Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 1 · अध्याय 49

सोना बना लो या सोने में गुजार दो

77 सूत्र · पृष्ठ 1 / 2

पुण्य कमाओ पैसा नहीं पैसा तो अपने आप आयेगा।
कर्म
मेहनत इतनी खामोशी से करो कि सफलता शोर मचा दे।
पुरुषार्थ
बुद्धिमान व्यक्ति कभी अपनी हानि पर शोक नहीं करते बल्कि प्रसन्नतापूर्वक क्षति को पूरा करने का उपाय करते हैं।
ज्ञान
मेहनत सीढ़ियों की तरह होती है और भाग्य लिफ्ट की तरह किसी समय लिफ्ट तो बंद हो सकती है लेकिन सीढ़ियाँ हमेशा ऊँचाई की तरफ ले जाती हैं।
पुरुषार्थ
दूसरों को मारने गिराने के भाव नर में नहीं नारकी में होते हैं।
अहिंसा
भगवान् तो मात्र मन्दिर में मिलते हैं पर भगवान् बनने की भावना तो लोकाकाश के प्रत्येक प्रदेश में हो सकती है।
भक्ति
वैराग्य भावनाएँ माँ के समान जीव की रक्षा करती हैं।
अनासक्ति
सौभाग्य को यदि ढूँढ़ो तो वह 'परिश्रम' के साथ खड़ा नजर आता है।
पुरुषार्थ
जो मन अज्ञान के कारण रात्रि है वही मन ज्ञान के प्रकाश से दिवस बन जाता है।
ज्ञान
मन की निर्मलता, सरलता एवं सहनशीलता ही साधुता है।
चरित्र
मन को वश में करने का उपाय है रचनात्मक कार्य करें।
मन
मौके का लाभ न उठाना सबसे बड़ा दुर्भाग्य है मगर किसी के हालात व मजबूरी का लाभ नहीं उठाना चाहिए।
विवेक
आपके ऊपर तब-तक कोई सवार नहीं हो सकता जब तक कि आपकी कमर झुकी न हो, इसलिए अपनी कमर सीधी करें और लक्ष्य के लिए काम करने में जुट जाएँ।
पुरुषार्थ
भगवान् की पूजा ही न करें अपितु भगवान् बनने का पुरुषार्थ भी करें।
भक्ति
त्याग वेष की ओर तुम्हारा पुरुषार्थ शान्ति के लिए था। इस समय कहाँ हो? विचार करो और सर्व पुरुषार्थ से अपने उद्देश्य पर पहुँचो।
अनासक्ति
बदल जाओ वक्त के साथ या फिर वक्त को बदलना सीखो, मजबूरियों को मत कोसो हर हाल में चलना सीखो।
पुरुषार्थ
जो वक्त पर पसीना नहीं बहाते वे बाद में आँसू बहाते हैं।
पुरुषार्थ
जीवन में एक बार जो फैसला कर लिया तो फिर पीछे मुड़कर मत देखो क्योंकि पलट-पलट कर देखने वाले इतिहास नहीं बनाते हैं।
पुरुषार्थ
आप यह मत सोचो कि अकेले क्या कर सकते हैं, जरा देखो उस सूरज को जो अकेला चमकता है।
पुरुषार्थ
कुशल व्यक्ति के तप होता है, निपुण व्यक्ति के संयम होता है, समता भावी के वैराग्य होता है और श्रुत के अभ्यास से ये तीनों होते हैं।
ज्ञान
संसार में कोई ऐसी समस्या नहीं जो आपके मन की शक्ति से अधिक शक्तिशाली हो।
मन
लक्ष्य पर आधे रास्ते तक जाकर कभी वापस न लौटें क्योंकि वापस लौटने पर भी आधा रास्ता पार करना पड़ता है।
पुरुषार्थ
अपना व्यवहार मर्यादा और गरिमानुरूप होना चाहिए।
चरित्र
वक्त आपका है चाहे सोना बना लो या सोने में गुजार दो।
समय
दूसरों को नहीं स्वयं को वश में करने वाला वीर होता है।
संयम
यदि वर्तमान में भाव निर्मल हैं तो भविष्य का भव निर्मल होगा।
कर्म
विचारों की पवित्रता चारित्र की रक्षा करती है।
चरित्र
जिसको अपने काम पर भरोसा होता है वो 'नौकरी' करते हैं, जिनको अपने आप पर भरोसा होता है वो 'व्यापार' करते हैं।
समृद्धि
मानव स्वभाव एक उपार्जित गुण है, शिक्षा, सत्संग और प्रेम से बदला जा सकता है।
चरित्र
देने में उदारता, वचनों में मधुरता, आचरण में विवेक होना ही चाहिए।
चरित्र
आप किस-किस को हटाओगे? किस-किस को घर से निकालोगे? इसलिए स्वयं निकल जाओ।
अनासक्ति
स्वयं हटना बहुत सरल है इसलिए साधु संसार को नहीं हटाता स्वयं हट जाता है।
अनासक्ति
समय की कीमत ही जीवन का मूल्य है।
समय
जिन्हें सपने देखना अच्छा लगता है उन्हें रात छोटी लगती है और जिन्हें सपने पूरे करना अच्छा लगता है उन्हें दिन छोटा लगता है।
पुरुषार्थ
दोषग्राही मिथ्यादृष्टि गुणग्राही सम्यग्दृष्टि होता है।
