Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 2 · अध्याय 381

श्रीपाल जी चरित्र।

5 सूत्र

भोगभूमि में भी अकाल मरण होता है (ध.15,पृ.299)।
कर्म
श्लोकवार्तिक में नोकर्म द्रव्य परिवर्तन के आधे को अर्द्धपुद्गल परावर्तन माना है।
कर्म
त्रसनाली में उत्पन्न होने वाले जीवों को तीन समय लगते हैं, त्रसनाली के बाहर उत्पन्न होने वाले जीवों को चार समय लगते हैं।
कर्म
न्याय वाक्य-''वादे वादे जायते तत्त्वबोधः''। शङ्का समाधान से तत्त्व ज्ञान होता है।
ज्ञान
प्रथमानुयोग में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष पुरुषार्थ का, महापुरुषों के चरित्र का, वर्णन होता है, बोधि समाधि का खजाना होता है। जिनवाणी का भवन चार स्तम्भों का मेल है 'प्रथमं करणं चरणं द्रव्यं नमः' इनमें प्रथम स्थान प्रथमानुयोग का है।
ज्ञान