Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 1 · अध्याय 25

झूठ

17 सूत्र

गुरु को मनाने में अहंकार का भूत चढ़ सकता है, पर गुरु की मानने से कल्याण होता है।
भक्ति
जो गुरु, शिष्य को एक अक्षर भी पढ़ाता है, उसे पृथ्वी पर ऐसा कोई पदार्थ नहीं जिसे देकर ऋण रहित हो सकें।
भक्ति
शिष्य को गुरु के पास आनंद प्राप्त न हो तो उसे दूसरे गुरु का आश्रय ले लेना चाहिए।
भक्ति
जीवन में गुरु गुणगान कहने से कभी पीछे न हटें।
भक्ति
जिस प्रकार मलिन घी का घड़ा बिना जल के ही शुद्ध होता है उसी प्रकार ज्ञान-चारित्र से मुनिराज को निर्मल जानना चाहिए।
चरित्र
समय पर रोने से आँसू भी मोती बन जाते हैं और असमय पर हँसी व मुस्कुराहट भी मौत बन जाती है। समय के साथ चलो वरना पीछे रह जाओगे और पछताओगे।
समय
जो समयानुसार धर्म, अर्थ और काम का सेवन करता है, वह इहलोक व परलोक में भी धर्म, अर्थ और काम को प्राप्त करता है।
धर्म
गुस्सा अक्ल को खा जाता है, अहंकार मन को खा जाता है, चिन्ता आयु को खा जाती है, रिश्वत इंसान को खा जाती है, लालच ईमान को खा जाता है और झूठ सभी गुणों को खा जाता है।
चरित्र
जो मनुष्य दूसरों को देते हुए नहीं देख सकता, उसका वंश रोटी और कपड़ों तक के लिए मारा-मारा फिरेगा और नष्ट हो जायेगा।
दान
सत्य परेशान हो सकता है लेकिन पराजित नहीं।
सत्य
अगर तराजू पर एक ओर समस्त पाप और दूसरी ओर असत्य बोलने का पाप रखा जाये तो दोनों समान कहे हैं। झूठ की उम्र लम्बी नहीं होती है।
सत्य
सत्य वह दौलत है जिसे पहले खर्च करो और जिन्दगी भर आनन्द पाओ और झूठ वह कर्ज है, जिससे क्षणिक सुख पाओ पर जिन्दगी भर चुकाते रहो।
सत्य
सत्य पर कोई विश्वास नहीं करता, झूठ पर सब विश्वास करते हैं, शराब बेचने वाले को कहीं नहीं जाना पड़ता, दूध बेचने वाले को गली-गली जाकर बेचना पड़ता है, इसी प्रकार सत्य को बार-बार परीक्षा देनी पड़ती है।
सत्य
शरीर में जैसे प्राणों का मूल्य है, वैसे ही समस्त सद्गुणों में सत्य का मूल्य है।
सत्य
सत्य जिसका डगमग होता उसकी सत्ता डगमगा जाती है।
सत्य
यदि सत्य के लिए अपनी देह त्यागना पड़े तो त्याग दीजिए, यही अन्तिम ममता है जिसे छोड़ना होगा।
सत्य
सत्य की नाव हिलेगी-डुलेगी पर डुबेगी नहीं।
सत्य