विवेक
मेरे लिए वर्तमान ही सब कुछ है, भविष्य की चिन्ता हमें कायर बना देती है, भूत का भार हमारी कमर तोड़ देता है।
समय
हारना तब आवश्यक हो जाता है जब लड़ाई अपनों से हो और जीतना तब आवश्यक हो जाता है जब लड़ाई अपने आप से हो।
संयम
कभी भी लोग आपके बारे में टीका-टिप्पणी करें तो घबराना मत, बस यह बात याद रखना हर एक खेल में दर्शक ही शोर मचाते हैं, खिलाड़ी नहीं।
संयम
अपने आपको अच्छा बना लीजिए दुनिया से एक बुरा इंसान कम हो जायेगा।
चरित्र
समय और धन अमूल्य है, मौत करीब है अतः समय और धन को अच्छे कार्य में लगा लो।
समय
व्यक्ति महान् इसलिए नहीं कि उसके पास पाँचों इन्द्रियों के भोग हैं, बल्कि वो व्यक्ति महान् होता है जो पाँचों को छोड़ देता है।
संयम
किसी मकसद के लिए खड़े हो तो पेड़ की तरह, गिरो तो बीज की तरह जिससे दुबारा उठकर उसी मकसद के लिए पुरुषार्थ कर सको।
पुरुषार्थ
जिन्दगी जीना आसान नहीं होता, बिना संघर्ष कोई महान् नहीं होता, जब तक न पड़े हथौड़ी की चोट तब तक पत्थर भी भगवान् नहीं होता।
पुरुषार्थ
अगर हम चाहते हैं कि हमें पछताना न पड़े तो हमें समय के महत्त्व को पहचानना होगा, समय की पाबंदी को आत्मसात् करना होगा।
समय
हमें समय नहीं काटना, सोचो नर देह को काटने की बात कर रहे हो, कसाई छुरी से मूक प्राणियों को काटता है, आप नर देह को गप्पों में, टी.व्ही. देखकर, तास खेल कर, पेपर पढ़कर काट रहे हो, जिन्हें भविष्य की चिंता नहीं वे ही समय काटने की सोचते हैं, वे कभी श्मशान घाट या अस्पताल में जाकर नारकी हालात को देख आये होते तो फिर समय नहीं कर्म काटने की सोचते।
समय
सपने वो नहीं होते जो नींद में आते हैं, सपने वो होते हैं जिनके पूरे होने तक नींद नहीं आती है। सफलता न मिलने के पीछे कोई वजह हो सकती हैं? किन्तु सफलता के पीछे वजह होगी सिर्फ कोशिश और आत्म विश्वास।
समृद्धि
सफलता तुम्हारा परिचय दुनिया से कराती है असफलता तुम्हें दुनिया का परिचय कराती है। कई विफलताएँ इसलिए होती हैं कि लोग सफलता के नजदीक पहुँचते ही प्रयास बंद कर देते हैं और लोगों को ये आभास नहीं होता कि जब उन्होंने प्रयास बंद कर दिये थे उस वक्त वे सफलता के कितने नजदीक थे।
समृद्धि
सफल व्यक्ति और दूसरों के बीच में अन्तर ताकत का नहीं, ज्ञान का नहीं, बल्कि इच्छा शक्ति का होता है।
समृद्धि
आप अपने जीवन में विशुद्धि और उत्साह शक्ति को भंग मत करना क्योंकि इसी से लौकिक और पारमार्थिक दोनों कार्यों में सफलता मिलती है।
पुरुषार्थ
जैसे नेत्र विहीन व्यक्ति किसी भी गड्ढे में गिर सकता है वैसे ही ज्ञान विहीन साधक कभी भी असंयम के गड्ढे में गिर सकता है।
ज्ञान
साधना का अर्थ अपने समय, श्रम और साधनों का कण-कण उपयोग करना है।
पुरुषार्थ
कठोर पाप कठोर साधना से ही कटेंगे, हीरे की कटिंग हीरे से ही होती है लोहे से नहीं।
कर्म
साधना एक पराक्रम है, संघर्ष है, जो अपनी ही दुष्प्रवृत्तियों से करना होता है।
संयम
प्रमुदित, उत्साहित मन से जो साधना व आराधना की जाती है, वह प्रबल फल को प्रदान कराती है।
भक्ति
चित्त की निर्मलता से साधना निर्मल होती है।
ध्यान
तोते की तरह बंधन में बैठने को साधना नहीं संयम के साथ बैठना साधना है।
संयम
भगवान् से मिलने नहीं भगवान् बनने साधना की जाती है।
ध्यान
विभूति चंचल है, यौवन क्षणभंगुर है और जीवन यमराज के दाँतों के बीच विद्यमान है अतः पर लोक की साधना में उपेक्षा करना ठीक नहीं है।
समाधि
एकान्त में रहकर निवास कर लेना किन्तु ऐसी भीड़ में मत जाना जहाँ निज भगवान् से विछोह हो जाये मंदिर के भगवान् तो पुनः मिल सकते हैं पर परिणामों के भगवान् पुनः नहीं मिलते हैं।
ध्यान
साहस भय पर विजय प्राप्त करने का नाम है।
चरित्र