Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 1 · अध्याय 78

प्रेम से सब कुछ पाया जा सकता है

112 सूत्र · पृष्ठ 1 / 2

नौका जल में रह सकती है किन्तु जल नौका में नहीं रहना चाहिए उसी प्रकार साधक संसार में रहें किन्तु संसार का माया मोह साधक के मन में न रहे।
अनासक्ति
साधना का लक्ष्य है वासनाओं का नाश करना और सद्वृत्तियों का विकास करना/वासनाओं के नष्ट होते ही दिव्य भावों से हृदय परिपूर्ण हो जायेगा, हृदय में दिव्य भावों के प्रवेश करते ही समस्त दुर्बलताएँ भाग जायेंगी।
संयम
क्षति चाहे कितनी ही बड़ी क्यों न उठानी पड़ी हो, परन्तु बड़प्पन इसी में है कि मनुष्य उसे मन में न लावें और बदला लेने के विचार से दूर रहें।
क्षमा
संसार त्यागी पुरुषों से भी बढ़कर सन्त वह है, जो अपनी निन्दा करने वालों की कटुवाणी को सहन कर लेता है।
क्षमा
उपवास करके तपश्चर्या करने वाले निंसन्देह महान् हैं, पर उनका स्थान उन लोगों के पश्चात् ही है, जो अपनी निन्दा करने वालों को क्षमा कर देते हैं।
क्षमा
सब प्रकार की ईर्ष्या से रहित स्वभाव के समान दूसरा और कोई बड़ा वरदान नहीं है।
चरित्र
शान्तिपूर्वक दुःख सहन करना और जीव हिंसा न करना, बस इन्हीं में तपस्या का सार है।
पुरुषार्थ
तपस्वी जितने बड़े कष्टों को सहता है, उसके उतने ही अधिक आत्मिक भाव निर्मल होते हैं।
पुरुषार्थ
विद्वेष का फल बुरा होता है, जबकि भलाई का परिणाम शान्ति और समन्वयकारी होता है।
क्षमा
जीवन की सभी बुराइयों की औषधि है–प्रेम।
विविध
जिसके कर-कमल में दानरूपी अमृत है, मुख कमल में वचन रूपी अमृत है और हृदयकमल में दया रूपी अमृत है वह मनुष्य सभी को प्रिय होता है।
दान
जिस प्रकार निर्गन्ध पुष्प, दन्तहीन मुख और सत्यहीन वचन शोभायमान नहीं होता उसी प्रकार धर्म शून्य मानव भी शोभायमान नहीं होता है।
धर्म
आँख सुधरने से मन सुधरता है और जीभ सुधरने से जीवन सुधरता है।
संयम
प्रेम के मात्र चार दुश्मन हैं–लोभ, मोह, अहंकार और अधिकार है।
अनासक्ति
अहंकार और अधिकार की भूमि पर प्रेम का बीज अंकुरित नहीं होता है।
विनम्रता
प्रेम में पराया भी अपना नजर आता है और प्रतिस्पर्धा में अपना भी दुश्मन लगता है।
विविध
दुनिया में सर्वोत्तम दिन है–आज, अच्छे काम के लिए सबसे उपयुक्त समय है–अभी। व्यक्ति की सबसे बड़ी भूल है–समय की बर्बादी। दोस्ती में सबसे बड़ी बाधा है–अधिक बोलना। दुनिया में सबसे बुरी भावना है–ईर्ष्या। दुनिया में सबसे बड़ा दिवालियापन है–निरुत्साह होना। दुनिया का खूबसूरत पौधा प्रेम का जो जमीन पर नहीं दिल में उगता है।
समय
ज्ञान से ध्यान की सिद्धि होती है, ध्यान से अष्टकर्मों का नाश होता है, अतः ध्यान की सिद्धि करने वाले ज्ञान का अभ्यास अवश्य करना चाहिए।
ध्यान
प्रेम हो तो घड़ी के काँटों जैसा, जो मिलते तो क्षण भर के लिए हैं, लेकिन हमेशा कनेक्टेड रहते हैं।
विविध
जहाँ प्रेम वहाँ सत युग, जहाँ कलह वहाँ कलियुग।
विविध
जो इंसान आप से ज्यादा प्यार करेगा वो आपसे रोज लड़ेगा, लेकिन जब आपका एक आँसू गिरेगा तो उसे रोकने के लिए वह सारी दुनिया से लड़ेगा।
विविध
स्त्री, बालक, रोगी, दास, पशु, धन, विद्याभ्यास, साधु पुरुषों की सेवा की एक क्षण भी उपेक्षा नहीं करना चाहिए।
दान
जो मनुष्य जैन मन्दिर बनवाता है, उसके लिए समस्त संसार किंकर के समान आचरण करता है और वह शीघ्र ही मोक्ष को प्राप्त होता है।
भक्ति
माँ जो भी बनाए उसे बिना नखरे किए खा लिया करो क्योंकि दुनिया में ऐसे भी लोग हैं, जिनके पास या तो खाना नहीं होता है या माँ नहीं होती है।
परिवार
