Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 2 · अध्याय 417

गाँव के लोग आबाद रहें।

11 सूत्र

मयूर कार्तिक माह में पङ्ख स्वयं छोड़ता है, अतः साधु कार्तिक माह में नये पङ्ख ग्रहण करते हैं, पुराने छोड़ देते हैं।
धर्म
मुनि बैठने-उठने, सोने, हाथ-पैर फैलाने में, सङ्कोच करने में, करवट बदलने इत्यादि में पिच्छी का प्रयोग करते हैं।
अहिंसा
पिच्छि जीव दया का चिन्ह है, लोगों में साधु के प्रति विश्वास कराने वाला चिन्ह है, प्राचीन मुनियों की प्रतिनिधि स्वरूप है।
अहिंसा
गाँव के लोग आबाद रहें- साधु ने सज्जनों की भक्ति पर प्रसन्न होकर बर्बाद होने का आशीर्वाद दिया, अर्थात् सज्जन जहाँ जायेंगे वहाँ धर्म की प्रभावना होगी इसलिए वे फैल जाएँ और प्रमादियों को आबाद होने का आशीर्वाद दिया, अर्थात् प्रमादी लोग जहाँ रहेंगे वहाँ धर्म का ह्रास होगा इसलिए वे एक ही जगह पर रहें।
संगति
दयालुता एक ऐसी भाषा है जिसे बहरे भी सुन सकते हैं और अन्धे भी देख सकते हैं।
अहिंसा
पिच्छी की डण्डी सम्यक्त्व का प्रतीक है, पङ्ख- चरित्र के प्रतीक हैं और डोरी- ज्ञान का प्रतीक है, जैसे डोरी डण्डी और पङ्ख को सम्भालती है उसी प्रकार ज्ञान बीच में रखा है जो सम्यक्त्व और चरित्र दोनों को सम्भालता है, तथा पिच्छी रत्नत्रय का प्रतीक है।
ज्ञान
साधु न नोट, न वोट, न सपोर्ट चाहते हैं, केवल श्रावक की खोट चाहते हैं।
अनासक्ति
मयूर ब्रह्मचारी होता है, इसकी आँख के आँसू को मोरनी चाँट लेती है इससे वह गर्भवती हो जाती है।
ब्रह्मचर्य
मयूर ऊपर उड़ने के लिये अपने प्रिय पङ्ख स्वयं छोड़ देता है, उसी प्रकार साधु भी ऊर्ध्वगमन करने के लिए प्रिय विषय भोगों को स्वयं छोड़ देते हैं।
अनासक्ति
श्रावक का साधु के कमण्डलु की भांति आय का श्रोत बड़ा एवं टोंटी की भांति व्यय का श्रोत छोटा होना चाहिए तभी गृहस्थ जीवन धर्ममय हो सकता है।
संतोष
साधु का पिच्छी कमण्डल देखकर यदि श्रावक का आभामण्डल नहीं चमकता है तो समझ लो वह श्रावक मिथ्या दृष्टि है।
भक्ति