Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 2 · अध्याय 136

सर्प ने काटा चूहा दिखा।

13 सूत्र

बदले की आशा विना, सन्त करें उपकार। बादल का बदला भला, क्या देता संसार।।
दान
स्वार्थ त्याग के साथ में जो होवे उपकार। जलधि से वह अधिक है उसकी शक्ति अपार।।
दान
परहित सरस धरम नहीं भाई, पर पीड़ा सम नहीं अधमाई।
दान
ग्राम वृक्ष के फूल फल, भोगें जैसे लोग। उन्नत मन के द्रव्य का, वैसा ही उपयोग।।
दान
दुष्ट भलाई न करें, करो कोटि उपकार। सर्पिन दूध पिलाइये, विष ही के दातार।।
संगति
उपकारी निज को तभी, माने धन से हीन। याचक जब ही लौटते, होकर आशा हीन।।
दान
हर शख्स को यहाँ मौत ने घेरा है, तन तरुवर पर कुछ दिन का बसेरा है। मत सताओ दुखियों को मेरे दोस्त, चार दिन की चाँदनी फिर अँधेरा है।।
समाधि
अहसान- तुम किसी पर अहसान करो तो भूल जाना, कोई तुम्हारा अहसान करे तो मत भूलना।
दान
छ: प्रकार के लोग- आत्मम्भरी, कुटुम्बम्भरी, समाजम्भरी, प्रदेशम्भरी, राष्ट्रम्भरी, वसुधैवकुटुम्बकम्।
दान
जब पृथ्वी पर कृतघ्नियों का भार बढ़ता है तब पृथ्वी भी काँपने लगती है अर्थात् भूकम्प आने लगता है।
चरित्र
नारियल ने प्रथम अवस्था में पानी पिया था, उसका उपकार चुकाने के लिये अपने सिर पर पानी धारण किये रहता है।
दान
चन्द्रमा समस्त संसार को तो धवल करता है परन्तु अपने में स्थित निज कालिमा को क्यों नहीं साफ करता? इससे पता चलता है कि प्रायः परहित में लीन सज्जनों का अपने कार्य में आदर नहीं होता है।
दान
गरीब गली में एवं धनी मन्दिर में दीप जला रहा था, गरीब को अधिक सुख मिला, धनी को कम सुख मिला, क्योंकि अन्धेरी गली में प्रकाश की जरूरत थी, मन्दिर तो स्वभाव से जगमगा रहा था, मन्दिर में दीपक रखना स्वार्थ है, गली में दीपक रखना परोपकार है, इसलिए दोनों के सुख एवं पुण्य में अन्तर है।
दान