Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 2 · अध्याय 317

माँ नहीं राक्षसी।

11 सूत्र

शादी में सात फेरे लगाये जाते हैं, अर्थात् सात प्रकार का संसार परिभ्रमण करना पड़ता है, एकेन्द्रिय के सूक्ष्म, बादर दो-तीन-चार इन्द्रिय, असंज्ञी और संज्ञी के भेद से सात भेद होते हैं या तो संसार के चक्कर काटो अथवा मुनि बनकर कर्म काटो।
ब्रह्मचर्य
रोड पर लाल बत्ती खतरा सूचित करती है, इसी तरह लाल साड़ी के रुप में वधू सूचित करती है कि गृहस्थ जीवन रूपी मार्ग में खतरा है, समय है सम्भल जाओ।
ब्रह्मचर्य
वधू वर से माँग भरवाती हुयी मौन मुद्रा में मानो कहती है ! अब जीवन भर हमारी माँगे पूरी करना, लड़का वासना के वश होकर स्वीकार कर लेता है।
ब्रह्मचर्य
चारों ओर आग लगी हो उससे डरकर कोई विष्टा के गड्ढे में गिरकर सुख मान मरण को प्राप्त होता है, वैसे ही विषय सुख में रति मानता है, तो दुर्गति को प्राप्त होता है।
अनासक्ति
लोग मन्दिर में दीप-धूप नहीं जलाते पर घरों में दहेज के लिए बहुओं को जला देते है।
अहिंसा
भ्रूण हत्या भी कत्लखाना है, प्रति वर्ष बावन लाख शिशुओं को मारा जाता है।
अहिंसा
बेटियों को लक्ष्मी कहने वाले लोग लक्ष्मी के कारण बेटियों का गर्भपात करवा देते हैं।
अहिंसा
दो लाख से अधिक स्त्रियों का प्रतिवर्ष मरण गर्भपात से होता है, अस्सी लाख बीमार रहती हैं एवं पाँच लाख गैर कानूनी गर्भपात से उत्पन्न हुयी समस्या से मर जाती हैं।
अहिंसा
जीवन भर माँस खाने वाली बाघिन और नागिन पाँचवे नरक तक जाती है, लेकिन स्त्री छठवें नरक तक जाती है।
अहिंसा
गर्भपात कराने वाली महिला, गर्भपात की सलाह देने वाली महिला, अनुमोदना करने वाले, अस्पताल जाकर कराने वाले पुरूष को भी छः महीने तक पूजा, आहारदान, वैयावृत्ति, जिनवाणी का स्पर्श, पढ़ना और धार्मिक अनुष्ठान नहीं करना चाहिए, क्योंकि असहाय मनुष्य की हत्या करने बाला महापापी है।
अहिंसा
माँ नहीं राक्षसी- जब सक्ङ्शन पम्प (यन्त्र) भ्रूण के पास पहुँचता है तब बालक की प्रतिमिनट एक सौ चालीस बार होने वाली हृदय की धड़कन बढ़कर दो सौ बार प्रति मिनट हो जाती है, अपने जीवन रूपी दीपक को बुझाने के लिये आ रहे औजारों से बचने के लिये भ्रूण पीछे हटता है, परन्तु उसका आवरण यन्त्रों से छिद कर बाहर निकलने लगता है, बालक के मस्तक और धड़ को झटके से अलग कर दिया जाता है, तब वेदना से चीख उठता है, यह है गूँगी चीख, फिर फोरसेप यन्त्र से दबाकर कठिन खोपड़ी को चूर कर दिया जाता है, अपने हाथ से अपनी सन्तान का गला घोटने वाली माँ, माँ नहीं राक्षसी है, कसाई बकरे को एक झटके में मार डालता है, लेकिल गर्भपात में कोमल अङ्गों को तीक्ष्ण औजारों से टुकड़े-टुकड़े करके मारा जाता है।
अहिंसा