्रत है क्योंकि व्रत बंधन नहीं, बल्कि स्वतंत्रता का द्वार है।
चरित्र
योग्यताएँ आलोचना के तुषार से कुम्हला जाती हैं परन्तु प्रोत्साहन की खाद से वे योग्यताएँ फलने-फूलने लगती हैं।
वाणी
भोजन छोड़ दोगे तो जिंदा नहीं रहोगे, भजन छोड़ दोगे तो कहीं के नहीं रहोगे।
भक्ति
जो लोगों की प्रशंसा करता है वह लोगों को अपने वश में कर लेता है, फिर लोग उससे इतना प्रेम करने लगते हैं कि उसके दुःख को अपना दुःख समझने लगते हैं।
वाणी
प्रतिद्वंदी द्वारा की गई प्रशंसा सर्वोत्तम कीर्ति है।
वाणी
यदि तुम चाहते हो कि कोई तुम्हारी प्रशंसा करे तो पहले तुम उसकी प्रशंसा करो।
वाणी
मानव प्रकृति में सबसे कठिन त्याग प्रशंसा प्राप्त करने की लालसा का त्याग करना है।
विनम्रता
किसी के गुणों की प्रशंसा के साथ उसके गुणों को अपनाने का प्रयास करना चाहिए।
वाणी
मनुष्य के भीतर जो कुछ सर्वोत्तम है उसका विकास प्रशंसा और प्रोत्साहन द्वारा किया जा सकता है।
वाणी
अपने मित्रों को एकान्त में बुरा-भला कहो, परन्तु उनकी प्रशंसा सबके सम्मुख करो।
वाणी
अपनी प्रशंसा सुनकर जो वास्तविकता को भूल जाते हैं, वे महामूर्ख हैं। अपनी निन्दा सुनकर मनुष्य अपने आपको सम्भालता है और प्रशंसा सुनकर स्वयं को खो देता है। प्रशंसा सुनकर प्रसन्न होना एक बड़ा अवगुण है।
विनम्रता
आप आम आदमी को आसानी से प्रेरित कर सकते हैं, यदि आप उसे यह बतायें कि आप उसकी किसी खास योग्यता के लिए उसका सम्मान करते हैं।
वाणी
लोग आपका कहा काम तभी करेंगे जब आप उसकी तारीफ (प्रशंसा) से बात शुरू करें।
वाणी
प्रत्येक व्यक्ति के दिल की गहराई में यह लालसा छुपी होती है कि उसे सराहा जाये, उसकी तारीफ की जाये।
वाणी
आलोचक भी अपनी प्रशंसा से ज्यादा खुश होते हैं।
वाणी