Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 2 · अध्याय 70

कन्या को दहेज में ऊंट।

8 सूत्र

वृद्धावस्था में स्त्री का मरना कष्टकारी होता है, यदि शरीर में रोग हो तो और दुर्दशा होती है, पुत्र मिष्ट वचन नहीं बोलते हैं, उनकी स्त्रियाँ दूर से भागती हैं, नाती पास में नहीं आते तथा अत्यधिक कटु वचन बोलते हैं।
परिवार
ऊँट को जातिस्मरण- एक सेठ के यहाँ कन्या हुयी, सेठ के पास एक ऊँट था जो उस कन्या का पूर्व भव का पति था, सेठ ने कन्या की शादी की, तो दहेज में ऊँट दे दिया, वह कन्या ऊँट पर सवार हुयी, तो ऊँट को जातिस्मरण हो गया, कि ये मेरी पत्नि थी, अब मेरे ऊपर बैठी है, ऊँट बैठ गया आगे नहीं बढ़ा खूब पिटाई की, लेकिन नहीं उठा, कन्या को भी जाति स्मरण हो गया कि ये मेरा पति था, इसलिये बैठ गया, कन्या ने समझाया तुम्हारी पर्याय बदल गयी है, अब विकल्प मत करो, इस पर्याय में कड़वी नीम खाना पड़ती है और भार ढोना पड़ता है।
कर्म
चक्र ने नहीं-एक तीर ने प्राण हरे- पुण्य के उदय में कृष्ण जी की मृत्यु जरासन्ध के सुदर्शन चक्र से नहीं हुई, पर पापोदय में एक बाण से हो गयी, उसी तरह लक्ष्मण की मृत्यु रावण के सुदर्शन चक्र से नहीं हुई, लेकिन देवों ने स्नेह की परीक्षा के निमित्त 'राम नहीं रहे' यह झूठ बोला, तो सुनते ही लक्ष्मण जी के प्राण निकल गये।
कर्म
सारी दुनिया को पानी पिलाने वाला भी, प्यासा मर जाता है जैसे श्रीकृष्ण जी।
कर्म
खरदूषण चौदह हज़ार विद्याओं एवं चौदह हज़ार विद्याधरों का स्वामी था, पाप के उदय में लक्ष्मण से युद्ध में मारा गया था।
कर्म
प्रजा के द्वारा किया हुआ पाप राजा को, राजा के द्वारा किया गया पाप मन्त्री को, स्त्री के द्वारा किया हुआ पाप पति को और शिष्य के द्वारा किया गया पाप गुरु को भी भोगना पड़ता है।
कर्म
पापास्रव में अभिप्राय मुख्य है, जैसे ससुराल की गाली और शत्रु की गाली का अभिप्राय अलग-अलग होता है।
कर्म
पतन जब होता है, तो उसमें वृद्धि ही होती है, जैसे सीढ़ी से गेंद खिसकाओं तो सीधे नीचे गिरती है।
कर्म