तपस्वी साधु के इच्छित कार्य को सिद्ध करने वाली जो शक्ति, कान्ति, द्युति और धृति होती है, वह इन्द्र के भी नहीं होती है। पुरुषार्थ 0 – भेजें
अपने करने योग्य अथवा नहीं करने योग्य, सेवन करने योग्य अथवा नहीं सेवन करने योग्य को समझने वाला हो, सबके विषय में समदर्शी हो, दया और दान में तत्पर हो, मन-वचन और काय के विषय में कोमल परिणामी हो ये सब पीत लेश्या वाले के चिन्ह हैं। चरित्र 0 – भेजें
दान देने वाला हो, सरल परिणामी हो, जिसका उत्तम कार्य करने का स्वभाव हो, कष्टरूप तथा अनिष्ट रूप उपद्रवों को सहन करने वाला हो, मुनिजन, गुरुजन आदि की पूजा में प्रीति युक्त हो, ये सब पद्म लेश्या वाले के लक्षण हैं। चरित्र 0 – भेजें
पक्षपात न करना, निदान को न बांधना, सब जीवों में समदर्शी होना, इष्ट से राग और अनिष्ट से द्वेष न करना, स्त्री, पुत्र, मित्र आदि में स्नेह रहित होना ये सब शुक्ल लेश्या वाले के लक्षण हैं। अनासक्ति 0 – भेजें