Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 2 · अध्याय 305

कुँये का पानी गन्दा।

10 सूत्र

शय्या के लिए तृण का ग्रहण करना भी मुनियों के लिए निन्द्य कहा है, फिर जो धनादिक को ग्रहण करता है वह क्या जिनागम में निन्द्य नहीं कहा जायेगा?
अनासक्ति
विद्वानों ने परिग्रह को काम रूपी साँप की बामी, रागादि शत्रुओं का घर तथा अविद्याओं का क्रीड़ा स्थल कहा है।
अनासक्ति
दूध और पानी को नींबू अलग कर देता है, आत्मीय सम्बन्धों को पैसा अलग कर देता है, अतः पैसे से सोच समझकर कर प्रीति करना चाहिए।
धन
विवेक की दृष्टि खोना आँख की दृष्टि खोने से अधिक खराब है।
विवेक
मकड़ी स्वयं जाल पूरती है और स्वयं उसी में बैठकर मूर्छा के कारण प्राण खो देती है।
अनासक्ति
हमारे साथ कभी मनुष्यों की, कभी काम क्रोधादि विकारों की भीड़ हमेशा रहती है।
संयम
एक व्यक्ति मुनि महाराज के पास गया और बोला हमारे कुंए का पानी गन्दा हो गया आप कोई मन्त्र दे दीजिये, पन्द्रह दिन जाप करने के बाद देखा तो कुंए का पानी और ज्यादा गन्दा था, महाराज को उलाहना देने के लिए आया, तो महाराज ने पूँछा, आपके कुंए का पानी गन्दा कैसे हुआ है? तब उसने कहा एक दिन चार कुत्ते लड़ते हुए आये और कुंए में गिर कर मर गये, महाराज ने कहा कुत्तों को बाहर निकाला कि नहीं? उसने कहा नहीं, तो फिर आपके कुंए का पानी स्वच्छ कैसे होगा? उसी प्रकार अनादिकाल से आत्मा रूपी कुँए में पड़े हुए चार कषाय रूपी कुत्ते यदि नहीं निकाले तो आत्मा रूपी कुंआ साफ नहीं हो सकता है।
संयम
मैं एकाकी एकत्व लिये, एकत्व लिये सब ही आते, तन धन को साथी समझा था पर वे भी छोड़ चले जाते। मेरे न हुये ये मैं इनसे अति भिन्न अखण्ड निराला हूँ, निज में पर से अन्यत्व लिए मैं सम रस पीने वाला हूँ।
अनासक्ति
छाया माया एक सी, घटत बढ़त दिन रैन। जो याका शरणा गहे, सो न पावे चैन।।
अनासक्ति
किसी आम के वृक्ष तले दो व्यक्ति कहीं से आये थे, एक लगा पत्तों को गिनने, दूजे ने फल खाये थे। खाने वाला चतुर मात्र, गिनने वाला मूरख जानों, इसी तरह से ज्ञानी और अनुभवी भी पहिचानो।।
विवेक