Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 2 · अध्याय 202

अमृत सूक्ति।

14 सूत्र

मायाचारी समस्त अविद्याओं की जन्मभूमि है, अपयश का घर है और पाप रूपी गड्ढे में गिराने वाली है ऐसा ज्ञानीजनों ने कहा है।
चरित्र
माया में ढोंग से और सरलता में ढंग से जिया जाता है।
चरित्र
हम समझते हैं कि हमारे छल को किसी ने नहीं देखा, लेकिन सामने वाला व्यक्ति जान लेता है।
चरित्र
सर्प जमीन पर भले ही टेडा-मेडा चले पर बिल में प्रवेश करने के लिए सीधा होना ही पड़ता है, उसी प्रकार संसारी प्राणी भले ही मायाचारी करे पर आत्म स्वरूप में आने के लिए सीधा ही होना पड़ता है।
चरित्र
मायावी का चेहरा धर्मात्मा जैसा लगता है, पर हृदय पापी का होता है, मायावी मन्दिर में कुछ और, बाहर कुछ और करते हैं, देखने वालों को मायावियों का आचार अच्छा लगता है, पर उनके विचार कौनसे नरक लेकर जायेंगे भगवान् ही जाने।
चरित्र
क्रोधी सुधर सकता है, मानी भी सुधर सकता है, मायावी का चेहरा धर्मात्मा का दिखता है, पर हृदय पापी के समान होता है, अतः उसके सुधारने मे कठिनाई होती है।
चरित्र
सीधी तलवार म्यान में प्रवेश नहीं करती, इसी प्रकार वक्र हृदय में धर्म प्रवेश नहीं करता है।
चरित्र
छल करना पाप है, पर छला जाना पाप नहीं है, जो छल करता है, वह हमेशा चिन्तित ही रहता है, कि कहीं मेरी मायाचारी पकड़ में न आ जाए।
चरित्र
असली वस्तु में नकली वस्तु के मिलाने से नीच गोत्र और अशुभ नाम कर्म का बन्ध होता है।
कर्म
मायावी का व्रत, तप सब निष्फल है।
चरित्र
मायाचारी ज्ञात होने पर स्नेह भङ्ग हो जाता है, माँ भी प्रेम नहीं करती है।
चरित्र
जिसके मन में मायाचारी भरी हो, वह प्रभावशाली व्यक्तित्व किस काम का?
चरित्र
आँखों से गिरा आंसु और नजरों से गिरा व्यक्ति कभी उठ नहीं पाता है अतःमायाचारी करके किसी की नजरों से गिरना नहीं चाहिए।
चरित्र
'माया तैर्यग्योनस्य' 'निःशल्यो व्रती' सुअर, कुत्ता आदि कोई नहीं बनना चाहता, पर मायाचारी नहीं छोड़ेंगे तो बाद में पशुगति की बासठ लाख योनियों में जन्म लेना ही पड़ेगा।
चरित्र