Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 2 · अध्याय 310

जो दिन कटे सो आयु में...।

8 सूत्र

छिपकली, कुत्ता, बिल्ली, चूहा, जिन घरों में रहते हैं वे उसे अपना मानते हैं, और जमादार (मेहतर) भी जितने घरों की सफाई करता है, उन्हें अपने कहता है और हम भी उसे अपना घर मानते हैं, तो हमारी सोच भी कुत्ते आदि की तरह हुई, तथा शर्माजी का कुत्ता वर्माजी के कुत्ते से बोला कि मैं गाड़ी खींच रहा हूँ, पर उसे नहीं मालूम की गाड़ी खींचने वाला कोई और है, इसी प्रकार अज्ञानी प्राणी घर, परिवार आदि का कर्ता अपने को मानता है, पर उसे नहीं मालूम कि सबका अपना-अपना भाग्य और पुरुषार्थ होता है।
अनासक्ति
मोक्ष के इच्छुक को सदा बारह भावनाओं का चिन्तन करना चाहिए, इससे मोक्षमार्ग में आने वाले विघ्न दूर होते हैं, मन को शान्ति मिलती है और सांसारिकता से आसक्ति हटती है, बारह भावना आसक्ति नष्ट करने का अमोघास्त्र है।
ध्यान
जो दिन कटे सोई, आयु में अवश घटे। बूँद बूँद बीते जैसे, अञ्जुलि को जल है। देह नित छीन होत, नैन तेज हीन होत। जोवन मलीन होत, छीन होत बल है।। आवे जरा नेरी तवे, आतङ्क अहेरी आवे। परभव नजीक जात, नरभव विफल है। मिल के मिलापी जन, पूँछत कुशल मेरी। ऐसी दशा माहीं मित्र, काहे की कुशल है।।
समय
बेटियों को जमाई, बेटों को बहुएँ और शरीर को मौत ले जायेगी, तब सोचो आपके पास क्या बचेगा?
अनासक्ति
जब परिस्थिति गम्भीर हो, तब भौतिक शक्ति उतनी काम नहीं आती, जितनी समझ और सहन शक्ति काम आती है।
संयम
घर में खुलापन रहने से सुविधा अधिक होती है, इसी तरह हृदय में खुलापन रहने से प्रसन्नता अधिक होती है।
मन
इंसान स्वास्थ्य की बली देकर पैसा कमाता है और पैसे की बलि देकर स्वास्थ्य पाने में जीवन गमाता है, पर गया हुआ स्वास्थ्य पुनः प्राप्त नहीं होता है।
स्वास्थ्य
सब कुछ खोने से खराब उस उम्मीद को खोना है, जिसके बल पर सब कुछ पुनः प्राप्त किया जा सकता है।
मन