मिलते हैं हजारों लोग, पर हजारों गलतियाँ माफ करने वाले माँ-बाप दुबारा नहीं मिलते हैं। लोगों से कह दो हमारी तकदीर से जलना छोड़ दें क्योंकि हम घर से दवा नहीं माँ की दुआ लेकर चलते हैं।
परिवार
माँ संसार का सुन्दर शब्द है, माँ कहते ही कलेजा भर आता है जवान मीठी हो जाती है और आँखों से गंगा जमुना बहने लगती है।
परिवार
देखो सच्चा प्यार! जब पति ने अपना पसीना पत्नि के दुपट्टे से पोछना चाहा तो पत्नि बोली दुपट्टा गंदा मत करो। जब माँ के दुपट्टे से पोछना चाहा तो माँ बोली ये गन्दा है साफ लाके देती हूँ।
परिवार
जिन मूर्तियों को हम बनाते हैं उनकी हम पूजा करते हैं, पर जिन्होंने हमें बनाया है हम उन माता-पिता कि सेवा क्यों नहीं करते हैं?
परिवार
दुनिया के सभी रिश्तों में माँ का रिश्ता सबसे बड़ा है क्योंकि उसकी आयु सभी रिश्तों से नौ माह अधिक है।
परिवार
जिसके हृदय में करुणा, प्रेम, दया एवं अनुराग होता है उसके शरीर में स्वास्थ्यवर्धक श्वेत कणों की वृद्धि होती है।
स्वास्थ्य
सुखद मधुर वचन व्यक्त करने वालों के पास दुःखद दारिद्रय कभी नहीं भटकता है।
वाणी
सहानुभूति मानवता का गौरव है एवं सहृदयता की सच्ची निशानी है।
विविध
दादागिरी दिखाने की बजाय मिठास से काम लीजिए क्योंकि डंडा मारकर मधुमक्खियों के छत्ते से शहद नहीं लिया जा सकता है।
वाणी
समता का कवच पहन लेने पर कोई कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता जैसे रुई तलवार से भी नहीं कटती है।
संयम
ताकत की जरूरत तभी होती है जब कुछ बुरा करना हो, वर्ना दुनिया में सब कुछ पाने के लिए प्यार ही काफी है।
विविध
सेवा से बढ़कर कोई सुख नहीं, प्रेम से बढ़कर कोई प्रार्थना नहीं, सहानुभूति से बढ़कर कोई सौन्दर्य नहीं होता है।
दान
कम बोलो काम का बोलो।
वाणी
टालमटोल करने की बजाय सही जवाब दीजिए।
वाणी
अहंकार में निकले वचन हमेशा झूठे समझो।
चरित्र
प्रेम में शिकायत नहीं होती, प्रेम करने वाला तो धन्यवाद देता है।
विविध
प्रेम देने वाला आनन्द से भर जाता है।
विविध
प्रेम माँगने से नहीं देने से मिलता है।
विविध
सभी प्राणी भोजन-पानी के नहीं, प्रेम के भूखे होते हैं।
विविध
प्रेम सांसारिक जीवन का सार है।
विविध
जहाँ प्रेम की वर्षा होती है, वहाँ शत्रु भी मित्र हो जाते हैं।
विविध
दूसरों को अधिकार या क्रोध से नहीं प्रेम से जीता जाता है।
क्षमा
मनुष्य को अपनी ओर खींचने वाला यदि जगत् में कोई असली चुंबक है तो वह केवल प्रेम है।
विविध
प्रेम कभी दावा नहीं करता, वह तो हमेशा देता है, प्रेम हमेशा कष्ट सहता है न कभी झुँझलाता है, न बदला लेता है।
विविध
प्रेम क्या है? दूसरों के लिए सद्भावना।
विविध
प्रेम का अर्थ दूसरों को सुख पहुँचाना है और अहिंसा का अर्थ दूसरों को दुःख नहीं पहुँचाना है।
अहिंसा
प्रेम का विरोधी घृणा नहीं, अहंकार है।
विविध
एक कठोर दण्ड बरसों के प्रेम को मिट्टी में मिला देता है।
क्षमा
जिन्दगी की वह उम्र जब इंसान को प्रेम की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, वह बचपन है।
परिवार
जो काम प्रेम से निकल सकता है वह घृणा, क्रोध, भय और मार से नहीं।
विविध
अपने शत्रु से प्रेम करो, जो तुम्हें सताये उसके लिए प्रार्थना करो।
क्षमा
प्रेम में समय का और भक्ति में धन का दान नहीं देखा जाता है।
विविध
प्रेम बाँटने से शत्रु भी झोली फैलाकर खड़े हो जाते हैं।
विविध
जिन्दगी पैसे से नहीं, प्रेम से चलती है।
विविध
जगत् का प्रेम पाना चाहते हो, तो किसी के विरुद्ध कोई भी कार्य मत करो।
विविध
किसी आदमी से कितना भी प्रेम हो, मगर उसकी औरत के पास अकेले में नेक इरादे से भी मत बैठो।
ब्रह्मचर्य