Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 2 · अध्याय 227

सत्य संस्कृत सदन।

9 सूत्र

कर्तृत्व बुद्धि से कुटुम्ब आदि के कारण झूठ बोलता है, असत्य के दो कारण हैं कषाय और अज्ञान।
सत्य
असत्य बोलने से मुख सम्बन्धी रोग, गूँगा, तोतला, दुःस्वर, तथा वाणी सम्बन्धी दुर्गुण एवं एकेन्द्रियादि में जन्म होता है।
कर्म
जीभ पर लगी चोट सबसे जल्दी ठीक होती है पर जीभ से लगी चोट मुश्किल से ठीक होती है।
वाणी
असत्य के पैर नहीं होते हैं और अनीति की जड़ नहीं होती हैं।
सत्य
झूठ बोलने से प्राणी नरकों के पशुगति के और निगोद अवस्था के अत्यन्त दुःख पाते हैं।
कर्म
अग्नि से जला हरा भरा वन तो पुनः हरा भरा हो जाता है, किन्तु जिह्वा रूपी अग्नि से जला चिरकाल तक हरा भरा नहीं होता है।
वाणी
जो अज्ञानी मनुष्यगति में सत्य को छोड़ दे, वह बाद में कौन से कर्म से संसार सागर को पार करेगा?
सत्य
लोक में चाण्डाल, उल्लू, बिल्ली, भेड़िया, सियार और कुत्ता को तो लोग पसन्द करते हैं पर झूठ बोलने वाले को कोई पसन्द नहीं करता है।
सत्य
पर का अनादर व निन्दा और अपनी प्रशंसा से जो नीच गोत्र कर्म का बन्ध होता है, वह अनेक करोड़ों जन्मों में नष्ट करना दुष्कर है।
कर्म