Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 2 · अध्याय 232

कम बोलो-काम का बोलो।

4 सूत्र

'अप्रिय कटुक कठोर शब्द नहीं कोई मुख से कहा करे'।
वाणी
वचन चातुर्य-चार महिलायें एक साधु से बात करने के बहाने आती हैं, और पहली ने कहा विचारणीय बाबा! पानी दे दो, दूसरी ने कहा बाबा अग्नि दे दो, तीसरी ने कहा बाबा गोद में ले लो, चौथी महिला ने कहा बाबा आपके खेत में पशु घुस गये हैं, साधु चारों का एक ही उत्तर देते हैं कि 'वारि नहीं है', पानी को भी वारि कहते हैं, अग्नि वारी नहीं, वारी मतलब छोटी सी नहीं है, खेती वारी नहीं है।
वाणी
सत्य और सुन्दर- एक काना राजा था, उसने कई बड़े–बड़े चित्रकारों को बुलावाया, और आदेश दिया कि जो भी राजा का ऐसा चित्र बनाए जो सुन्दर भी हो और सत्य भी, तो कई चित्रकारों ने अपनी कला दिखायी, राजा ने एक चित्र देखा जिसमें एक आँख नहीं थी, राजा बोला ये सत्य है पर सुन्दर नहीं, दूसरे चित्र में दोनों आँखें थी, राजा बोला ये सुन्दर है पर सत्य नहीं, तीसरा चित्र दिखाया गया, जिसमें राजा धनुष से बाण को खींचता है, और एक आँख बन्द है, जैसे निशाना साध रहा हो, राजा देखकर प्रसन्न हो गया बोला यह सुन्दर भी है और सत्य भी, अतः वाणी ऐसी बोलो जो सत्य भी हो और सुन्दर भी।
वाणी
शनि का सौदा- एक बार एक राजा ने इस शर्त पर बाजार लगवाया कि जिसका जो भी सामान नहीं बिकेगा वह मैं खरीद लूँगा, सब दुकान दारों का सामान बिक गया, पर एक मूर्ति बेचने वाले की शनि देव की मूर्ति नहीं बिकी, तब वह राजा ने खरीद ली, एक रात राजा ने देखा कि, मेरे महल से लक्ष्मी, यश, सुख आदि अच्छे–अच्छे गुण जा रहे हैं, साथ में सत्य भी जा रहा है, तो राजा ने पूँछा आप लोग कहाँ जा रहे हैं? उन सभी ने कहा आपके यहाँ शनि देव आ गये हैं इसलिए हम लोग नहीं रहेंगे, तब राजा ने सत्य से कहा कि मैंने आपकी रक्षा के लिए ही शनि देव को खरीदा है, इसलिए आप नहीं जा सकते, तो सत्य लौट आया, और सत्य को वापस आया हुआ देखकर, बाकी के गुण भी वापस आ गये, कहने का तात्पर्य यह है कि जहाँ पर सत्य होता है, वहाँ पर सभी गुण होते है।
सत्य